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फिरोजाबाद: मारपीट के दो दोषियों को तीन-तीन वर्ष के कैद की सजा
Mon, 01 Mar 2021 12:23 AM IST
आगरा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 01 Mar 2021 12:23 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
फिरोजाबाद। अपर जिला जज द्वितीय रामनरायन ने एसीजेएम न्यायालय के सजा के फैसले के खिलाफ अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए पिता-पुत्र को तीन-तीन वर्ष के कारावास और साढ़े छह-छह हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर प्रत्येक को पांच-पांच माह का अतिरिक्त कारावास काटना होगा।
थाना नगला सिंघी के गांव गढ़ी थानी में विगत 18 दिसंबर 2001 को मोहरश्री और उसका पुत्र हरी शंकर खेत पर चारा कूटने जा रहे थे। तभी नगला खंगर के ठार हाथी के निवासी शिवशंकर एवं उसका बेटा मुरारीलाल मिल गए। मुरारीलाल ने गालीगलौज किए जाने के साथ कुल्हाड़ी से मोहरश्री के पीठ, गर्दन, सिर एवं कूल्हे पर प्रहार किया। हमले में मोहरश्री घायल हो गई। बीचबचाव कराने पर आरोपियों ने हरीशंकर को पीट दिया।
पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्जकर जांच कर चार्जशीट कोर्ट में पेश की। एसीजेएम प्रथम फिरोजाबाद के न्यायालय ने आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। इस पर आरोपियों ने अवर न्यायालय में निर्णय के खिलाफ अपील की। अपर जिला जज कोर्ट नं. दो ने रामनारायण के मामले की सुनवाई की।
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शासन की ओर से पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अजय कुमार यादव ने की। दोनों पक्षों के तर्क सुनने और गवाहों के बयान के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए अवर न्यायालय ने एसीएजेएम के गए निर्णय को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दोनों को दोषी माना। अवर न्यायालय में दोषियों पर साढ़े छह-साढ़े छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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थाना नगला सिंघी के गांव गढ़ी थानी में विगत 18 दिसंबर 2001 को मोहरश्री और उसका पुत्र हरी शंकर खेत पर चारा कूटने जा रहे थे। तभी नगला खंगर के ठार हाथी के निवासी शिवशंकर एवं उसका बेटा मुरारीलाल मिल गए। मुरारीलाल ने गालीगलौज किए जाने के साथ कुल्हाड़ी से मोहरश्री के पीठ, गर्दन, सिर एवं कूल्हे पर प्रहार किया। हमले में मोहरश्री घायल हो गई। बीचबचाव कराने पर आरोपियों ने हरीशंकर को पीट दिया।
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पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्जकर जांच कर चार्जशीट कोर्ट में पेश की। एसीजेएम प्रथम फिरोजाबाद के न्यायालय ने आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। इस पर आरोपियों ने अवर न्यायालय में निर्णय के खिलाफ अपील की। अपर जिला जज कोर्ट नं. दो ने रामनारायण के मामले की सुनवाई की।
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शासन की ओर से पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अजय कुमार यादव ने की। दोनों पक्षों के तर्क सुनने और गवाहों के बयान के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए अवर न्यायालय ने एसीएजेएम के गए निर्णय को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दोनों को दोषी माना। अवर न्यायालय में दोषियों पर साढ़े छह-साढ़े छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।