फिरोजाबाद। जैन संत आचार्य निर्भय सागर महाराज के सानिध्य में चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में चल रही शिक्षक प्रशिक्षण संगोष्ठी के तीसरे दिन पाठशालाओं के 600 विद्यार्थियों एवं 100 शिक्षकों ने भाग लिया। आचार्य निर्भय सागर की संगीतमय पूजा की गई।
जैनाचार्य ने कहा कि विद्यार्थी भगवान का रूप होते हैं। विद्यार्थी उत्साही, सत्यनिष्ठ, सहनशील, आज्ञाकारी, प्रसन्नचित्त, विनयवान, क्षमावान, अनुशासन प्रिय, दृढ़ संकल्पी और शांतिप्रिय होना चाहिए। आचार्य ने पाठशाला के संबंध में कहा पाठशाला अध्यात्म की शाला है। जीवनोत्थान की शाला है, मरुस्थली में वनस्थली है। पुण्य संचय की संचयनी बैंक है। धर्म रूपी बीज को जीवन में बोने की बीजशाला है।
दोपहर में हुए शिक्षक प्रशिक्षण में आचार्य पाठशाला के संचालक राजीव जैन, अखिलेश जैन ओमनगर, शोभित जैन, अंकुर जैन, प्रवीन जैन, विवेक जैन, अशोक जैन, आशीष जैन, उमेश जैन का सम्मान किया गया।