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Firozabad News: मजदूर दिवस पर शोषण के विरुद्ध लामबंद हुए रेलवे रनिंग रूम कर्मचारी, हंगामा
Sat, 02 May 2026 12:40 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद
Updated Sat, 02 May 2026 12:40 AM IST
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101, टूंडला में रेलवे रनिंग रूम के बाहर प्रदर्शन करते अस्थाई कर्मचारीसंवाद
- फोटो : महदेईया गांव में चूल्हे पर भोजन बनाती महिला।
टूंडला। मजदूर दिवस पर लाइनपार स्थित रेलवे रनिंग रूम में शुक्रवार को अस्थाई कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन न मिलने पर हंगामा किया। लोको पायलट और ट्रेन मैनेजरों के लिए भोजन बनाने वाले मैस स्टाफ और सफाई मित्रों ने ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर जमकर नारेबाजी की। निर्धारित न्यूनतम वेतन और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग करते हुए कर्मचारी काम बंद कर विरोध प्रदर्शन पर उतर आए और अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए हंगामा करते रहे।
रेलवे रनिंग रूम के दर्जनों अस्थाई कर्मचारी शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे लामबंद हुए। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का सीधा आरोप है कि सरकार की निर्धारित न्यूनतम वेतन का लाभ उन तक नहीं पहुंच रहा है। ठेकेदार सरकारी बजट का बड़ा हिस्सा खुद रख लेता है और कर्मचारियों को महीने के अंत में मात्र 8,500 रुपये थमाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं महीने में एक भी साप्ताहिक अवकाश नहीं दिया जाता। यदि कोई कर्मचारी मजबूरी में छुट्टी करता है, तो उसके वेतन से कटौती की जाती है।
अस्थाई कर्मचारी मुन्नेश कुमार ने बताया कि काम के बदले मिलने वाला अल्प वेतन भी कभी समय पर नहीं मिलता। 15-15 वर्षों से सेवा दे रहे हैं, किंतु आज तक उनका पीएफ नहीं काटा गया, जिससे उनका भविष्य असुरक्षित है। हक मांगने पर ठेकेदार द्वारा पुलिस कार्रवाई का डर दिखाया जाता है और विरोध करने पर नए कर्मचारियों की भर्ती कर पुराने लोगों को निकालने की धमकी दी जाती है। न्यूनतम वेतन और शोषण बंद करने की मांग को कर्मचारियों ने जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करने वालों में अंजना गुप्ता, ऊषादेवी, लालू, हेमंत कुमार, मनोज कुमार, सौरभ, राजकुमारी, उमा देवी, उत्तम कुमार, आकाश, शिवम कुमार, सोनू, मुनेश कुमार, पवन, बसंत, महेश कुमार, सचिन, सत्यप्रकाश और नमन सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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रेलवे रनिंग रूम के दर्जनों अस्थाई कर्मचारी शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे लामबंद हुए। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का सीधा आरोप है कि सरकार की निर्धारित न्यूनतम वेतन का लाभ उन तक नहीं पहुंच रहा है। ठेकेदार सरकारी बजट का बड़ा हिस्सा खुद रख लेता है और कर्मचारियों को महीने के अंत में मात्र 8,500 रुपये थमाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं महीने में एक भी साप्ताहिक अवकाश नहीं दिया जाता। यदि कोई कर्मचारी मजबूरी में छुट्टी करता है, तो उसके वेतन से कटौती की जाती है।
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अस्थाई कर्मचारी मुन्नेश कुमार ने बताया कि काम के बदले मिलने वाला अल्प वेतन भी कभी समय पर नहीं मिलता। 15-15 वर्षों से सेवा दे रहे हैं, किंतु आज तक उनका पीएफ नहीं काटा गया, जिससे उनका भविष्य असुरक्षित है। हक मांगने पर ठेकेदार द्वारा पुलिस कार्रवाई का डर दिखाया जाता है और विरोध करने पर नए कर्मचारियों की भर्ती कर पुराने लोगों को निकालने की धमकी दी जाती है। न्यूनतम वेतन और शोषण बंद करने की मांग को कर्मचारियों ने जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन करने वालों में अंजना गुप्ता, ऊषादेवी, लालू, हेमंत कुमार, मनोज कुमार, सौरभ, राजकुमारी, उमा देवी, उत्तम कुमार, आकाश, शिवम कुमार, सोनू, मुनेश कुमार, पवन, बसंत, महेश कुमार, सचिन, सत्यप्रकाश और नमन सहित अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।
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