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पॉजीटिव तरंग पैदा करती है चूड़ियों की खनक
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Sun, 12 Apr 2015 11:06 PM IST
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कांच की चूड़ियाें की मांग लगातार घटती जा रही है। आधुनिक युग में महिलाओं का रुझान मेटल की चूड़ियों की तरफ बढ़ रहा है। चूड़ियों की घटती मांग से दुकानदार बेहद चिंतित हैं। इसी बात पर मंथन करने के लिए लोक नागरिक कल्याण समिति ने ‘कांच की चूड़ी क्यों पहनें’ विषय पर सेमिनार आयोजित की। सेमिनार में ज्योतिषाचार्य, मनोवैज्ञानिक एवं चूड़ी कारोबारियों के साथ प्रशासनिक अफसरों ने कांच की चूड़ी को बढ़ावा देने पर मंथन किया।
शुभारंभ एसपी पीयूष श्रीवास्तव, सीडीओ सुजीत कुमार ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर किया। उन्होंनेकहा कि चूड़ियां भारतीय सभ्यता का प्रतीक हैं। एसडीओ सुजीत कुमार ने कहा कि पूरे विश्व में चूड़ी की विशेष पहचान है। चूड़ी कड़ी मेहनत के बाद बनती हैं। आज कंप्टीशन के बावजूद उद्यमियों के विशेष प्रयास से चूड़ी उद्योग लगातार ऊंचाइयों पर जा रहा है। प्राचार्य डा. विपिन अग्रवाल ने कहा कि कांच की चूड़ी नारीत्व का प्रतीक है। डा. उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि कांच की चूड़ियों का इतिहास पांच हजार वर्ष पुराना है। चूड़ियों की खनक एक सकरात्मक तरंग पैदा करती है। ज्योतिषाचार्य डा. राजेश्वर प्रसाद शर्मा ने ज्योतिष के माध्यम से चूड़ी का महत्व बताया। कवि यशपाल यश ने कविता के माध्यम से चूड़ी का महत्व बताया। चूड़ी कारोबारी अश्वनी भारद्वाज ने कहा कि जो संबंध घंटे का मंदिर से है, वही संबंध पति-पत्नी के बीच चूड़ी से है। संयोजक एवं समिति संस्थापक सतेंद्र जैन सौली ने कहा कि कांच की चूड़ी का कोई विकल्प नहीं है। कांच की चूड़ी के महत्व को समझाने के लिए समिति सोशल मीडिया का सहारा लेगी। कार्यक्रम में प्रमुख उद्योगपति ललितेश अग्रवल, महेंद्र जैन गप्पू, दिनेश जैन, हाजी बादशाह, मनोज गुप्ता, कपिल अग्रवाल, सतेंद्र जैन सौली, अश्वनी भारद्वाज, डा. राज, डा. डीपीएस राठौर, ज्योतिषाचार्य ब्रजेश तिवारी, कवि यशपाल यश आदि मौजूद रहे।
गीत-संगीत के साथ चूड़ी की झंकार...
वैशाली जैन ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। तनु जैन ने ‘मंगल बेला आई सपनों की दहलीज पर बजे शहनाई’ संयुक्त वशिष्ठ ने ‘ढोल बाजे ढोल’ गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। बच्चों ने गरवा डांस पर प्रस्तुति देकर समां बांध दिया।
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चूड़ियों में छिपा है एक अजब संगीत
प्रो. एबी चौबे ने ‘चूड़ियों का मनोविज्ञान क्या हो सकता है’ विषय पर प्रकाश डाला। चूड़ियां पति के प्रति समर्पण का भाव है। चूड़ियां जीवन को नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। इनमें एक अजब संगीत छिपा होता है, जो कई वाद्य यंत्र भी पैदा नहीं कर सकते।
फोटो -
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शुभारंभ एसपी पीयूष श्रीवास्तव, सीडीओ सुजीत कुमार ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर किया। उन्होंनेकहा कि चूड़ियां भारतीय सभ्यता का प्रतीक हैं। एसडीओ सुजीत कुमार ने कहा कि पूरे विश्व में चूड़ी की विशेष पहचान है। चूड़ी कड़ी मेहनत के बाद बनती हैं। आज कंप्टीशन के बावजूद उद्यमियों के विशेष प्रयास से चूड़ी उद्योग लगातार ऊंचाइयों पर जा रहा है। प्राचार्य डा. विपिन अग्रवाल ने कहा कि कांच की चूड़ी नारीत्व का प्रतीक है। डा. उमाशंकर गुप्ता ने कहा कि कांच की चूड़ियों का इतिहास पांच हजार वर्ष पुराना है। चूड़ियों की खनक एक सकरात्मक तरंग पैदा करती है। ज्योतिषाचार्य डा. राजेश्वर प्रसाद शर्मा ने ज्योतिष के माध्यम से चूड़ी का महत्व बताया। कवि यशपाल यश ने कविता के माध्यम से चूड़ी का महत्व बताया। चूड़ी कारोबारी अश्वनी भारद्वाज ने कहा कि जो संबंध घंटे का मंदिर से है, वही संबंध पति-पत्नी के बीच चूड़ी से है। संयोजक एवं समिति संस्थापक सतेंद्र जैन सौली ने कहा कि कांच की चूड़ी का कोई विकल्प नहीं है। कांच की चूड़ी के महत्व को समझाने के लिए समिति सोशल मीडिया का सहारा लेगी। कार्यक्रम में प्रमुख उद्योगपति ललितेश अग्रवल, महेंद्र जैन गप्पू, दिनेश जैन, हाजी बादशाह, मनोज गुप्ता, कपिल अग्रवाल, सतेंद्र जैन सौली, अश्वनी भारद्वाज, डा. राज, डा. डीपीएस राठौर, ज्योतिषाचार्य ब्रजेश तिवारी, कवि यशपाल यश आदि मौजूद रहे।
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गीत-संगीत के साथ चूड़ी की झंकार...
वैशाली जैन ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। तनु जैन ने ‘मंगल बेला आई सपनों की दहलीज पर बजे शहनाई’ संयुक्त वशिष्ठ ने ‘ढोल बाजे ढोल’ गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। बच्चों ने गरवा डांस पर प्रस्तुति देकर समां बांध दिया।
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चूड़ियों में छिपा है एक अजब संगीत
प्रो. एबी चौबे ने ‘चूड़ियों का मनोविज्ञान क्या हो सकता है’ विषय पर प्रकाश डाला। चूड़ियां पति के प्रति समर्पण का भाव है। चूड़ियां जीवन को नई ऊर्जा प्रदान करती हैं। इनमें एक अजब संगीत छिपा होता है, जो कई वाद्य यंत्र भी पैदा नहीं कर सकते।
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