{"_id":"6179af26b09d3d553e127a641d735959","slug":"high-court-judgment-about-the-debate-throughout-the-day-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट के फैसले को लेकर दिन भर रही चर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट के फैसले को लेकर दिन भर रही चर्चा
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
Updated Wed, 19 Aug 2015 11:16 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फीरोजाबाद। हाईकोर्ट के फैसले के बाद सूबे की प्राथमिक शिक्षा की बदहाली से अफसरों और जनप्रतिनिधियों के बच्चों को गुजरना पड़ सकता है। यदि आदेश पर अमल हुआ तो इंग्लिश मीडियम स्कूलों में वातानुकूलित क्लासों से हटकर साहब का लाड़ला वर्षों से खंडहर पड़ी पाठशाला में पढ़ने जाएगा। साहब को अभी से चिंता सताने लगी है। प्राथमिक विद्यालय में अनिवार्य रूप से शिक्षा ग्रहण कराने के हाईकोर्ट का फैसला बुधवार को सरकारी दफ्तरों में चर्चा का विषय बना रहा। बीएसए दफ्तर के शिक्षाधिकारी और कर्मचारी भी दबी जुबान से इस फैसले से नाखुश दिखे। लेकिन आमजन ने इस फैसले का स्वागत किया।
इलाहाबाद कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बच्चों का सरकारी स्कूल में पढ़ना अनिवार्य किया जाए। इस फैसले से उन परिवारों को फिर से बेहतर शिक्षा की उम्मीद जागी है, जिनके बच्चे जान हथेली पर रख शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं। विभागीय कर्मचारियों को प्राथमिक स्कूलों पर भरोसा नहीं है। एक शिक्षाधिकारी ने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा अच्छी नहीं है ना ही वहां व्यवस्थाएं। ऐसे में अनिवार्यता बहुत परेशानी में डालने वाली है। हालांकि इन स्कूलों में शिक्षक हाई क्वालीफाइड हैं लेकिन उन्हें दूसरे कामों में लगा दिया जाता है। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले पर चर्चाएं चलती रहीं।
यह है जिले के स्कूलों की स्थिति
कई परिषदीय स्कूल के जर्जर भवनों में बच्चे पढ़ते हैं तो कहीं सड़क पर स्कूल चल रहे हैं। गुरुजी ने बीएसए से लेकर एनएसए तक चक्कर काटे। अभी तक शासन-प्रशासन नजरअंदाज करता आया है।
विज्ञापन
- प्राथमिक विद्यालय चौकीगेट कन्या। भवन स्वामी से झगड़ा होने के बाद सड़क पर संचालित है।
- प्राथमिक विद्यालय हुंडावाला बाग में छात्र छात्राओं को छत नसीब नहीं है। खुले आसमान में शिक्षा ग्रहण करते हैं।
- प्राथमिक विद्यालय कटरा बालक। बल्ली के सहारे छत खड़ी हुई है। जो हादसे का कारण बन सकती है।
पहले और अब में आ गया अंतर
बीएसए बालमुकुंद प्रसाद ने कहा कि मैं प्राइमरी स्कूल में पढ़ा, तब और अब में बहुत अंतर आ गया है। शिक्षक की तमाम ड्यूटियां हैं। पहले नहीं थी। सुविधाएं बढ़ने के साथ अब जिम्मेदारी बढ़ी हैं। शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए अभिभावकों का जागरूक होना सबसे जरूरी है।
ड्यूटियां हैं तमाम, कैसे सुधरे शिक्षा का स्तर
मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान पा चुके शिक्षक दौलतपाल ने कहा कि शिक्षा का स्तर तब सुधरेगा जब शिक्षकों को सिर्फ शैक्षणिक कार्य में लगाया जाए। अभी प्राइमरी शिक्षकों को पढ़ाई से ज्यादा अन्य ड्यूटियों पर ध्यान देना पड़ता है।
सोशल मीडिया पर छा गए मेसेज
सोशल मीडिया पर भी हाईकोर्ट के फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी जा रही थीं। सरकारी महकमे से जुड़े लोग इसे ना पसंद कर रहे थे। लेकिन अन्य ग्रुपों में यह फैसला शिक्षा में समानता वाला बताया गया। जो प्राइमरी शिक्षा को नई दिशा में ले जाएगा।
विज्ञापन
इलाहाबाद कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बच्चों का सरकारी स्कूल में पढ़ना अनिवार्य किया जाए। इस फैसले से उन परिवारों को फिर से बेहतर शिक्षा की उम्मीद जागी है, जिनके बच्चे जान हथेली पर रख शिक्षा ग्रहण करने जाते हैं। विभागीय कर्मचारियों को प्राथमिक स्कूलों पर भरोसा नहीं है। एक शिक्षाधिकारी ने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा अच्छी नहीं है ना ही वहां व्यवस्थाएं। ऐसे में अनिवार्यता बहुत परेशानी में डालने वाली है। हालांकि इन स्कूलों में शिक्षक हाई क्वालीफाइड हैं लेकिन उन्हें दूसरे कामों में लगा दिया जाता है। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले पर चर्चाएं चलती रहीं।
विज्ञापन
यह है जिले के स्कूलों की स्थिति
कई परिषदीय स्कूल के जर्जर भवनों में बच्चे पढ़ते हैं तो कहीं सड़क पर स्कूल चल रहे हैं। गुरुजी ने बीएसए से लेकर एनएसए तक चक्कर काटे। अभी तक शासन-प्रशासन नजरअंदाज करता आया है।
विज्ञापन
- प्राथमिक विद्यालय चौकीगेट कन्या। भवन स्वामी से झगड़ा होने के बाद सड़क पर संचालित है।
- प्राथमिक विद्यालय हुंडावाला बाग में छात्र छात्राओं को छत नसीब नहीं है। खुले आसमान में शिक्षा ग्रहण करते हैं।
- प्राथमिक विद्यालय कटरा बालक। बल्ली के सहारे छत खड़ी हुई है। जो हादसे का कारण बन सकती है।
पहले और अब में आ गया अंतर
बीएसए बालमुकुंद प्रसाद ने कहा कि मैं प्राइमरी स्कूल में पढ़ा, तब और अब में बहुत अंतर आ गया है। शिक्षक की तमाम ड्यूटियां हैं। पहले नहीं थी। सुविधाएं बढ़ने के साथ अब जिम्मेदारी बढ़ी हैं। शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए अभिभावकों का जागरूक होना सबसे जरूरी है।
ड्यूटियां हैं तमाम, कैसे सुधरे शिक्षा का स्तर
मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान पा चुके शिक्षक दौलतपाल ने कहा कि शिक्षा का स्तर तब सुधरेगा जब शिक्षकों को सिर्फ शैक्षणिक कार्य में लगाया जाए। अभी प्राइमरी शिक्षकों को पढ़ाई से ज्यादा अन्य ड्यूटियों पर ध्यान देना पड़ता है।
सोशल मीडिया पर छा गए मेसेज
सोशल मीडिया पर भी हाईकोर्ट के फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी जा रही थीं। सरकारी महकमे से जुड़े लोग इसे ना पसंद कर रहे थे। लेकिन अन्य ग्रुपों में यह फैसला शिक्षा में समानता वाला बताया गया। जो प्राइमरी शिक्षा को नई दिशा में ले जाएगा।