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बजट: कांच उद्योग को निराशा, सिर्फ कॉरपोरेट पर फोकस से निर्यातकों को झटका

Mon, 01 Feb 2021 11:18 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Mon, 01 Feb 2021 11:18 PM IST
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Budget: disappointment for glass industry, focus on corporate only shocks exporters
नगला भाऊ स्थित औद्योगिक क्षेत्र में चूड़ी के कारखानों में काम करते थे श्रमिक - फोटो : FIROZABAD
फिरोजाबाद। आम बजट से कांच उद्योग को निराशा हाथ लगी है। कांच उद्योग के लिए कोई घोषणा नहीं की गई है। निर्यातकों को निराशा हाथ लगी है। कांच कारोबारियों का कहना है कि बजट में एमएसएमई को बढ़ावा देने की बात कही गई है लेकिन राहत भरा एक भी प्रावधान नहीं किया गया है। सरकार ने पूरा ध्यान सिर्फ कॉरपोरेट सेक्टर पर दिया है। कॉरपोरेट टैक्स कम करने से कांच उद्योग को कोई लाभ मिलने वाला नहीं है। डिविडेंट टैक्स हटाने का लाभ भी सिर्फ कॉरपोरेट सेक्टर को मिलेगा।
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वित्तमंत्री निर्यात सेक्टर को किया निराश
फिरोजाबाद में मुख्यत: ग्लास का ही कारोबार है। कांच के आइटमों पर जीएसटी 18 प्रतिशत है। पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए मेक इन इंडिया के तहत सरकार को पानी और अन्य शीतल पेय की बिक्री कांच की बोतलों में करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। प्लास्टिक बोतल पर पांच प्रतिशत जीएसटी है, कांच की बोतलों पर भी यही टैक्स दर किए जाने की अपेक्षा थी लेकिन निराशा हाथ लगी। कांच उद्योग से जुडे़ निर्यात सेक्टर के लिए भी कोई घोषणा नहीं की गई है।
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मुकेश बंसल टौनी - अध्यक्ष द ग्लास मैन्युफेक्चरर एक्सपोर्ट एसोसिएशन
कांच उद्योग को रफ्तार की उम्मीद नहीं हुई पूरी
औद्योगिक दृष्टि से बजट पूरी तरह से कॉरपोरेट सेक्टर पर फोकस है। लघु और सूक्ष्म उद्योगों को नजरअंदाज किया गया है। कांच और चूड़ी उद्योग लघु और सूक्ष्म उद्योग में आते हैं। कॉरपोरेट टैक्स घटाया है तो कांच आइटमों पर भी टैक्स घटाया जाना चाहिए था। इससे संकट से जूझते कांच उद्योग को कुछ रफ्तार मिलती लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। कांच और चूड़ी उद्योग के लिए बजट पूरी तरह से निराशाजनक रहा है।
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पीके झिंदल, कांच चूड़ी उत्पादक एवं सदस्य सिंडीकेट
टैक्स में छूट न देकर वित्तमंत्री ने किया निराश
बजट में उम्मीद थी कि लघु उद्योगों के लिए सरकार टैक्स आदि में छूट की घोषणा करेगी। लेकिन ऐसा कोई प्रावधान नहीं दिखाई दिया है। कांच उद्योग का जिक्र तक बजट में नहीं है। जबकि पूरे देश में चूड़ी सिर्फ फिरोजाबाद में ही बनती है। एमएसएमई के तहत जो उद्योग आते हैं उनको भी राहत बजट में नहीं दी गई है।
अभिषेक मित्तल चंचल - कांच उद्यमी
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