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सात साल पहले शहरी हुए, पर आज तक घर नहीं हो सके रोशन

Sat, 04 Dec 2021 12:01 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Sat, 04 Dec 2021 12:01 AM IST
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Became urban seven years ago, but till date the house could not be illuminated
फिरोजाबाद। नगर निगम सीमा में होने के बाद भी रसूलपुर, मोहम्मदपुर गजमलपुर, टापा खुर्द एवं लालपुर के अधिकांश मोहल्लों में आज भी लोगों को बिजली की रोशनी का इंतजार है। नाली-खड़ंजे के साथ विद्युतीकरण का अभाव लोगों की मुश्किलें और अधिक बढ़ रहा है। शहर में शामिल 14 से अधिक नई आबदी व मोहल्लाें में बिजली नहीं होने से बच्चों की पढाई-लिखाई प्रभावित है। इन क्षेत्रों में सूरज ढलने के बाद सभी काम प्रभावित होते हैं।
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2014-15 में फिरोजाबाद नगर पालिका को नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद 2007-2008 में शहरी सीमा में शामिल हो चुकीं ग्राम पंचायत रसूलपुर, मोहम्मदपुर गजमलपुर, टापा खुर्द एवं लालपुर के लोगों को क्षेत्र में सर्वांगीण विकास की उम्मीद जगी। लोगों को उम्मीद थी कि शहर की तरह यहां स्वच्छ पेयजल आपूर्ति, साफ-सुथरी सड़कें व नाली-खड़ंजों के साथ ही बिजली व्यवस्था सुदृढ़ होगी। हालांकि मूलभूत सुविधाओं की उम्मीद में बैठे करीब 14 मोहल्लों व नई आबादी के सैकड़ों परिवारों को गंदगी व जलभराव से मुक्ति नहीं मिली। इसके साथ ही विद्युतीकरण के अभाव ने दुश्वारियाें में इजाफा कर दिया। इन क्षेत्रों में शाम ढलते ही सन्नाटा हो जाता है। बच्चों को भी पढ़ाई के लिए बिजली का कमी खलती है।
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दशकों पूर्व बसे मोहल्लों में नहीं हुआ विद्युतीकरण
राठौर नगर, सती नगर, शांतिनगर, विजय नगर, मोदीनगर, बालाजी नगर, कमला नगर, लोधीपुरम, किशन नगर, माता प्रसाद कलावती स्कूल के पीछे मठिया वाले क्षेत्र में विद्युतीकरण नहीं हो सका है। वहीं टापा खुर्द क्षेत्र में श्रीपाल कॉलोनी एवं चांदनी धाम में पोल गढे़ हैं लेकिन अब तक लाइन नहीं खींची गई है। आसफाबाद क्षेत्र के किशन नगर एवं रसूलपुर क्षेत्र में माता प्रसाद कलावती स्कूल के पीछे दस से अधिक गलियों एवं मठिया वाले क्षेत्र में आज भी विद्युतीकरण नहीं हो सका हैं।
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लकड़ी की बल्लियों पर झूलते हैं विद्युत तार
विद्युतीकरण नहीं होने के कारण तमाम दुश्वारियां झेल रहे लोगों ने घरों में रात के समय अंधेरे से मुक्ति पाने के लिए 100-500 मीटर दूरी पर स्थित एलटी लाइन पर सीधे कटिया कनेक्शन डालना शुरू कर दिया है। नगर निगम में शामिल इन ग्राम पंचायतों में से कई जगहों पर आज भी लकड़ी की बल्लियों पर झूलते तार और केबल यदा-कदा हादसों का कारण भी बन चुकी हैं।
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क्षेत्रीय वांशिदाओं की बात-
- सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए बालिकाओं को पढ़ाने का दावा कर रही है लेकिन इलाके में बिजली ही नहीं है तो पढ़ाई कैसे हो? रात के समय पूरे मोहल्ले में अंधेरा हो जाता है। घर से निकलना तो दूर दरवाजे पर खड़े होने में भी डर लगता है।
समरीन छात्रा मोहल्ला किशन नगर
- बिजली का कनेक्शन मांगने जाओ तो बिजली वाले कहते हैं कि जहां से पोल लगा है, वहीं से तार डाल जाएगा। एस्टीमेट के नाम पर हजारों रुपये मांगे जाते हैं। दो जून की रोटी के लिए पैसे हैं नहीं तो फिर बिजली कनेक्शन के लिये हजारों रुपये कहां से लाएं?
प्रेमा देवी
- हर माह कुछ लोग मोटर साइकिलों पर सवार होकर आ जाते हैं कि किस घर में कटिया कनेक्शन लगा है। कनेक्शन काटने अथवा सेटलमेंट करने के लिए दबाव बनाया जाता है। नियमानुसार विद्युतीकरण कराने की बात कोई नहीं करता।
शशि निवासी श्रीपाल कॉलोनी
- नाली-खड़ंजा नहीं होने के कारण गंदगी का दंश तो झेल ही रहे हैं। क्षेत्र में विद्युतीकरण नहीं होने के कारण कोयला अथवा लकड़ी जलाने के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है।
गीता देवी विजय नगर
- पानी-बिजली और नाली-खड़ंजे के लिये कई साल अफसरों की ड्योढ़ी पर चक्कर काट रहे हैं। अब आसपास विद्युतीकरण का काम शुरू हुआ है लेकिन कछुआ गति से चल रहा है। बिजली नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी प्रभावित है।

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नगर निगम में शामिल ग्राम पंचायतों में विद्युतीकरण से जुड़े कार्यों की पूर्ति के लिये कार्ययोजना बनी है। कुछ जगहों पर काम भी शुरू करा दिया है। समस्या गंभीर है। पंचायतों को चिह्नित करा शासन से जरूरी संसाधन व बजट की मांग करेंगे।
एसएन गर्ग अधीक्षण अभियंता विद्युत शहरी
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