{"_id":"5-48905","slug":"Firozabad-48905-5","type":"story","status":"publish","title_hn":"कागजों में कर दिया हाउस होल्ड सर्वे ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कागजों में कर दिया हाउस होल्ड सर्वे
Firozabad
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
फीरोजाबाद। हाउस होल्ड सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 462 छात्रों ने स्कूलों का मुंह आज तक नहीं देखा। यह वर्ष 2012 की सर्वे रिपोर्ट बयां कर रही है। कोई छात्र घर के काम में लगे होने के कारण स्कूल नहीं जा रहा है तो कोई छोटे भाई बहनों की देखभाल में नहीं जा पा रहा है। रिपोर्ट में 6 से 14 वर्ष तक की उम्र के बच्चों की संख्या सर्वाधिक है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत अगस्त व सितंबर माह में प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों ने सर्वे किया था। इसमें गरीबी, ईट भट्टा में काम करने वाले, भाई बहनों की देखभाल करने वाले, पढ़ाई में कठिनाई जैसे 17 बिंदुओं पर रिपोर्ट का खाका तैयार किया गया। यह रिपोर्ट अब बीएसए डा. जितेंद्र सिंह यादव को सौंप दी गयी है। रिपोर्ट साफ बयां कर रही है सर्वे घर में बैठकर किया गया है। रिपोर्ट कई दिनों से विभाग दबाये बैठा था।
स्कूल न जाने का कारण संख्या
अपने घर के काम में लगे रहना 147
कचरा बीनना 21
भाई बहनों की देखभाल करना 131
विद्यालय दूर होना 02
शिक्षक का व्यवहार अनुचित होना 06
पढ़ाई में कठिनाई 01
गरीबी 06
अन्य 148
कुल 462
कैसे होना चाहिये था सर्वे
सर्वे के लिये जिला स्तर पर मीटिंग ब्लाक स्तर पर रखनी चाहिये थी। इसके बाद हेड मास्टर को हर ब्लाक में, फिर एनसीआरसी में सबकों सर्वे रिपोर्ट का आधार बताना चाहिये, लेकिन इस रिपोर्ट के लिये न तो बैठकें हुई न राष्ट्रीय कार्यक्रम में अधिकारी ने दिलचस्पी दिखाई। पुराने फार्मेट वर्ष 2010-11 को आधार को रख घर बैठे सर्वे रिपोर्ट तैयार कर विभाग को सौंप दी गयी। जिले में सैकड़ों होटलों व ढाबों में काम करने वाले बच्चे इस विभाग को नहीं मिले। विभाग ने इसकी संख्या शून्य दर्शायी है।
विज्ञापन
सर्वे करने का जिम्मा जिला समन्वयक वैकल्पिक शिक्षा केवी सिंह को दिया गया था। रिपोर्ट मिली गई है। अगर रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलती है तो जांच कि जाएगी। वहीं इस बारे में जिला समन्वय वैकल्पिक शिक्षा केवी सिंह ने रिपोर्ट के बारे में बताने से इंकार कर दिया।
डा. जितेंद्र सिंह यादव, बीएसए।
विज्ञापन
सर्व शिक्षा अभियान के तहत अगस्त व सितंबर माह में प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों ने सर्वे किया था। इसमें गरीबी, ईट भट्टा में काम करने वाले, भाई बहनों की देखभाल करने वाले, पढ़ाई में कठिनाई जैसे 17 बिंदुओं पर रिपोर्ट का खाका तैयार किया गया। यह रिपोर्ट अब बीएसए डा. जितेंद्र सिंह यादव को सौंप दी गयी है। रिपोर्ट साफ बयां कर रही है सर्वे घर में बैठकर किया गया है। रिपोर्ट कई दिनों से विभाग दबाये बैठा था।
विज्ञापन
स्कूल न जाने का कारण संख्या
अपने घर के काम में लगे रहना 147
कचरा बीनना 21
भाई बहनों की देखभाल करना 131
विद्यालय दूर होना 02
शिक्षक का व्यवहार अनुचित होना 06
पढ़ाई में कठिनाई 01
गरीबी 06
अन्य 148
कुल 462
कैसे होना चाहिये था सर्वे
सर्वे के लिये जिला स्तर पर मीटिंग ब्लाक स्तर पर रखनी चाहिये थी। इसके बाद हेड मास्टर को हर ब्लाक में, फिर एनसीआरसी में सबकों सर्वे रिपोर्ट का आधार बताना चाहिये, लेकिन इस रिपोर्ट के लिये न तो बैठकें हुई न राष्ट्रीय कार्यक्रम में अधिकारी ने दिलचस्पी दिखाई। पुराने फार्मेट वर्ष 2010-11 को आधार को रख घर बैठे सर्वे रिपोर्ट तैयार कर विभाग को सौंप दी गयी। जिले में सैकड़ों होटलों व ढाबों में काम करने वाले बच्चे इस विभाग को नहीं मिले। विभाग ने इसकी संख्या शून्य दर्शायी है।
विज्ञापन
सर्वे करने का जिम्मा जिला समन्वयक वैकल्पिक शिक्षा केवी सिंह को दिया गया था। रिपोर्ट मिली गई है। अगर रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलती है तो जांच कि जाएगी। वहीं इस बारे में जिला समन्वय वैकल्पिक शिक्षा केवी सिंह ने रिपोर्ट के बारे में बताने से इंकार कर दिया।
डा. जितेंद्र सिंह यादव, बीएसए।