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पिछले साल से 712 मीट्रिक टन अधिक हुई गेहूं की खरीद
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फतेहपुर। गेहूं खरीद के लिए इस बार शासन से जिले को भले ही लक्ष्य न दिया गया हो, लेकिन खरीद रिकार्ड तोड़ की गई है। पिछले साल की तुलना में इस बार 712 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद अधिक हुई है। खरीद की तारीख बढ़ाने के बाद चल रहे 13 क्रय केंद्र भी मंगलवार से बंद कर दिए गए। दो महीने 22 दिन चली खरीद में 14372 किसानों का 61749.105 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया।
समर्थन मूल्य पर किसानों का गेहूं खरीदने के लिए जिले में 59 क्रय केंद्र बनाए गए थे। इसमें हाटशाखा के 21 क्रय केंद्र, पीसीएफ के 29, यूपीएसएस के छह, मंडी समिति के दो और भारतीय खाद्य निगम का एक क्रय केंद्र था। एक अप्रैल से 15 जून तक चलने वाली गेहूं की खरीद को प्रदेश सरकार ने सात दिन और बढ़ाकर 22 जून तक कर दिया था, लेकिन इसमें हाटशाखा के 13 क्रय केंद्रों को छोड़ कर सभी संस्था के केंद्रों पर रोक लगा दी गई थी।
सबसे ज्यादा पीसीएफ ने 28796.455 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की है। वहीं, दूसरे नंबर पर हाटशाखा ने 25080.900 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की। पांचों संस्थाओं ने 61749.105 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है। वहीं, पिछले साल की बात करें तो 61037 मीट्रिक टन ही गेहूं की खरीद हुई थी। इस बार 712 मीट्रिक टन अधिक गेहूं की खरीद हुई है।
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संस्था का नाम कुल खरीद (मीट्रिक टन) किसानों की संख्या
हाटशाखा-- 25080.900 5706
पीसीएफ--- 28796.455 6973
यूपीएसएस--- 5099.450 1040
मंडी परिषद-- 1526.900 357
भा.खा.निगम-- 1245.400 296
गेहूं की खरीद तो बंद हो गई है, लेकिन खरीद करने वाली संस्थाओं पर किसानों का 13 करोड़ 65 लाख रुपये अभी बकाया है। संस्थाओं के जिला प्रभारियों का कहना है कि एक सप्ताह में सभी किसानों के खाते में भुगतान पहुंच जाएगा। डिप्टी आरएमओ रमेश श्रीवास्तव ने बताया कि दो करोड़ 69 लाख 59 हजार रुपये हाटशाखा पर किसानों का बकाया है। पीसीएफ पर सात करोड़ 49 लाख 30 हजार रुपये, यूपीएसएस संस्था पर दो करोड़ 44 लाख रुपये, मंडी परिषद पर 96 लाख 15 हजार और भारतीय खाद्य निगम पर तीन लाख 95 हजार रुपये की बकाएदारी है। किसानों को ऑनलाइन भुगतान किया जाता है। एक सप्ताह में सभी किसानों के खाते में रुपये पहुंच जाएंगे।
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समर्थन मूल्य पर किसानों का गेहूं खरीदने के लिए जिले में 59 क्रय केंद्र बनाए गए थे। इसमें हाटशाखा के 21 क्रय केंद्र, पीसीएफ के 29, यूपीएसएस के छह, मंडी समिति के दो और भारतीय खाद्य निगम का एक क्रय केंद्र था। एक अप्रैल से 15 जून तक चलने वाली गेहूं की खरीद को प्रदेश सरकार ने सात दिन और बढ़ाकर 22 जून तक कर दिया था, लेकिन इसमें हाटशाखा के 13 क्रय केंद्रों को छोड़ कर सभी संस्था के केंद्रों पर रोक लगा दी गई थी।
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सबसे ज्यादा पीसीएफ ने 28796.455 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की है। वहीं, दूसरे नंबर पर हाटशाखा ने 25080.900 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की। पांचों संस्थाओं ने 61749.105 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा है। वहीं, पिछले साल की बात करें तो 61037 मीट्रिक टन ही गेहूं की खरीद हुई थी। इस बार 712 मीट्रिक टन अधिक गेहूं की खरीद हुई है।
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संस्था का नाम कुल खरीद (मीट्रिक टन) किसानों की संख्या
हाटशाखा-- 25080.900 5706
पीसीएफ--- 28796.455 6973
यूपीएसएस--- 5099.450 1040
मंडी परिषद-- 1526.900 357
भा.खा.निगम-- 1245.400 296
गेहूं की खरीद तो बंद हो गई है, लेकिन खरीद करने वाली संस्थाओं पर किसानों का 13 करोड़ 65 लाख रुपये अभी बकाया है। संस्थाओं के जिला प्रभारियों का कहना है कि एक सप्ताह में सभी किसानों के खाते में भुगतान पहुंच जाएगा। डिप्टी आरएमओ रमेश श्रीवास्तव ने बताया कि दो करोड़ 69 लाख 59 हजार रुपये हाटशाखा पर किसानों का बकाया है। पीसीएफ पर सात करोड़ 49 लाख 30 हजार रुपये, यूपीएसएस संस्था पर दो करोड़ 44 लाख रुपये, मंडी परिषद पर 96 लाख 15 हजार और भारतीय खाद्य निगम पर तीन लाख 95 हजार रुपये की बकाएदारी है। किसानों को ऑनलाइन भुगतान किया जाता है। एक सप्ताह में सभी किसानों के खाते में रुपये पहुंच जाएंगे।