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सामुदायिक शौचालय बनाने में खर्च किए गए 13 लाख पर फिरा पानी

Tue, 16 Feb 2021 07:59 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 16 Feb 2021 07:59 PM IST
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गढ़ीवा का सामुदायिक शौंचालय। संवाद - फोटो : FATEHPUR
फतेहपुर। अमृत योजना का सच शहर के विभिन्न स्थानों पर बनाए गए सामुदायिक शौचालयों की बदहाली में दिख रहा है।
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हालात ये हैं कि 13 लाख खर्च करने के बाद भी इनका प्रयोग एक भी दिन नहीं हो सका। देखरेख के अभाव में ये क्षतिग्रस्त हो गए हैं। किसी में पानी की टंकी गायब है, तो किसी के दरवाजे गायब हैं। सीटों में ईंट पत्थर के टुकड़े भरे हैं।
केंद्र सरकार की अमृत योजना के तहत शहर को खुले से शौच मुक्त बनाने के लिए नगर पालिका ने शहर के विभिन्न मोहल्लों में सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया था।
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दिसंबर 2018 में शुरू इस योजना के तहत नगर पालिका ने प्रति सीट 6500 रुपये के हिसाब से टेंडर जारी किया। 2019 में ये सामुदायिक शौचालय बनकर तैयार हुए थे।
इनका लाभ आम जनता को देने का काम शुरू तो किया गया, लेकिन उनकी देखरेख के लिए कर्मचारी नहीं नियुक्त किए गए।
इस वजह से 13 लाख से जो सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं, उनमें ज्यादातर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। प्रमाण के तौर पर गढ़ीवा में बने शौचालय की छत में रखी पानी टंकी गायब हो गई।
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इतना ही नहीं सीटों में ईंट के टुकड़े भरें हैं। इसी तरह पीरनपुर सामुदायिक शौचालय की वाटर लाइन तोड़ दी गई है। सभी दरवाजे टूटे हैं।
सीटों में मिट्टी भर दी गई है। यह सामुदायिक शौचालय बानगी के तौर पर हैं। यही हालत अधिकांश शौचालयों की है।
सफाई निरीक्षक राकेश गौड़ का कहना है कि सामुदायिक शौचालयों में तैनाती के लिए शासन से सफाई कर्मचारियों की भर्ती के लिए अनुमति मांगी गई है, लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मिली है। कई स्थानों के सामुदायिक शौचालय अराजकतत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिए हैं।
महेंद्र सिंह का कहना है कि सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराकर पालिका ने उन्हें लावारिश छोड़ रखा है। यहां न पानी की सुविधा है, न सफाई की। ऐसे में ये बेमकसद हैं।
अंकित कुमार का कहना है कि शुरुआत में शौचालयों का उपयोग हुआ, लेेकिन सफाई न होने के कारण लोगों ने उपयोग करना छोड़ दिया। ऐसे में अराजकतत्वों ने उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया है।
गणेश प्रसाद का कहना है कि सामुदायिक शौचालयों का निर्माण अनुपयोगी स्थानों पर कराया गया है। ये शौचालय असुरक्षित हैं। ऐसे में कोई महिला वहां शौच के लिए कैसे जा सकती है।

मो. गुलाम का कहना है कि सामुदायिक शौचालयों की जरूरत सार्वजनिक स्थल के आसपास होती है, लेकिन नगर पालिका ने अनुपयोगी स्थानों पर शौचालय बनवा दिए।

पीरनपुर का जर्जर सामुदायिक सौंचालय। संवाद

पीरनपुर का जर्जर सामुदायिक सौंचालय। संवाद- फोटो : FATEHPUR

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