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Fatehpur News: सिपाही की गोली मारकर हत्या में डकैत भाइयों समेत तीन को उम्रकैद
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राधेश्याम।
फतेहपुर। मुठभेड़ में सिपाही की मौत और सात पुलिस कर्मियों समेत आठ लोगों के घायल होने के मामले में 29 साल बाद कोर्ट ने डकैत भाइयों समेत तीन को दोषी करार दिया। एससी-एसटी कोर्ट के विशेष न्यायाधीश डाॅ. मोहम्मद इलियास ने शनिवार को दोषियों को आजीवन कारावास और 32-32 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
घटना असोथर थाना क्षेत्र के टीकर गांव में 21 अक्तूबर 1997 की रात हुई थी। तत्कालीन असोथर थाने के इंस्पेक्टर श्याम नारायण सरोज, दरोगा भिखारी, सिपाही सदाशिव सिंह, अनुरुद्ध सिंह, हरीश कुमार, शोभनाथ सिंह, रामवीर सिंह और रामसेवक पासवान शिवबोधन के डेरा गांव के गुंडा एक्ट में वारंटी खुन्नी उर्फ फूल सिंह को पकड़ने पहुंचे थे।
पुलिस कर्मियों ने जीप गेंडुरी के पास खड़ी कर दी थी। वारंटी को लेकर पुलिस टीम ट्रैक्टर से लौट रही थी। टीकर गांव के पास रात करीब 10 बजे सरपत (बड़ी झाड़ी) में छिपे बदमाशों के गिरोह ने पुलिस टीम पर राइफल और बंदूकों से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली लगने से सिपाही रामसेवक की मौत हो गई। अन्य पुलिस कर्मी और वारंटी गोलियों और छर्रे लगने से घायल हो गए थे।
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सिपाही रामसेवक का पैतृक गांव असोथर है। वह परिवार के साथ कई दशक से प्रयागराज के होलागढ़ थाने के मालापुर गांव में रहते थे। घायल पुलिसकर्मी किसी तरह जिला अस्पताल पहुंचे। इसके बाद सदर कोतवाली में 22 अक्तूबर 1997 को सुल्तानपुर घोष थाने के ओरम्हा गांव के सगे भाई सीताराम मौर्या, राधेश्याम मौर्या, खागा कोतवाली के पुरइन निवासी छोटा सिंह, फूल सिंह, धर्म सिंह, राम सिंह, भूरा, रामराज और रमेश लोनिया के खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, एससी-एसटी और बलवा का मुकदमा दर्ज किया गया था।
तत्कालीन हथगाम सीओ केएन राम ने मामले की विवेचना की थी। विवेचना पूरी होने के बाद 24 मार्च 1998 को गिरोहबंद डकैत राधेश्याम, सीताराम और छोटा सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। सगे भाइयों की गिरफ्तारी के बाद वर्ष 2016 से मामले की सुनवाई कोर्ट में हुई। करीब 10 साल की सुनवाई के बाद कोर्ट ने तीनों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
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घटना असोथर थाना क्षेत्र के टीकर गांव में 21 अक्तूबर 1997 की रात हुई थी। तत्कालीन असोथर थाने के इंस्पेक्टर श्याम नारायण सरोज, दरोगा भिखारी, सिपाही सदाशिव सिंह, अनुरुद्ध सिंह, हरीश कुमार, शोभनाथ सिंह, रामवीर सिंह और रामसेवक पासवान शिवबोधन के डेरा गांव के गुंडा एक्ट में वारंटी खुन्नी उर्फ फूल सिंह को पकड़ने पहुंचे थे।
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पुलिस कर्मियों ने जीप गेंडुरी के पास खड़ी कर दी थी। वारंटी को लेकर पुलिस टीम ट्रैक्टर से लौट रही थी। टीकर गांव के पास रात करीब 10 बजे सरपत (बड़ी झाड़ी) में छिपे बदमाशों के गिरोह ने पुलिस टीम पर राइफल और बंदूकों से ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली लगने से सिपाही रामसेवक की मौत हो गई। अन्य पुलिस कर्मी और वारंटी गोलियों और छर्रे लगने से घायल हो गए थे।
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सिपाही रामसेवक का पैतृक गांव असोथर है। वह परिवार के साथ कई दशक से प्रयागराज के होलागढ़ थाने के मालापुर गांव में रहते थे। घायल पुलिसकर्मी किसी तरह जिला अस्पताल पहुंचे। इसके बाद सदर कोतवाली में 22 अक्तूबर 1997 को सुल्तानपुर घोष थाने के ओरम्हा गांव के सगे भाई सीताराम मौर्या, राधेश्याम मौर्या, खागा कोतवाली के पुरइन निवासी छोटा सिंह, फूल सिंह, धर्म सिंह, राम सिंह, भूरा, रामराज और रमेश लोनिया के खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, एससी-एसटी और बलवा का मुकदमा दर्ज किया गया था।
तत्कालीन हथगाम सीओ केएन राम ने मामले की विवेचना की थी। विवेचना पूरी होने के बाद 24 मार्च 1998 को गिरोहबंद डकैत राधेश्याम, सीताराम और छोटा सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। सगे भाइयों की गिरफ्तारी के बाद वर्ष 2016 से मामले की सुनवाई कोर्ट में हुई। करीब 10 साल की सुनवाई के बाद कोर्ट ने तीनों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।