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धूप ढलते ही बढ़ी ठिठुरन
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर
Updated Tue, 22 Dec 2015 12:54 AM IST
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दिन में चटक धूप और धूप ढलते ही ठिठुरन हो जा रही है। शाम को तो कमरे के
भीतर तक गलन पहुंच गई। लिहाजा लोग रजाई और कंबल में दुबकने को मजबूर हुए।
सबसे ज्यादा दिक्कत राहगीर, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन, अस्पतालों में ठहरे
तीमारदार, रिक्शा व सवारी वाहन चलाने वालों को हो रही है।
सोमवार को चटक धूप के चलते लोगों को दिन में ठंड का अहसास कम हुआ। हालांकि धूप से हटते ही शरीर में कंपकंपी लग रही थी। स्कूली बच्चे भी दिन में हाफ स्वेटर पहने हुए दिखाई दिए।
पूरे दिन धूप में बैठने वालों को ही राहत मिली लेकिन जैसे ही धूप खत्म हुई ठंड सुरसुरी के साथ शरीर को कंपाने में जुट गई। रात नौ बजे के बाद तो सड़क पर चहल-पहल खत्म हो गई।
लोग घरों में रूम हीटर, रजाई व कंबल से ठंड मिटाते रहे। सड़क पर जिंदगी गुजारने वालों और यात्रियों को जहां-तहां अलाव जलाकर ठंड मिटाना पड़ा। शासन के निर्देश के बाद भी जिले में ठंड से बचाव के इंतजाम नहीं हो रहे हैं।
पालिका की ओर से अलाव के लिए लकड़ियां कहां डाली गई हैं, इसका अता-पता नहीं है। बस अड्डा, रेलवे स्टेशन व सार्वजनिक जगह अलाव जलता नहीं दिखा।
सोमवार को चटक धूप के चलते लोगों को दिन में ठंड का अहसास कम हुआ। हालांकि धूप से हटते ही शरीर में कंपकंपी लग रही थी। स्कूली बच्चे भी दिन में हाफ स्वेटर पहने हुए दिखाई दिए।
पूरे दिन धूप में बैठने वालों को ही राहत मिली लेकिन जैसे ही धूप खत्म हुई ठंड सुरसुरी के साथ शरीर को कंपाने में जुट गई। रात नौ बजे के बाद तो सड़क पर चहल-पहल खत्म हो गई।
लोग घरों में रूम हीटर, रजाई व कंबल से ठंड मिटाते रहे। सड़क पर जिंदगी गुजारने वालों और यात्रियों को जहां-तहां अलाव जलाकर ठंड मिटाना पड़ा। शासन के निर्देश के बाद भी जिले में ठंड से बचाव के इंतजाम नहीं हो रहे हैं।
पालिका की ओर से अलाव के लिए लकड़ियां कहां डाली गई हैं, इसका अता-पता नहीं है। बस अड्डा, रेलवे स्टेशन व सार्वजनिक जगह अलाव जलता नहीं दिखा।