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डीएम के निर्देश पर पट्टों की पड़ताल करने पहुंची टीम
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अल्लीपुर-फतेहपुर क्षेत्र के ओखरा कुंवरपुर गांव में आवासीय पट्टे आवंटित होने के बावजूद उनमें कब्जा न मिलने के प्रकरण की जांच को जिलाधिकारी संजीव सिंह ने फतेहपुर और बिंदकी तहसील के उप जिलाधिकारियों की संयुक्त टीम गठित की है।
2009 में इस गांव के 18 लोगों को आवासीय पट्टा आवंटित किया गया था लेकिन किसी को मौके पर कब्जा नहीं मिल। डीएम के निर्देश पर टीम पट्टों की पड़ताल करने पहुंची तो हकीकत कुछ और ही निकली।
एसडीएम सदर प्रमोद झा, एसडीएम बिंदकी आशीष कुमार और तहसीलदार बिंदकी गणेश सिंह समेत लेखपाल और राजस्व निरीक्षकों की टीम ओखरा कुंवरपुर गांव जांच करने पहुंची। यहां पट्टेधारकों ने उन्हें बताया कि जिस स्थान का उन्हें पट्टा दिया गया है, वहां पूरे गांव की नालियों का पानी इकट्ठा होता है ।
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अधिकारियों ने मौके पर देखा तो जमीन तालाबनुमा नजर आई। यहां एकत्र हुए ग्रामीणों ने भी जांच टीम को बताया कि यदि इस स्थान पर पट्टाधारकों को कब्जा दे दिया गया तो पूरे गांव की जल निकासी प्रभावित हो जाएगी। लिहाजा इन सभी को किसी दूसरे स्थान पर जमीन आवंटित कर कब्जा दिलाया जाए।
जांच के दौरान टीम जब पट्टाधारकों की पात्रता की पड़ताल की तो पता चला कि 18 में से लगभग 14 लोग पट्टे के लिए अपात्र हैं। किसी का दो मंजिला मकान बना हुआ है तो कोई कानपुर जैसे शहर में नौकरी कर रहा है।
ऐसे में 18 में से महज चार लोग की पात्रता की श्रेणी में बचे। एसडीएम बिंदकी ने बताया कि जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। स्थानीय लेखपाल को पट्टेधारकों के लिए जमीन तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी से अग्रिम निर्देश प्राप्त होने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।
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2009 में इस गांव के 18 लोगों को आवासीय पट्टा आवंटित किया गया था लेकिन किसी को मौके पर कब्जा नहीं मिल। डीएम के निर्देश पर टीम पट्टों की पड़ताल करने पहुंची तो हकीकत कुछ और ही निकली।
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एसडीएम सदर प्रमोद झा, एसडीएम बिंदकी आशीष कुमार और तहसीलदार बिंदकी गणेश सिंह समेत लेखपाल और राजस्व निरीक्षकों की टीम ओखरा कुंवरपुर गांव जांच करने पहुंची। यहां पट्टेधारकों ने उन्हें बताया कि जिस स्थान का उन्हें पट्टा दिया गया है, वहां पूरे गांव की नालियों का पानी इकट्ठा होता है ।
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अधिकारियों ने मौके पर देखा तो जमीन तालाबनुमा नजर आई। यहां एकत्र हुए ग्रामीणों ने भी जांच टीम को बताया कि यदि इस स्थान पर पट्टाधारकों को कब्जा दे दिया गया तो पूरे गांव की जल निकासी प्रभावित हो जाएगी। लिहाजा इन सभी को किसी दूसरे स्थान पर जमीन आवंटित कर कब्जा दिलाया जाए।
जांच के दौरान टीम जब पट्टाधारकों की पात्रता की पड़ताल की तो पता चला कि 18 में से लगभग 14 लोग पट्टे के लिए अपात्र हैं। किसी का दो मंजिला मकान बना हुआ है तो कोई कानपुर जैसे शहर में नौकरी कर रहा है।
ऐसे में 18 में से महज चार लोग की पात्रता की श्रेणी में बचे। एसडीएम बिंदकी ने बताया कि जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। स्थानीय लेखपाल को पट्टेधारकों के लिए जमीन तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी से अग्रिम निर्देश प्राप्त होने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।