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शिक्षकों ने अपनी जेब से लाखों खर्च कर स्कूलों की रंगाई-पुताई कराया

Tue, 03 Mar 2015 12:33 AM IST
सुघर सिंह
सुघर सिंह Updated Tue, 03 Mar 2015 12:33 AM IST
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teachers spend lakhs of rupees from their own pocket to colour schools

कांवेंट स्कूलों की तर्ज पर प्राइमरी स्कूलों को चमकाने की कोशिश में गुरुजी को 10 लाख का पलीता लग गया है। ग्राम शिक्षा निधि में बजट न होने की वजह से स्कूल भवनों की रंगाई-पुताई कराने वाले प्रभारी प्रधानाध्यापकों को यह पैसा नहीं मिल पा रहा है।

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इसमें 190 प्रभारी प्रधानाध्यापक ऐसे हैं, जो प्रमोशन के बाद दूसरे गांव के स्कूल में जा रहे हैं। ऐसे में इनको यह धनराशि मिलना मुश्किल है।

अगस्त माह में बीएसए ने सभी स्कूल भवनों की रंगाई- पुताई का निर्देश दिया था। प्रधानाध्यापकों ने बजट के  अभाव का रोना रोया तो खंड शिक्षा अधिकारियों ने दबाव बनाया और बाद में बजट मिलने पर पैसा ले लेने का भरोसा दिया।
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खास तौर पर बीआरसी और 134 एनपीआरसी स्तर के सभी स्कूलों में कार्यरत इंचार्ज प्रधानाध्यापकों ने बिना लिखित आदेश के अपनी जेब से रंगाई-पुताई कराई।

बेसिक शिक्षा विभाग प्रति प्राथामिक स्कूल पांच हजार रुपये व प्रति अतिरिक्त कक्षा कक्ष 1500 रुपये रंगाई पुताई का बजट स्कूलों को आवंटित करता है।

इस तरह से अगर सिर्फ  प्राथमिक स्कूल भवनों की रंगाई पुताई का काम पूरा मान लिया जाए, तो गुरुजनों की जेब का करीब 10 लाख रुपया रंगाई पुताई कराने में खर्च हो चुका है।
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अब इनकी प्रमोशन प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रमोशन के बाद उन्हें दूसरे स्कूलो में जाना पड़ेगा। ऐसे में रंगाई पुताई में खर्च की गई धनराशि का स्कूल को अभिलेखों में कोई हिसाब किताब नहीं है। क्योंकि इस राशि की निकासी का अधिकार तत्कालीन प्रधानाध्यापक के पास होगा।

ग्राम शिक्षा निधि के तहत रंगाई पुताई का बजट आता है। अभी बजट नहीं आया है, लेकिन जिन प्रधानाध्यापकों ने रंगाई-पुताई कराई है, उन्हें बजट  आने पर भुगतान कराया जाएगा। वित्तीय वर्ष के अंत में बजट आने की पूरी उम्मीद है। इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए जाएंगे। ओपी त्रिपाठी, बेसिक शिक्षा अधिकारी।


इंसेट
कनवर्जन कास्ट में खर्च रकम भी डूबी!
फतेहपुर। प्रमोशन से हेडमास्टर बने शिक्षकों की कनवर्जन कास्ट में खर्च गई रकम डूबने के कगार पर है। मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण से धन आवंटन में विलंब होने के कारण पिछले कई महीनेे से इंचार्ज प्रधानाध्यापक अपनी जेब से मध्यान्ह भोजन तैयार करा रहे हैं। प्रमोशन के बाद यह शिक्षक दूसरे स्कूलों में हेडमास्टर बन जाएंगे। ऐसी हालत में पुराने स्कूल में खर्च की कनवर्जन कास्ट की धनराशि वहां पर कार्यरत हेडमास्टर भुगतान करता है या नहीं उसके मर्जी पर निर्भर होगा। क्योंकि अब इस रकम का निकलना प्रमोसन पाने वाले हेडमास्टर के अधिकार से बाहर होगा।




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