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Fatehpur News: इंतजार, तलाश और उम्मीद में बीते 18 साल, अब अपहरण की रिपोर्ट दर्ज

Wed, 04 Dec 2024 12:32 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 04 Dec 2024 12:32 PM IST
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Spent 18 years in waiting, searching and hoping, now kidnapping report filed
फतेहपुर। आठ साल का मासूम मां के साथ मिलकर पिता की तलाश करते हुए 26 साल का हो गया। पिता नहीं मिले। पुलिस ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करने के सिवा कुछ नहीं किया। इस बीच मां-बेटे ने अफसरों के दफ्तरों के चक्कर लगाए और नेताओं से गुहार लगाई। कहीं से मदद नहीं मिली। इंतजार, तलाश और उम्मीद के बीच जिंदगी के 18 साल बीत गए। पुलिस से निराश होकर बेटा पिता को खोजने की गुहार लेकर न्यायालय पहुंचा। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने अब अपहरण का केस दर्ज किया है। बेटे ने पिता की हत्या की आशंका जताई है।
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बकेवर थाना क्षेत्र के बकेवर बुजुर्ग गांव निवासी अंकित कुमार गुप्ता (26) ने बताया कि उसके चक्की संचालक पिता राकेश कुमार 14 दिसंबर 2006 की दोपहर बाजार से सामान लेने के लिए निकले थे। तब से उनका कुछ पता नहीं चल सका। कुछ दिनों बाद चाचा ब्रजेश की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की। कुछ दिनों बाद मां रामा देवी को किसी ने बताया कि पिता का अपहरण किया गया है। वह जल्द पुलिस से शिकायत करें, वरना उनकी हत्या हो सकती है। बेटे का आरोप है कि पुलिस ने 18 साल पहले पिता की सिर्फ गुमशुदगी दर्ज की थी। इसके बाद उनकी तलाश का कोई प्रयास नहीं किया।
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- बोलती रही पुलिस, मिल जाएंगे राकेश
अंकित के मुताबिक उसे अच्छी तरह याद है कि उसका एक हाथ पकड़कर मां थाने चौकियों के चक्कर काटती रही, लेकिन किसी ने उनकी बात पर विश्वास नहीं किया। हर जगह यही जवाब मिलता कि तलाश की जा रही है, राकेश मिल जाएंगे। इस तरह जिंदगी के 18 साल बीत गए, पिता सिर्फ तस्वीरों में ही रहे। दिल नहीं मानता कि वह इस दुनिया में नहीं हैं। दिल की यही आवाज सुनकर दो साल से पिता की दोबारा से तलाश शुरू की।
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- बीते साल एसपी ने भी लौटाया खाली हाथ
अंकित के मुताबिक छह नवंबर 2023 को एसपी से शिकायत की। उन्होंने भी संवेदना नहीं दिखाई और कोई कार्रवाई नहीं हुई। कोई रास्ता न दिखा तो 19 दिसंबर 2023 को कोर्ट की शरण ली। न्यायिक मजिस्ट्रेट नंदिनी उपाध्याय ने 29 अगस्त 2024 को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। तीन महीने बाद दो दिसंबर को पुलिस ने अपहरण का मुकदमा दर्ज किया। थानाध्यक्ष संगीता ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।

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पिता का दर्द सीने में दबाकर मां ने की परवरिश
बोला बेटा- मां 18 सालों से दुख का पहाड़ सीने में रखे हुए हैं, लेकिन कभी एहसास नहीं होने दिया
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। अंकित की जिंदगी में झांके तो पिता का गम तो दिखता ही है, लेकिन परिवार को पालने के लिए मां का त्याग और परिश्रम भी कम नजर नहीं आता है। अंकित ने बताया कि जिस वक्त पिता लापता हुए थे, तब वह और दोनों बहनें अंकिता और अमिता भी छोटी थीं। पिता की तलाश कर मां थक जरूर गई थीं, लेकिन नाउम्मीद नहीं थीं। उन्हें पता था कि परिवार के लोग भले ही पति की तलाश में साथ न दें, लेकिन बच्चे बड़े होकर उनके सुहाग का पता जरूर लगाएंगे। यही सोचकर मां ने खुद को घर पर लगी चक्की में खपा दिया। दिन-रात कड़ी मेहनत कर हम भाई-बहनों की परवरिश की। दोनों बहनों को पढ़ा लिखाकर उनकी शादी की। इस बीच कभी भी पिता की कमी खलने नहीं दी। अंकित की मानें तो मां पिता की याद में घुटती रहीं, लेकिन बच्चों को कभी अपनी तकलीफ का एहसास नहीं होने दिया।
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