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Fatehpur News: ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल, दोपहर दो बजे इमरजेंसी भी बंद
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फतेहपुर। ग्रामीण चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा बदहाल है। ब्लाक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अपने दायित्वों में खरे नहीं उतर रहे हैं। अस्पताल में रुकने के भय से डॉक्टर मरीज भर्ती नहीं करते हैं। यहां चिकित्सा व्यवस्था सिर्फ मलहम पट्टी तक सीमित है। दोपहर दो बजे के बाद इन अस्पतालों में ताला झूलता है। किसी के बीमार या दुर्घटना ग्रस्त होने पर रेफर करने के लिए कर्मचारी उपलब्ध होता है। यही कारण है कि इन सरकारी ग्रामीण अस्पतालों को लोग भूलते जा रहे हैं। 108 एंबुलेंस या निजी वाहन से रोगियों को सीधे अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बहुआ बांदा सागर रोड में संचालित है। यहां पर तीन डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट नियुक्त हैं। इनको औसतन 35 से 40 के मध्य ओपीडी करना है। अस्पताल खुलने का समय सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे है। रात में एक कर्मचारी की ड्यूटी रहती है, जो किसी दुर्घटनाग्रस्त के आने पर सीधे सदर अस्पताल के लिए रेफर कर पल्लू झाड़ लेता है।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोराईं में तीन डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट तैनात हैं। अस्पताल विलंब से खुलना आदत में शुमार है। यहां पर सर्दी-जुकाम तक इलाज सीमित है। दोपहर दो बजे के बाद गेट पर ताला बंद हो जाता है, जो दूसरे दिन ही खुलता है। केवल स्टाफ नर्स ही अपने कक्ष में रहती हैं।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र असोथर में दो डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट की नियुक्ति है। महिला डॉक्टर का पद खाली है। गुरुवार और सोमवार को 60 से 65 ओपीडी होती है। अन्य दिनों में तो कभी कभार मरीज आते हैं। दोपहर दो बजे के बाद अस्पताल में ताला बंद हो जाता है। सरकारी आवास में सिर्फ नर्स रहती हैं। उन्हीं की जिम्मेदारी है कि दो बजे के बाद आने वाले मरीजों को रेफर करें।
सीएमओ डॉ. सुनील कुमार भारती ने बताया कि सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात डॉक्टरों को नियुक्ति मुख्यालय में रहने के निर्देश हैं। अगर कोई डॉक्टर अस्पताल बंद होने के बाद मुख्यालय छोड़ता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। औचक निरीक्षण कर पीएचसी में डॉक्टरों की मौजूदगी का जायजा लिया जाएगा।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बहुआ बांदा सागर रोड में संचालित है। यहां पर तीन डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट नियुक्त हैं। इनको औसतन 35 से 40 के मध्य ओपीडी करना है। अस्पताल खुलने का समय सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे है। रात में एक कर्मचारी की ड्यूटी रहती है, जो किसी दुर्घटनाग्रस्त के आने पर सीधे सदर अस्पताल के लिए रेफर कर पल्लू झाड़ लेता है।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोराईं में तीन डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट तैनात हैं। अस्पताल विलंब से खुलना आदत में शुमार है। यहां पर सर्दी-जुकाम तक इलाज सीमित है। दोपहर दो बजे के बाद गेट पर ताला बंद हो जाता है, जो दूसरे दिन ही खुलता है। केवल स्टाफ नर्स ही अपने कक्ष में रहती हैं।
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प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र असोथर में दो डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट की नियुक्ति है। महिला डॉक्टर का पद खाली है। गुरुवार और सोमवार को 60 से 65 ओपीडी होती है। अन्य दिनों में तो कभी कभार मरीज आते हैं। दोपहर दो बजे के बाद अस्पताल में ताला बंद हो जाता है। सरकारी आवास में सिर्फ नर्स रहती हैं। उन्हीं की जिम्मेदारी है कि दो बजे के बाद आने वाले मरीजों को रेफर करें।
सीएमओ डॉ. सुनील कुमार भारती ने बताया कि सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात डॉक्टरों को नियुक्ति मुख्यालय में रहने के निर्देश हैं। अगर कोई डॉक्टर अस्पताल बंद होने के बाद मुख्यालय छोड़ता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। औचक निरीक्षण कर पीएचसी में डॉक्टरों की मौजूदगी का जायजा लिया जाएगा।