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पराग की जगह प्राइवेट डेयरियों ने जमा लिया कब्जा

Sat, 11 Dec 2021 12:15 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 11 Dec 2021 12:15 AM IST
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Private dairies took possession instead of Parag
मौहार दुग्ध अवसीतन केंद्र में मशीनों की देखभाल करते कर्मचारी। संवाद - फोटो : FATEHPUR
चौडगरा। जिले में श्वेत क्रांति की नींव रखने वाला दुग्ध संघ फतेहपुर पूरी तरह से सिमट गया है। एक समय जहां इस संघ में 1200 से अधिक समितियां थी। वहां आज 150 समितियां ही बची हैं। बिंदकी तहसील के मौहार दुग्ध अवशीतन केंद्र के निर्धारित तीन मार्गों में दो पर ही समितियां संचालित हैं। इनकी जगह निजी डेयरियों ने कब्जा कर लिया है।
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वर्ष 1995-96 में इस दुग्ध अवशीतन केंद्र की स्थापना हुई थी। इसमें 25000 लीटर से अधिक दूध का रोज कलेक्शन होता था। वर्तमान में यहां 1000 लीटर दूध ही एकत्र हो रहा है।
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खागा का दुग्ध अवशीतन केंद्र 2010 से बंद है, जबकि धाता में 50 समितियां 4000 लीटर दूध कलेक्शन कर रही हैं। यहां का दूध सीधे प्रयागराज जाता है। अमौली, बकेवर, जाफरगंज, जोनिहां रूट पर 20 समितियां चालू हैं। इनसे 700 लीटर दूध मिलता है।
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जिले में दुग्ध संघ को फिर से पटरी पर लाने के लिए एक माह पूर्व महाप्रबंधक प्रयागराज मंडल नेे जनपद का भ्रमण किया। मौहार अवशीतन केंद्र में बैठक कर सचिवों को दुग्ध उत्पादन, समय पर भुगतान का आश्वासन दिया था। वर्तमान में एक सप्ताह देरी से भुगतान हो रहा है। क्षेत्र के अमौली, जहानाबाद में प्राइवेट डेयरियों ने पूरा कब्जा जमा रखा है।
जिला प्रभारी दुग्ध संघ फतेहपुर दिनेश सिंह भदौरिया ने बताया कि पराग दुग्ध उत्पादकों के आकर्षित नहीं होने का मुख्य कारण दूध के मूल्य का समय पर भुगतान न होना है। एक पखवारा रोककर दूसरे पखवारे का भुगतान होता है। यानी दो सप्ताह का भुगतान फंसा रहता है, जबकि निजी डेयरियां सप्ताह होते ही भुगतान कर देती हैं।
दो बार बंद हो चुकी पराग
बिंदकी तहसील क्षेत्र में पराग डेयरी दो बार बंद हो चुकी है। 2010 और 2016 में बंद होने के बाद फिर 2018 में चालू हुई। इसके बाद सरकार ने फतेहपुर दुग्ध संघ को प्रयागराज दुग्ध संघ से संबद्ध कर दिया।

तब से यहां की हालत खराब है। अधिकारियों ने दूध कलेक्शन, दुग्ध उत्पादकों को सुविधाएं और दूध उत्पादन पर ध्यान नहीं दिया। इस कारण दुग्ध उत्पादक पराग से धीरे-धीरे अलग होकर प्राइवेट डेयरियों की तरफ चले गए।
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