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बाजार में अच्छी कीमत, सरकारी से किसानों का मोहभंग
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फतेहपुर। क्रय केंद्रों पर सरकारी मानकों को पूरा करने और ऑनलाइन आदि व्यवस्था को झंझट मानने वाले किसान आढ़तियों और व्यापारियों को अपना गेहूं बेच रहे हैं। 60 से 115 रुपये प्रति क्विंटल घाटा सहकर किसान अपनी उपज बाजार में बेच रहे हैं।
उनका कहना है कि अगर सरकारी क्रय केंद्र पर ले जाएंगे तो कम से कम 50 रुपये प्रति क्विंटल खर्च करना पड़ेगा। 2015 रुपये प्रति क्विंटल सरकारी रेट है, जबकि 1900 से 1950 तक व्यापारी खरीद ले रहे हैं। सरकारी केंद्र पर किसानों के न पहुंचने से विभाग को लक्ष्य पूरा करने की चिंता सता रही है, क्योंकि खरीद के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे निराशाजनक हैं।
इस बार खरीद व्यवस्था डिजिटल की गई है। ऑनलाइन पंजीकरण कराने वाले किसान की ही खरीद होनी है। इसके लिए जिले में 59 क्रय केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों में अब तक 279 किसानों ने ही करीब 1156 मीट्रिक टन गेहूं बेचा है। जबकि इस बार का लक्ष्य 66 हजार मीट्रिक टन है।
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इस बार अति बारिश और अन्य वजह से फसल उत्पादन कम हुआ है। साथ ही बाजार रेट भी मौजूदा समय में अच्छा है। ऐसे में किसान आढ़तियों को विकल्प के रूप में चुन रहे हैं। कारण सरकारी केंद्र पर बेचने के लिए सभी दस्तावेज के साथ पहले ऑनलाइन कराएं। फिर अधिकारी उसका सत्यापन करेंगे। इसके बाद केंद्र पर जाकर नंबर भी लेना पड़ रहा है। फायदा बाजार भाव से 60 से 115 रुपये ही है। इसलिए इन समस्याओं को देखते हुए बिना किसी झंझट के घर पर ही गेहूं तौल दे रहे हैं। उन्हें तत्काल रुपये भी मिल जा रहे हैं।
किसानों को सरकारी क्रय केंद्र अपनी उपज बेचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। किसी भी किसान को तौल में असुविधा न हो, इसके लिए सभी केंद्र प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं। फिर अगर किसी को कोई समस्या होती है तो उसका निस्तारण किया जाएगा।
- अविनाश झा, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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उनका कहना है कि अगर सरकारी क्रय केंद्र पर ले जाएंगे तो कम से कम 50 रुपये प्रति क्विंटल खर्च करना पड़ेगा। 2015 रुपये प्रति क्विंटल सरकारी रेट है, जबकि 1900 से 1950 तक व्यापारी खरीद ले रहे हैं। सरकारी केंद्र पर किसानों के न पहुंचने से विभाग को लक्ष्य पूरा करने की चिंता सता रही है, क्योंकि खरीद के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे निराशाजनक हैं।
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इस बार खरीद व्यवस्था डिजिटल की गई है। ऑनलाइन पंजीकरण कराने वाले किसान की ही खरीद होनी है। इसके लिए जिले में 59 क्रय केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों में अब तक 279 किसानों ने ही करीब 1156 मीट्रिक टन गेहूं बेचा है। जबकि इस बार का लक्ष्य 66 हजार मीट्रिक टन है।
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इस बार अति बारिश और अन्य वजह से फसल उत्पादन कम हुआ है। साथ ही बाजार रेट भी मौजूदा समय में अच्छा है। ऐसे में किसान आढ़तियों को विकल्प के रूप में चुन रहे हैं। कारण सरकारी केंद्र पर बेचने के लिए सभी दस्तावेज के साथ पहले ऑनलाइन कराएं। फिर अधिकारी उसका सत्यापन करेंगे। इसके बाद केंद्र पर जाकर नंबर भी लेना पड़ रहा है। फायदा बाजार भाव से 60 से 115 रुपये ही है। इसलिए इन समस्याओं को देखते हुए बिना किसी झंझट के घर पर ही गेहूं तौल दे रहे हैं। उन्हें तत्काल रुपये भी मिल जा रहे हैं।
किसानों को सरकारी क्रय केंद्र अपनी उपज बेचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। किसी भी किसान को तौल में असुविधा न हो, इसके लिए सभी केंद्र प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं। फिर अगर किसी को कोई समस्या होती है तो उसका निस्तारण किया जाएगा।
- अविनाश झा, जिला खाद्य विपणन अधिकारी