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Fatehpur News: सरकारी व प्राइवेट बसों में डिब्बा बंद भेजे जा रहे पार्सल
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फतेहपुर। जनपद में जहां डग्गामार वाहनों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकारी व प्राइवेट बसों में बिना चेकिंग बंद डिब्बों में पार्सल भेजे जा रहे हैं। इन पार्सलों में बंद सामग्री की अधिकृत जानकारी जिम्मेदारों के पास नहीं है। ऐसे में कोई मादक या ज्वलनशील पदार्थ भी आसानी से भेजा जा सकता है। इस तरफ परिवहन और पुलिस प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है।
जनपद के डिपो से अनुबंधित बसों के साथ 117 का संचालन हो रहा है। प्रतिदिन सात से आठ हजार यात्री इन बसों में सफर करते हैं। इसके अलावा चार प्राइवेट बस स्टापों से करीब दो सौ अधिक प्राइवेट बसों का संचालन हो रहा है। इन बसों से हर रोज पार्सल के रूप में बड़े-बड़े सामान इधर से उधर भेजे जा रहे हैं। इसकी कोई रसीद व सामग्री की जानकारी के लिए कोई लिखापढ़ी नहीं होती है। ऐसे में कोई विस्फोटक पदार्थ भी बसों से भेज जाता हो, उसकी जानकारी भी नहीं हो पाती है। रोडवेज बसों में ये चलन आम हो चुका है। सोमवार सुबह करीब 11.30 बजे ज्वालागंज बस स्टॉप में बांदा जाने वाली बस में सवारियां बैठी हुई थी। थोड़ी देर में एक युवक टेप सील बंद पैकेट देकर सौ रुपये देकर चला गया। चालक ने पैकेट हाथ में उठाया और वजन ज्यादा बताकर आगे की सीट के पास रख दिया। बस स्टॉप से कानपुर से प्रयागराज तक आसानी 50 से सौ रुपये कोई भी सामान भेजा जा सकता है। उसमें मादक पदार्थ या विस्फोटक सामान हो, इससे चालक-परिचालक को कोई मतलब नहीं है।
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प्राइवेट बसें बनी मालवाहक
लंबी दूरी की बसें पूरी तरह मालवाहक हैं। उनकी डिग्गी व छत पर कई तरह की सामग्री भेजी जाती है। इसमें अधिकांश सामान बिना जीएसटी व बिलिंग के ही जाता है।
यात्री के साथ ही उनका लगेज बसों से भेजा जा सकता है। बिना चेकिंग और निजी पार्सल ले जाना सरासर गलत है। मार्गों पर इसकी चेकिंग की जा रही है। इसे रोककर कार्रवाई की जाएगी।
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अनिल कुमार, आरएम, कानपुर
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जनपद के डिपो से अनुबंधित बसों के साथ 117 का संचालन हो रहा है। प्रतिदिन सात से आठ हजार यात्री इन बसों में सफर करते हैं। इसके अलावा चार प्राइवेट बस स्टापों से करीब दो सौ अधिक प्राइवेट बसों का संचालन हो रहा है। इन बसों से हर रोज पार्सल के रूप में बड़े-बड़े सामान इधर से उधर भेजे जा रहे हैं। इसकी कोई रसीद व सामग्री की जानकारी के लिए कोई लिखापढ़ी नहीं होती है। ऐसे में कोई विस्फोटक पदार्थ भी बसों से भेज जाता हो, उसकी जानकारी भी नहीं हो पाती है। रोडवेज बसों में ये चलन आम हो चुका है। सोमवार सुबह करीब 11.30 बजे ज्वालागंज बस स्टॉप में बांदा जाने वाली बस में सवारियां बैठी हुई थी। थोड़ी देर में एक युवक टेप सील बंद पैकेट देकर सौ रुपये देकर चला गया। चालक ने पैकेट हाथ में उठाया और वजन ज्यादा बताकर आगे की सीट के पास रख दिया। बस स्टॉप से कानपुर से प्रयागराज तक आसानी 50 से सौ रुपये कोई भी सामान भेजा जा सकता है। उसमें मादक पदार्थ या विस्फोटक सामान हो, इससे चालक-परिचालक को कोई मतलब नहीं है।
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प्राइवेट बसें बनी मालवाहक
लंबी दूरी की बसें पूरी तरह मालवाहक हैं। उनकी डिग्गी व छत पर कई तरह की सामग्री भेजी जाती है। इसमें अधिकांश सामान बिना जीएसटी व बिलिंग के ही जाता है।
यात्री के साथ ही उनका लगेज बसों से भेजा जा सकता है। बिना चेकिंग और निजी पार्सल ले जाना सरासर गलत है। मार्गों पर इसकी चेकिंग की जा रही है। इसे रोककर कार्रवाई की जाएगी।
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अनिल कुमार, आरएम, कानपुर