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फल लेकर ई-रिक्शा पर निकले बेचने
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फतेहपुर। लॉकडाउन में कारोबार थमा, दूसरी जगह काम भी नहीं मिला। किराए का ठेला खोजा तो वह भी नहीं मिला। ऐसे में शहर में रहने वाले दो दोस्त हताश नहीं हुए। ई-रिक्शा पर फल बेचने निकल पड़े। दोनों का कहना है कि वह अब इसी तरह लॉकडाउन तक परिवार का पेट पाल लेंगे।
बिंदकी बस स्टॉप के पास रहने वाले रहीश व तौफीक दोस्त हैं। रहीश ने एक साल पहले लोन पर ई-रिक्शा लिया था। इसी के सहारे पत्नी व छह बच्चों के साथ गुजर बसर कर रहा था। तौफीक के पास सिलाई का हुनर है। लेकिन लॉकडाउन में काम न मिलने से पत्नी व तीन बच्चों के सामने संकट खड़ा हो गया। रहीश व तौफीक ने तय किया दोनों मिलकर फल बचेंगे। रहीश ने बताया कि पहले ठेला किराए पर लेकर फल या सब्जी लगाने का मन बनाया।
लेकिन कहीं भी किराए पर ठेला नहीं मिला। ऐसे में तौफीक ने ई-रिक्शा में फल बेचने की राय दी। शुक्रवार की रात ई-रिक्शा को चार्ज किया। शनिवार सुबह दोनों दोस्त जेब में दो हजार रुपये लेकर मुराइनटोला में एक फल आढ़ती के पास पहुंच गए। आढ़ती ने परिवार की मजबूरी सुनी तो दो हजार रुपये लेकर 3200 का माल देने पर राजी हो गया। संतरा, अंगूर, अनार, पपीता, केला, तरबूज को टोकरी में लादकर बेचने निकल पड़े। पूरे दिन दोनों ने मोहल्लों में घूमकर फल बेचा। तौफीक आवाज लगा रहा था तो रहीश ई-रिक्शा चलाने के बाद तौल में भी मदद करता रहा। शाम तक दोनों ने इतनी रकम कमा ली कि अगले दिन का माल खरीदने व घर का खर्च निकल गया। दोनों दोस्तों का कहना है कि वह अब इसी तरह लॉकडाउन तक परिवार का पेट पाल लेंगे।
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बिंदकी बस स्टॉप के पास रहने वाले रहीश व तौफीक दोस्त हैं। रहीश ने एक साल पहले लोन पर ई-रिक्शा लिया था। इसी के सहारे पत्नी व छह बच्चों के साथ गुजर बसर कर रहा था। तौफीक के पास सिलाई का हुनर है। लेकिन लॉकडाउन में काम न मिलने से पत्नी व तीन बच्चों के सामने संकट खड़ा हो गया। रहीश व तौफीक ने तय किया दोनों मिलकर फल बचेंगे। रहीश ने बताया कि पहले ठेला किराए पर लेकर फल या सब्जी लगाने का मन बनाया।
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लेकिन कहीं भी किराए पर ठेला नहीं मिला। ऐसे में तौफीक ने ई-रिक्शा में फल बेचने की राय दी। शुक्रवार की रात ई-रिक्शा को चार्ज किया। शनिवार सुबह दोनों दोस्त जेब में दो हजार रुपये लेकर मुराइनटोला में एक फल आढ़ती के पास पहुंच गए। आढ़ती ने परिवार की मजबूरी सुनी तो दो हजार रुपये लेकर 3200 का माल देने पर राजी हो गया। संतरा, अंगूर, अनार, पपीता, केला, तरबूज को टोकरी में लादकर बेचने निकल पड़े। पूरे दिन दोनों ने मोहल्लों में घूमकर फल बेचा। तौफीक आवाज लगा रहा था तो रहीश ई-रिक्शा चलाने के बाद तौल में भी मदद करता रहा। शाम तक दोनों ने इतनी रकम कमा ली कि अगले दिन का माल खरीदने व घर का खर्च निकल गया। दोनों दोस्तों का कहना है कि वह अब इसी तरह लॉकडाउन तक परिवार का पेट पाल लेंगे।
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