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तीन ए को बनाएं सफलता का सूत्रधार
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फतेहपुर। ग्राम प्रधान के पद पर महिला चुनी गईं, लेकिन मीटिंग से लेकर सारे कामकाज प्रधान के पति या महिला के ससुर, देवर या अन्य प्रतिनिधि पुरुष संभालते हैं, ऐसी व्यवस्था खत्म होनी चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर शहर के रामाश्यामा मैरिज हॉल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जन शक्ति वाहिनी की राष्ट्रीय अध्यक्ष माला सिंह ने यह बात कही। अपराजिता सम्मान अमर उजाला फाउंडेशन, फतेहपुर विकास मंच, वर्ल्ड विजन, चाइल्ड लाइन व सीईसी संस्था के साझा मंच पर पंद्रह समाजसेवी महिलाओं को अपराजिता 2020 अवार्ड से सम्मानित किया गया।
माला सिंह ने कहा कि महिला अधिकारों की स्वीकार्यता को लेकर अभी भी काफी कुछ किया जाना है। उन्होंने कहा कि प्रधान महिला चुनी गईं, लेकिन मीटिंग से लेकर सारे कामकाज प्रधान के पति, ससुर, देवर या अन्य प्रतिनिधि पुरुष संभालते हैं। सवालिया लहजे में कहा कि ‘यह कहां तक उचित है’। उन्होंने कहा कि बेटा, पति और पिता की बजाय हमारा परिचय खुद का होना चाहिए। कहा कि इतनी जागरुकता के बाद भी अभी पुरुष प्रधान समाज की दखलंदाजी है। उन्होंने कहा ट्रिपल ए का सूत्र ही सफलता दिलाता है। यह व्यक्तिगत व संगठन दोनों पहलू में काम करता है। पहला ऐक्सेप्टेंस (स्वीकार्यता), दूसरा एडमायर (यदि कोई कमजोर है तो भी उसके काम की प्रशंसा करना) और तीसरा ऐप्रिसिएट(अच्छे काम की सामूहिक सराहना) करना।
सदर विधायक की पत्नी माला सिंह ने सम्मान के लिए उम्र सीमा को खारिज कर दिया। कहा, उम्र की बजाय जज्बे का सलाम होना चाहिए। उन्होंने बेटियों को साक्षर और सक्षम बनाने की गुजारिश की। इससे पहले ब्राडवे डांस अकादमी के कलाकारों ने गणेश वंदना और ओ मां शेरे वालिए... के जरिए आयोजन में समां बांध दिया। वर्ल्ड विजन के इस मौके पर विशिष्ट अतिथि प्रेमा सिंह, फतेहपुर विकास मंच के अध्यक्ष शोभा सिंह, महासचिव डॉ. देवेंद्र श्रीवास्तव, अदिति रस्तोगी, प्रसून, जयकांत मंच अध्यक्ष विजयीपुर, ऐरायां मंच अध्यक्ष मनोज, मंच प्रवक्ता अनिल, राजेंद्र, वेकेंन्सु, मदनपाल सिंह, परियोजना अधिकारी प्रशांत सिंह, डॉ. माधुरी साहू, माया गुप्ता, संदीप भी मौजूद रहे। मंच का संचालन उड़ान फाउंडेशन की डायरेक्टर मोहिनी साहू व कवि प्रवीण श्रीवास्तव ने किया।
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किसने क्या कहा --------------
महिला शिक्षित तो परिवार शिक्षित
समाज को बढ़ाने में महिलाओं का बढ़ा हाथ होता है। अगर महिला शिक्षित है तो पूरा परिवार शिक्षित होगा। गरीब और भूख की बड़ी वजह लैंगिंग असमानता है। पुरुष और महिला के अधिकारों में असमानता है। महिलाओं के लिए बनीं योजनाओं को आलमारी से बाहर आना चाहिए। - सेमुअल पाल, वर्ल्ड विजन
पीरियड तक की जानकारी नहीं होती
आज भी गांव की महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहती हैं। वह एनीमिक क्यों होती हैं। यह तक पता नही होता। यहां तक कि उन्हें अपने पीरियड की जानकारी नहीं होती है। - डॉ. नीलम, प्रतिनिधि, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें
महिलाओं को अपनी सेहत का ख्याल रखना चाहिए क्योंकि अगर वह स्वस्थ्य होंगी तो परिवार को ठीक से देख सकेंगी। खासकर गांव की महिलाएं आज भी इस मामले में कंजूसी बरत रही हैं। - डॉ. अनुराग श्रीवास्तव, यूथ आईकान
गुड़ खाकर भी बनाई जा सकती है सेहत
जरूरी नहीं कि सामर्थ्य से इतर रकम खर्च की जाए। गरम पानी का सेवन करें। गुड़ खाकर भी सेहत को सही रखा जा सकता है। यकीन मानिए इसे खाने के बाद कभी भी खून की जरूरत नहीं होगी। - स्मिता सिंह, यूथ आईकान, रोटी घर संचालिका
इनसेट-
और फिर काढ़ लिया घूंघट
सम्मानित होने वाली महिलाओं में राम दुलारी नाम की महिला भी शामिल रहीं। उम्रदराज होने के बाद इनमें पशुसेवा का जज्बा कूट कूटकर भरा है। यह न केवल राह चलते पशुओं की देखभाल का जिम्मा संभालती हैं बल्कि परिवार के बनने वाले भोजन के अतिरिक्त 20-22 रोटियां बनवातीं हैं और उन्हें कुत्ता और बिल्ली को खिलाती हैं। जिस वक्त इन्हें बुलाया गया तो यह घूंघट की ओट में मंच पर पहुंची। सम्मान पाने के दौरान कैमरे के फ्लैश चमकते रहे लेकिन राम दुलारी का चेहरा साफ नहीं आ रहा था। इस पर बगल में खड़ी एक महिला ने उनका पल्ला उठाया, जिसे तत्काल फिर से काढ़ लिया। यह वह तस्वीर थी जिससे पता चलता है कि समाज को इस आबादी के लिए अभी और कुछ करने की जरूरत है।
इन्हें मिला पुरस्कार-
- स्मिता सिंह(भूखे पेट को तृप्त करना)
- मालविका सिंह(फल प्रसंस्करण से महिलाओं को जोडना)
- मैनास्त्रत्त् गुप्ता(खेल के मैदान को जीतने का मादा)
- राम दुलारी(पशुसेवा में ज्यादातर वक्त गुजारना)
- मुन्नी देवी(शोहरत से ज्यादा सफाई के काम पर न्यौछावर रहना)
- नमिता सिंह( थानेदार की वर्दी पहनकर महिलाओं को इंसाफ दिलाना)
- गायत्री देवी(सुर और ताल का संगम)
- गुरप्रीत कौर(खून की जरूरत को पूरा करना फर्ज समझना)
- मालती देवी(भट्ठा में काम करने वालीं महिलाओं को हक दिलाना)
- ललिता रस्तोगी(पारिवारिक कलह का दूर कराना अपनी जिम्म्ेदारी मानना)
- शालिनी विश्वकर्मा(महिला किसानों की हमदर्द)
- सीमा वाजपेयी (कविताओं से समाज को आइना दिखाना)
- कविता रस्तोगी(मॉडलिंग के क्षेत्र में जौहर दिखाना)
- उमासरन गुप्ता(समाजसेवा को कर्तव्य समझना)
- मधु साहू(जानकारी मिलते मेडिकल कैंप लगाना)
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माला सिंह ने कहा कि महिला अधिकारों की स्वीकार्यता को लेकर अभी भी काफी कुछ किया जाना है। उन्होंने कहा कि प्रधान महिला चुनी गईं, लेकिन मीटिंग से लेकर सारे कामकाज प्रधान के पति, ससुर, देवर या अन्य प्रतिनिधि पुरुष संभालते हैं। सवालिया लहजे में कहा कि ‘यह कहां तक उचित है’। उन्होंने कहा कि बेटा, पति और पिता की बजाय हमारा परिचय खुद का होना चाहिए। कहा कि इतनी जागरुकता के बाद भी अभी पुरुष प्रधान समाज की दखलंदाजी है। उन्होंने कहा ट्रिपल ए का सूत्र ही सफलता दिलाता है। यह व्यक्तिगत व संगठन दोनों पहलू में काम करता है। पहला ऐक्सेप्टेंस (स्वीकार्यता), दूसरा एडमायर (यदि कोई कमजोर है तो भी उसके काम की प्रशंसा करना) और तीसरा ऐप्रिसिएट(अच्छे काम की सामूहिक सराहना) करना।
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सदर विधायक की पत्नी माला सिंह ने सम्मान के लिए उम्र सीमा को खारिज कर दिया। कहा, उम्र की बजाय जज्बे का सलाम होना चाहिए। उन्होंने बेटियों को साक्षर और सक्षम बनाने की गुजारिश की। इससे पहले ब्राडवे डांस अकादमी के कलाकारों ने गणेश वंदना और ओ मां शेरे वालिए... के जरिए आयोजन में समां बांध दिया। वर्ल्ड विजन के इस मौके पर विशिष्ट अतिथि प्रेमा सिंह, फतेहपुर विकास मंच के अध्यक्ष शोभा सिंह, महासचिव डॉ. देवेंद्र श्रीवास्तव, अदिति रस्तोगी, प्रसून, जयकांत मंच अध्यक्ष विजयीपुर, ऐरायां मंच अध्यक्ष मनोज, मंच प्रवक्ता अनिल, राजेंद्र, वेकेंन्सु, मदनपाल सिंह, परियोजना अधिकारी प्रशांत सिंह, डॉ. माधुरी साहू, माया गुप्ता, संदीप भी मौजूद रहे। मंच का संचालन उड़ान फाउंडेशन की डायरेक्टर मोहिनी साहू व कवि प्रवीण श्रीवास्तव ने किया।
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किसने क्या कहा --------------
महिला शिक्षित तो परिवार शिक्षित
समाज को बढ़ाने में महिलाओं का बढ़ा हाथ होता है। अगर महिला शिक्षित है तो पूरा परिवार शिक्षित होगा। गरीब और भूख की बड़ी वजह लैंगिंग असमानता है। पुरुष और महिला के अधिकारों में असमानता है। महिलाओं के लिए बनीं योजनाओं को आलमारी से बाहर आना चाहिए। - सेमुअल पाल, वर्ल्ड विजन
पीरियड तक की जानकारी नहीं होती
आज भी गांव की महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहती हैं। वह एनीमिक क्यों होती हैं। यह तक पता नही होता। यहां तक कि उन्हें अपने पीरियड की जानकारी नहीं होती है। - डॉ. नीलम, प्रतिनिधि, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें
महिलाओं को अपनी सेहत का ख्याल रखना चाहिए क्योंकि अगर वह स्वस्थ्य होंगी तो परिवार को ठीक से देख सकेंगी। खासकर गांव की महिलाएं आज भी इस मामले में कंजूसी बरत रही हैं। - डॉ. अनुराग श्रीवास्तव, यूथ आईकान
गुड़ खाकर भी बनाई जा सकती है सेहत
जरूरी नहीं कि सामर्थ्य से इतर रकम खर्च की जाए। गरम पानी का सेवन करें। गुड़ खाकर भी सेहत को सही रखा जा सकता है। यकीन मानिए इसे खाने के बाद कभी भी खून की जरूरत नहीं होगी। - स्मिता सिंह, यूथ आईकान, रोटी घर संचालिका
इनसेट-
और फिर काढ़ लिया घूंघट
सम्मानित होने वाली महिलाओं में राम दुलारी नाम की महिला भी शामिल रहीं। उम्रदराज होने के बाद इनमें पशुसेवा का जज्बा कूट कूटकर भरा है। यह न केवल राह चलते पशुओं की देखभाल का जिम्मा संभालती हैं बल्कि परिवार के बनने वाले भोजन के अतिरिक्त 20-22 रोटियां बनवातीं हैं और उन्हें कुत्ता और बिल्ली को खिलाती हैं। जिस वक्त इन्हें बुलाया गया तो यह घूंघट की ओट में मंच पर पहुंची। सम्मान पाने के दौरान कैमरे के फ्लैश चमकते रहे लेकिन राम दुलारी का चेहरा साफ नहीं आ रहा था। इस पर बगल में खड़ी एक महिला ने उनका पल्ला उठाया, जिसे तत्काल फिर से काढ़ लिया। यह वह तस्वीर थी जिससे पता चलता है कि समाज को इस आबादी के लिए अभी और कुछ करने की जरूरत है।
इन्हें मिला पुरस्कार-
- स्मिता सिंह(भूखे पेट को तृप्त करना)
- मालविका सिंह(फल प्रसंस्करण से महिलाओं को जोडना)
- मैनास्त्रत्त् गुप्ता(खेल के मैदान को जीतने का मादा)
- राम दुलारी(पशुसेवा में ज्यादातर वक्त गुजारना)
- मुन्नी देवी(शोहरत से ज्यादा सफाई के काम पर न्यौछावर रहना)
- नमिता सिंह( थानेदार की वर्दी पहनकर महिलाओं को इंसाफ दिलाना)
- गायत्री देवी(सुर और ताल का संगम)
- गुरप्रीत कौर(खून की जरूरत को पूरा करना फर्ज समझना)
- मालती देवी(भट्ठा में काम करने वालीं महिलाओं को हक दिलाना)
- ललिता रस्तोगी(पारिवारिक कलह का दूर कराना अपनी जिम्म्ेदारी मानना)
- शालिनी विश्वकर्मा(महिला किसानों की हमदर्द)
- सीमा वाजपेयी (कविताओं से समाज को आइना दिखाना)
- कविता रस्तोगी(मॉडलिंग के क्षेत्र में जौहर दिखाना)
- उमासरन गुप्ता(समाजसेवा को कर्तव्य समझना)
- मधु साहू(जानकारी मिलते मेडिकल कैंप लगाना)