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Fatehpur News: आम की बेहतर पैदावार के लिए मार्च और अप्रैल में बागों की देखभाल जरूरी
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फतेहपुर। आम की बेहतर पैदावार के लिए फूल आने से लेकर फल बनने तक वैज्ञानिक तरीके से बाग की देखभाल जरूरी है। मार्च और अप्रैल में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि इस समय पेड़ों में बौर और टिकोले बनते हैं। इससे कीट व रोगों का खतरा बढ़ जाता है। हाल की हल्की बारिश और 50-60 प्रतिशत आर्द्रता के कारण इनके प्रकोप की संभावना और बढ़ गई है।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. रमेश पाठक ने बताया कि इस मौसम में पाउडरी मिल्ड्यू (खर्रा/दहिया रोग), भुनगा, थ्रिप्स (रूजी) और गुझिया कीट का प्रकोप अधिक होता है। भुनगा और थ्रिप्स बौर, पत्तियों और फलों के मुलायम हिस्सों का रस चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं। यदि प्रति बौर या पत्ती 10-12 कीट दिखाई दें तो प्रति हेक्टेयर 40-20 की दर से नीले या पीले चिपचिपे ट्रैप लगाना चाहिए।
रासायनिक नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत या थियाक्लोप्रिड 21.7 प्रतिशत दवा 0.5 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। पाउडरी मिल्ड्यू एक फफूंद जनित रोग है, जिसमें बौर, पत्तियों और फलों पर सफेद चूर्ण दिखाई देता है। इसके बचाव के लिए घुलनशील गंधक 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में छिड़काव करना चाहिए। रोग दिखने पर हेक्साकोनाजोल या प्रोपिकोनाजोल 1 मिली प्रति लीटर पानी में देना प्रभावी होता है।
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टिकोले गिरने से बचाने के लिए प्लानोफिक्स (एनएए) एक मिली को 4 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें और बाग में नमी बनाए रखें। कीट अधिक होने पर इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। साथ में एक ग्राम प्रति लीटर की दर से स्टीकर के रूप में निरगा पाउडर या शैंपू मिलाया जा सकता है।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे बागों की नियमित निगरानी करें और समय पर नियंत्रण उपाय अपनाएं। किसी प्रकार की समस्या होने पर जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय या संबंधित विकासखंड के प्रभारियों के मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।
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जिला उद्यान अधिकारी डॉ. रमेश पाठक ने बताया कि इस मौसम में पाउडरी मिल्ड्यू (खर्रा/दहिया रोग), भुनगा, थ्रिप्स (रूजी) और गुझिया कीट का प्रकोप अधिक होता है। भुनगा और थ्रिप्स बौर, पत्तियों और फलों के मुलायम हिस्सों का रस चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं। यदि प्रति बौर या पत्ती 10-12 कीट दिखाई दें तो प्रति हेक्टेयर 40-20 की दर से नीले या पीले चिपचिपे ट्रैप लगाना चाहिए।
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रासायनिक नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत या थियाक्लोप्रिड 21.7 प्रतिशत दवा 0.5 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। पाउडरी मिल्ड्यू एक फफूंद जनित रोग है, जिसमें बौर, पत्तियों और फलों पर सफेद चूर्ण दिखाई देता है। इसके बचाव के लिए घुलनशील गंधक 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में छिड़काव करना चाहिए। रोग दिखने पर हेक्साकोनाजोल या प्रोपिकोनाजोल 1 मिली प्रति लीटर पानी में देना प्रभावी होता है।
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टिकोले गिरने से बचाने के लिए प्लानोफिक्स (एनएए) एक मिली को 4 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें और बाग में नमी बनाए रखें। कीट अधिक होने पर इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मिली प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। साथ में एक ग्राम प्रति लीटर की दर से स्टीकर के रूप में निरगा पाउडर या शैंपू मिलाया जा सकता है।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे बागों की नियमित निगरानी करें और समय पर नियंत्रण उपाय अपनाएं। किसी प्रकार की समस्या होने पर जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय या संबंधित विकासखंड के प्रभारियों के मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।