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नहीं निकलीं तहखाने से मूर्तियां
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर
Updated Sun, 07 Feb 2016 12:44 AM IST
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नरसिंहपुर कबरहा के शिवहरे रामजानकी हनुमान मंदिर में
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मूर्ति स्थापना को लेकर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। मूर्तियां शनिवार को भी
तहखाने से बाहर नहीं निकाली गईं। इसे बड़े से ताले में बंद कर रखा गया है।
कहा जा रहा है कि तीन नई पेटियों में मूर्तियां रखी गई हैं। वहीं पिता की
एक पुरानी मूर्ति पहले से मंदिर परिसर में एक जगह रखी है। वहीं शनिवार को
भी कुछ लोग ऐसे मिले जिनका कहना था कि उन्होंने चार मूर्तियां देखी हैं।
मूर्तियों में दस्यु ददुआ की मूर्ति है या नहीं इसे लेकर संशय दूर नहीं हो
सका है। हालांकि समर्थक ग्रामीण मानते हैं कि ददुआ की भी मूर्ति लाकर रख दी
गई है। इसे उचित समय आने पर ही स्थापित किया जाएगा।
दस्यु शिव कुमार पटेल ददुआ के बनवाए गए शिवहरे रामजानकी हनुमान मंदिर में चल रहे 10 दिवसीय धार्मिक महोत्सव के दौरान आयोजकों ने इन मूर्तियों की स्थापना की बात कह रखी है।
हिंदूवादी संगठन समेत समाज के जागरूक लोगों के चल रहे विरोध तथा पुलिस व प्रशासन की सख्ती के बाद आयोजक मंडल अपने फैसले पर अडिग है।
यही वजह रही कि शनिवार को क्षेत्रीय जनता में मूर्ति स्थापना को लेकर उत्सुकता के साथ संशय देखने को मिला। मंदिर मत्था टेकने पहुंचे लोगों की निगाहें मंदिर के कैंपस में मूर्तियां खोजती नजर आईं।
खासकर लोगों की निगाहें तहखाने पर लगीं। हालांकि उधर किसी को भी जाने की इजाजत नहीं है। सूत्रों की माने तो जयपुर से 40 लाख रुपये की लागत से तैयार होकर कबरहा तक आई इन मूर्तियों की किसी भी वक्त प्राण प्रतिष्ठा हो सकती है।
यह दीगर है कि आयोजक मंडल इस मामले पर आज भी पूरी चुप्पी साधे रहा। खासकर इन मूर्तियों मेें ददुआ की मूर्ति है या नहीं, इससे अभी तक पर्दा नहीं उठ सका है। शनिवार को पुलिस व प्रशासन की संख्या भी मंदिर में रोकटोक या पूछताछ के लिए न के बराबर दिखी।
दस्यु शिव कुमार पटेल ददुआ के बनवाए गए शिवहरे रामजानकी हनुमान मंदिर में चल रहे 10 दिवसीय धार्मिक महोत्सव के दौरान आयोजकों ने इन मूर्तियों की स्थापना की बात कह रखी है।
हिंदूवादी संगठन समेत समाज के जागरूक लोगों के चल रहे विरोध तथा पुलिस व प्रशासन की सख्ती के बाद आयोजक मंडल अपने फैसले पर अडिग है।
यही वजह रही कि शनिवार को क्षेत्रीय जनता में मूर्ति स्थापना को लेकर उत्सुकता के साथ संशय देखने को मिला। मंदिर मत्था टेकने पहुंचे लोगों की निगाहें मंदिर के कैंपस में मूर्तियां खोजती नजर आईं।
खासकर लोगों की निगाहें तहखाने पर लगीं। हालांकि उधर किसी को भी जाने की इजाजत नहीं है। सूत्रों की माने तो जयपुर से 40 लाख रुपये की लागत से तैयार होकर कबरहा तक आई इन मूर्तियों की किसी भी वक्त प्राण प्रतिष्ठा हो सकती है।
यह दीगर है कि आयोजक मंडल इस मामले पर आज भी पूरी चुप्पी साधे रहा। खासकर इन मूर्तियों मेें ददुआ की मूर्ति है या नहीं, इससे अभी तक पर्दा नहीं उठ सका है। शनिवार को पुलिस व प्रशासन की संख्या भी मंदिर में रोकटोक या पूछताछ के लिए न के बराबर दिखी।