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डायलिसिस यूनिट के लिए नहीं मिल रही जगह
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जिले में डायलिसिस यूनिट की स्थापना का रास्ता भूमि की उपलब्धता पर निर्भर है। बेशक, यूनिट की स्थापना को 16 लाख रुपये की पहली किस्त मिल चुकी है लेकिन अभी तक निर्माण को मुफीद जगह का चयन नहीं किया जा सका है। जब तक पर्याप्त जगह नहीं मिल जाती है। तब तक इस यूनिट की स्थापना की बात बेमानी है।
जिले में अभी तक रक्त शोधन कृत्रिम विधि की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जरूरतमंदों को इसके लिए कानपुर, लखनऊ और प्रयागराज भागना पड़ता है। पूर्व सरकार में सदर अस्पताल में दो बेड की डायलिसिस यूनिट खोले जाने की सुगबुगाहट हुई थी लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद इस पर विराम लग गया।
मौजूदा सरकार ने पिछड़ा जिला होने की वजह से फतेहपुर को 10 बेड की डायलिसिस यूनिट बनाने की न केवल मंजूरी दे दी है बल्कि पहली किस्त के रूप में 16 रुपये भी आवंटित कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के सामने दिक्कत यह है कि उसे डायलिसिस यूनिट के लिए 2000 वर्ग मीटर भूमि नहीं मिल पा रही है।
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हालांकि कोरोना संक्रमण का दौर शुरू होने से पहले सदर अस्पताल प्रबंधन ने आयुष विंग के पीछे एंबुलेंस स्टैंड की जगह को यूनिट के लिए तलाशा था लेकिन यह अपर्याप्त निकली। जिससे मामला आगे नहंी बढ़ सका। सीएमएस डॉ. प्रभाकर का कहना है कि डायलिसिस यूनिट के लिए परिसर में ही एक और जगह तलाशी गई है।
शासन को प्रपोजल भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने पर चिह्नित कार्यदाई संस्था से काम शुरू करवा दिया जाएगा।
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जिले में अभी तक रक्त शोधन कृत्रिम विधि की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जरूरतमंदों को इसके लिए कानपुर, लखनऊ और प्रयागराज भागना पड़ता है। पूर्व सरकार में सदर अस्पताल में दो बेड की डायलिसिस यूनिट खोले जाने की सुगबुगाहट हुई थी लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद इस पर विराम लग गया।
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मौजूदा सरकार ने पिछड़ा जिला होने की वजह से फतेहपुर को 10 बेड की डायलिसिस यूनिट बनाने की न केवल मंजूरी दे दी है बल्कि पहली किस्त के रूप में 16 रुपये भी आवंटित कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के सामने दिक्कत यह है कि उसे डायलिसिस यूनिट के लिए 2000 वर्ग मीटर भूमि नहीं मिल पा रही है।
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हालांकि कोरोना संक्रमण का दौर शुरू होने से पहले सदर अस्पताल प्रबंधन ने आयुष विंग के पीछे एंबुलेंस स्टैंड की जगह को यूनिट के लिए तलाशा था लेकिन यह अपर्याप्त निकली। जिससे मामला आगे नहंी बढ़ सका। सीएमएस डॉ. प्रभाकर का कहना है कि डायलिसिस यूनिट के लिए परिसर में ही एक और जगह तलाशी गई है।
शासन को प्रपोजल भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने पर चिह्नित कार्यदाई संस्था से काम शुरू करवा दिया जाएगा।