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बच्चों का पेट भरने तक सीमित है मध्याह्न भोजन योजना

Sat, 16 May 2015 12:08 AM IST
अमर उजाला फतेहपुर
अमर उजाला फतेहपुर Updated Sat, 16 May 2015 12:08 AM IST
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MDM is limited to fulfil hungry thrust, children are not given quality food

मध्याह्न भोजन योजना के तहत विभागीय लापरवाही सरकार की मंशा में पानी फेरने का काम कर रही है। योजना के तहत पौष्टिक भोजन देने के साथ ही बच्चों की सेहत की देखभाल के लिए प्रावधान व संसाधन होने के बाद भी केवल पेट भरने के लिए बच्चों को खाना परोसा जाता है।

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धरातल पर सच्चाई यह है कि किसी भी स्कूल में प्राधिकरण के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। ऐसी हालत में बच्चों को पौष्टिक भोजन हासिल करने का हक नहीं मिल पा रहा है।
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वर्तमान में जिले में 2772 परिषदीय, राजकीय और वित्तपोषित स्कूलों में कक्षा एक से लेकर कक्षा आठ तक पढ़ने वाले बच्चों को एमडीएम योजना के तहत दोपहर का भोजन दिया जाता है। योजना से दो लाख पैंसठ हजार बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं।
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रोजाना बदल-बदलकर मेन्यू के तहत पौष्टिक भोजन परोसने का प्रावधान है। भोजन तैयार करने के लिए कक्षा एक से आठ तक के प्रति बच्चे को 100 ग्राम तथा कक्षा 6 से 8 तक बच्चे को 150 ग्राम अनाज का आवंटन किया जाता है। इसके साथ ही प्राथमिक के प्रति बच्चे के हिसाब से प्रतिदिन भोजन की लागत 3.59 पैसे तथा उच्च प्राथमिक कक्षा के प्रति बच्चे को प्रतिदिन के हिसाब से 5.38 पैसे लागत राशि का भुगतान किया जाता है।

स्कूलों में वेइंग मशीनें खा रहीं धूल
प्राधिकरण ने यह व्यवस्था लागू करने के साथ हर महीने स्कूलों में बच्चों का वजन मापने के लिए वेइंग मशीनें उपलब्ध कराई। जिससे हर महीने प्रत्येक बच्चे का वजन मापने के साथ लंबाई आदि अंकित करने के लिए रजिस्टर तैयार करने की व्यवस्था लागू की गई थी। योजना लागू होने के बाद से किसी भी स्कूल में बच्चों के स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी के लिए रिकार्ड तैयार नहीं किया गया।

11 साल में एक बार भी नहीं जांची सेहत
प्राधिकरण ने यह भी निर्देश दिये थे कि अगर बच्चे का एमडीएम खाने के बाद वजन नहीं बढ़ रहा है, तो उसका स्वास्थ्य परीक्षण जिला अस्पताल में कराया जाए। इसके बावजूद 11 साल में किसी भी स्कूल ने एक भी बच्चे का जिला अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराया है। बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए चालू की यह योजना सिर्फ रूखा सूखा खिलाकर बच्चों का पेट भरने का साधन मात्र साबित हुई है।


कोट
मेन्यू के तहत मानक के अनुरूप एमडीएम तैयार न कराने वाले स्कूलों के खिलाफ विभाग कड़ी कार्रवाई करेगा। बच्चों के पेट के साथ कटौती किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन स्कूलों में एमडीएम में लापरवाही बरती जा रही है, उन्हें रिकार्ड में लाया जाएगा। - रविशंकर, बेसिक शिक्षा अधिकारी।

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