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माटी लेकर हाथ में...बोल पड़े दरियाव
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माल्यार्पण के बाद दरियाव सिंह की प्रतिमा को नमन करतीं खागा चेयरमैन गीता सिंह। संवाद
- फोटो : FATEHPUR
खागा। माटी लेकर हाथ में...बोल पड़े दरियाव, फिर ले जन्म पूरा करूं, शेष रहे जो भाव। जब यह लाइनें हरिबाबू सिंह राउत ने अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह स्मारक स्थल पर पढ़ी।
तो अमर शहीद क्रांतिकारी ठाकुर दरियाव सिंह व उनके साथियों के 165वें बलिदान दिवस पर आजादी के दीवानों ने संकल्प को याद कर उन्हें नमन कर श्रद्धांजलि दी।
अमर शहीद ठाकुर दरियाव स्मारक स्थल पर बलिदान दिवस मनाया गया। चेयरमैन गीता सिंह ने ठाकुर दरियाव सिंह की प्रतिमा पर माला पहनाई।
वरिष्ठ साहित्यकार बृजमोहन पांडेय ने भी अन्य क्रांतिकारियों की प्रतिमाओं पर मालाएं पहनाकर उनके बलिदान को नमन किया। इसके बाद कवि सम्मेलन हुआ।
कवि कुमार सौष्ठव त्रिपाठी ने पढ़ा - भारत मेरा नाम है, भारत मेरा नाम, एक हाथ गुजरात का हूं तो दूजा हाथ आसाम है। सुरेश फक्कड़ ने पढ़ा, मरते दम आंखों का बांकपन देखिए, मेरा फौलाद जैसा बदन देखिए।
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नीरज पांडेय रायबरेली ने पढ़ा, सन 1857 की क्रांति कथा नरपुंगव को, शत बार नमन हम सबका है खागा धरती के गौरव को। इसके बाद 19 नवंबर को स्मारक स्थल पर 1.71 लाख दीप जलाकर मनाए गए दीपोत्सव में सहयोग करने वाले स्कूल, कॉलेजों के प्रतिनिधियों को बुलाकर उन्हें सम्मानित किया गया।
इस मौके पर महेंद्र सिंह, रामप्रताप सिंह, अशोक कुमार सिंह, रामगोपाल सिंह, महेंद्र सिंह, कृष्ण स्वरूप सिंह, गुलाब सिंह, भालचंद्र यादव, ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, पंकज पाल मौजूद रहे।
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तो अमर शहीद क्रांतिकारी ठाकुर दरियाव सिंह व उनके साथियों के 165वें बलिदान दिवस पर आजादी के दीवानों ने संकल्प को याद कर उन्हें नमन कर श्रद्धांजलि दी।
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अमर शहीद ठाकुर दरियाव स्मारक स्थल पर बलिदान दिवस मनाया गया। चेयरमैन गीता सिंह ने ठाकुर दरियाव सिंह की प्रतिमा पर माला पहनाई।
वरिष्ठ साहित्यकार बृजमोहन पांडेय ने भी अन्य क्रांतिकारियों की प्रतिमाओं पर मालाएं पहनाकर उनके बलिदान को नमन किया। इसके बाद कवि सम्मेलन हुआ।
कवि कुमार सौष्ठव त्रिपाठी ने पढ़ा - भारत मेरा नाम है, भारत मेरा नाम, एक हाथ गुजरात का हूं तो दूजा हाथ आसाम है। सुरेश फक्कड़ ने पढ़ा, मरते दम आंखों का बांकपन देखिए, मेरा फौलाद जैसा बदन देखिए।
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नीरज पांडेय रायबरेली ने पढ़ा, सन 1857 की क्रांति कथा नरपुंगव को, शत बार नमन हम सबका है खागा धरती के गौरव को। इसके बाद 19 नवंबर को स्मारक स्थल पर 1.71 लाख दीप जलाकर मनाए गए दीपोत्सव में सहयोग करने वाले स्कूल, कॉलेजों के प्रतिनिधियों को बुलाकर उन्हें सम्मानित किया गया।
इस मौके पर महेंद्र सिंह, रामप्रताप सिंह, अशोक कुमार सिंह, रामगोपाल सिंह, महेंद्र सिंह, कृष्ण स्वरूप सिंह, गुलाब सिंह, भालचंद्र यादव, ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह, पंकज पाल मौजूद रहे।