{"_id":"6142461c8ebc3eb96760871d","slug":"fatehpur-news-fatehpur-news-knp6524260184","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्कूली बच्चों में इकलौते भाई का ‘चेहरा’ देखने पहुंची सीमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्कूली बच्चों में इकलौते भाई का ‘चेहरा’ देखने पहुंची सीमा
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फतेहपुर। इकलौते भाई शिवम की मौत को तीन साल हो गए, लेकिन सीमा के लिए वह आज भी जिंदा है। सीमा ने उसे अपने जज्बातों, अरमानों व सपनों में जिंदा रखा है। सीमा हर बार की तरह इस बार भी भाई की पुण्यतिथि पर भारी बरसात के बावजूद ऐरायां के प्राइमरी स्कूल मलूकपुर पहुंच गई। वहां बच्चों को एक व्यक्ति एक कॉपी मिशन से जुटाई गई करीब छह सौ कॉपियां व टी-शर्ट बांटे।
खागा की रहने वाली सीमा बाजपेई शहर के आरवीएस इंटरनेशनल स्कूल में शिक्षिका हैं। दिवंगत भाई शिवम की बुधवार को पुण्यतिथि थी। सीमा हर पुण्यतिथि प्राइमरी स्कूल के बच्चों के साथ मनाती हैं। इस बार बारिश के बीच स्कूल पहुंचकर उन्होंने सभी बच्चों को कॉपियां व टी-शर्ट और पेन, पेंसिल व इरेजर दिया।
नियति की मार से भी नहीं टूटी सीमा
सीमा उन चंद लोगों में से हैं, जिन पर नियति ने अपना कहर बरपाया है। शादी के कुछ समय बाद ही करीब 19 वर्ष की उम्र में ही माता व पिता एक ही दिन चल बसे। दोनों की चिताओं पर एक साथ आग लगी। सीमा ने अपने भाई को बड़े संघर्षों से पाला पोसा, लेकिन तीन साल पहले भाई ने भी साथ छोड़ दिया।
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अब सामाजिक कार्यों में भागीदारी
सीमा कहती हैं कि वह भले ही प्राइवेट शिक्षिका हैं, लेकिन अपनी कमाई का कुछ हिस्सा जरूरतमंदों को देना चाहती हैं। तर्क देती हैं कि मेरे जैसे न जाने कितने समाज में हैं। उन्हें मदद की जरूरत है। समय पर की गई मदद जीवन संवार देती है।
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खागा की रहने वाली सीमा बाजपेई शहर के आरवीएस इंटरनेशनल स्कूल में शिक्षिका हैं। दिवंगत भाई शिवम की बुधवार को पुण्यतिथि थी। सीमा हर पुण्यतिथि प्राइमरी स्कूल के बच्चों के साथ मनाती हैं। इस बार बारिश के बीच स्कूल पहुंचकर उन्होंने सभी बच्चों को कॉपियां व टी-शर्ट और पेन, पेंसिल व इरेजर दिया।
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नियति की मार से भी नहीं टूटी सीमा
सीमा उन चंद लोगों में से हैं, जिन पर नियति ने अपना कहर बरपाया है। शादी के कुछ समय बाद ही करीब 19 वर्ष की उम्र में ही माता व पिता एक ही दिन चल बसे। दोनों की चिताओं पर एक साथ आग लगी। सीमा ने अपने भाई को बड़े संघर्षों से पाला पोसा, लेकिन तीन साल पहले भाई ने भी साथ छोड़ दिया।
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अब सामाजिक कार्यों में भागीदारी
सीमा कहती हैं कि वह भले ही प्राइवेट शिक्षिका हैं, लेकिन अपनी कमाई का कुछ हिस्सा जरूरतमंदों को देना चाहती हैं। तर्क देती हैं कि मेरे जैसे न जाने कितने समाज में हैं। उन्हें मदद की जरूरत है। समय पर की गई मदद जीवन संवार देती है।