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जिला अस्पताल को नहीं मिलीं टेमीफ्लू टैबलेट, स्वाइन फ्लू से लड़ना चुनौती बना

Mon, 23 Feb 2015 12:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहपुर Updated Mon, 23 Feb 2015 12:16 AM IST
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district hospital running out of life saving drug, pose challenge to fight epidemic

बीते दिन युवक की मौत मामले में स्वाइन फ्लू का अंदेशा जताए जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग में जानलेवा रोग से लड़ने के इंतजाम नाकाफी हैं। प्राथमिक स्तर पर खतरा टालने के नाम पर फर्स्ट एड के रूप में दी जाने वाली टेमी फ्लू टैबलेट की आपूर्ति नहीं हो सकी है। जांच के नाम पर अकेले सदर अस्पताल में ही केवल सैंपल लिए जाने की सुविधा है।

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29 लाख की आबादी वाला यह जिला सरकारी स्तर पर बचाव के प्रबंध में पिछली पायदान पर नजर आ रहा है। स्वाइन फ्लू ने देश के अलावा पड़ोसी जिलों मेें दस्तक दे दी है।
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हरेक दिन मीडिया से स्वाइन फ्लू के रोगियों के सामने आने और सरकारी स्तर पर इस खतरनाक बीमारी से जनता को बचाने के लिए बयान जारी हो रहे हैं।

इसके बावजूद जिले में बचाव के उपाय नदारद हैं। हकीकत पर गौर फरमाए तो स्वास्थ्य विभाग के पास इस बीमारी से लड़ने को हथियार तक नहीं है।

हकीकत वही पुरानी सिर्फ पांच स्वाइन फ्लू के संक्रमण से जकड़ने वाले रोगियों के लिए टेमी फ्लू टेबलेट की उपलब्धता पर टिकी हुई है। स्वास्थ्य विभाग हरेक दिन शाम तक या फिर सुबह तक सरकार से मांगी गई आपूर्ति आने की बात कह रहा है।
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रहा सवाल इस बीमारी की दहशत का तो सरकारी अस्पताल व नर्सिंगहोम पहुंचने वाला मामूली बीमारी से घिरा हर तीसरा-चौथा शख्स स्वाइन फ्लू का अंदेशा लेकर डॉक्टर रूम में प्रवेश कर रहा है। सरकारी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की स्पेशल जांच और फर्स्ट एड दी जाने वाली टेमी फ्लू टैबलेट का प्रबंध न होने की जानकारी मिलने पर मरीज और उनके तीमारदार सरकारी स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं को कोसते नजर आ रहे हैं।  

इंसेट
अस्पताल की पैथालाजी में भी संसाधन नहीं
फतेहपुर। सदर अस्पताल के पैथालाजी विभाग में होने वाली जांचों में खानापूरी ज्यादा हो रही है। यदि सीबीसी (कंपलीट ब्लड काउंट) को ले तो इसमें टीएलसी, डीएलसी, प्लेटलेट्स, एचबी व ईसीआर शामिल है। सीबीसी की एक जांच मेें करीब आधा घंटा से चालीस मिनट का समय लगता है। पैथालाजी में रोजाना आधा सैकड़ा से ज्यादा नई जांचें हो रही हैं। इस प्रकार से हरेक दिन दो से ढाई सौ के आसपास जांचें हो रही हैं। देखा जाए तो पांच घंटे के अंदर परीक्षण प्र्रक्रिया पूरी करके रिजल्ट देने की बाध्यता और स्टाफ की कमी भी पैथालाजी की जांच में आंच पैदा कर रही है।

इंसेट
महंगी जांच पर कौन लगाएगा लगाम
फतेहपुर। भले ही दिल्ली जैसे महानगरों मेें स्वाइन फ्लू की जांच को लेकर रेट फिक्स कर दिए हो किंतु इस जिले में रेट फिक्स की बात बेमानी नजर आ रही है। यहां पर चेहरे के उड़े हाव-भाव देख कर स्वाइन फ्लू की जांच करके मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। एसीएमओ डॉ. आरएल सचान कहते हैं कि स्वाइन फ्लू के नाम पर मनमानी करना ठीक नहीं है। जांच में मामला सही पाए जाने पर कार्रवाई होगी।


कोट
‘ टेमीफ्लू टैबलेट का आर्डर दिया जा चुका है। लगातार संपर्क भी किया जा रहा है। स्वाइन फ्लू की जांच के नाम पर केवल सैंपल लेने की सुविधा है। जांच के बाद सैंपल को लखनऊ स्थित किंग्स जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की वायरोलाजी लैब भेजा जाता है’। - डॉ. विनय कुमार, सीएमओ

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