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किसान समस्याओं पर हुई चर्चा
fatehpur
Updated Thu, 07 Jun 2018 12:12 AM IST
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फतेहपुर। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने प्रज्ञा ग्रामोत्थान सेवा समिति के सहयोग से बुधवार को सिविल लाइंस के एक गेस्ट हाउस में प्रगतिशील किसानों की कार्यशाला आयोजित हुई। नाबार्ड प्रबंधक पंकज त्रिपाठी ने किसानों की समस्याओं के निस्तारण का आश्वासन दिया।
नाबार्ड प्रबंधक ने कहा कि जिले में केला, पपीता, आम, अमरूद के साथ कई तरह की सब्जियों का उत्पादन होता है। ऐसे उत्पाद भंडारण और परिवहन व्यवस्था न होने से किसानों को फायदा नहीं दे पाते। बड़ी तादाद में सब्जियां खराब हो जाती हैं। किसान संगठित होकर बिचौलियों से मुक्ति और उत्पाद का अच्छा मूल्य पा सकते हैं। नाबार्ड पशुपालन के लिए सात लाख रुपये ऋण देता है। इससे 10 पशुओं का पालन किया जा सकता है। सामान्य जाति के किसानों को 25 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति के लिए 33 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. नौशाद आलम ने कहा कि धान और गेहूं की खेती बार-बार करने से पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। मिट्टी की उर्वरा का परीक्षण कराने के बाद तत्व देकर अच्छा उत्पादन पाया जा सकता है। प्रज्ञा ग्रामोत्थान सेवा समिति के सचिव उमेश चंद्र शुक्ला कहा कि किसानों की फसल, सब्जी और फलों के मूल्य संवर्धन की आवश्यकता है। कार्यशाला में खेत किसान उत्पादक संगठन अमौली, उत्कर्ष कृषक उत्पादक संगठन मलवां, किसान क्लबों के प्रगतिशील
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नाबार्ड प्रबंधक ने कहा कि जिले में केला, पपीता, आम, अमरूद के साथ कई तरह की सब्जियों का उत्पादन होता है। ऐसे उत्पाद भंडारण और परिवहन व्यवस्था न होने से किसानों को फायदा नहीं दे पाते। बड़ी तादाद में सब्जियां खराब हो जाती हैं। किसान संगठित होकर बिचौलियों से मुक्ति और उत्पाद का अच्छा मूल्य पा सकते हैं। नाबार्ड पशुपालन के लिए सात लाख रुपये ऋण देता है। इससे 10 पशुओं का पालन किया जा सकता है। सामान्य जाति के किसानों को 25 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति के लिए 33 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. नौशाद आलम ने कहा कि धान और गेहूं की खेती बार-बार करने से पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। मिट्टी की उर्वरा का परीक्षण कराने के बाद तत्व देकर अच्छा उत्पादन पाया जा सकता है। प्रज्ञा ग्रामोत्थान सेवा समिति के सचिव उमेश चंद्र शुक्ला कहा कि किसानों की फसल, सब्जी और फलों के मूल्य संवर्धन की आवश्यकता है। कार्यशाला में खेत किसान उत्पादक संगठन अमौली, उत्कर्ष कृषक उत्पादक संगठन मलवां, किसान क्लबों के प्रगतिशील
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