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असत्य पर हुई सत्य की जीत
ब्यूरो, अमर उजाला फतेहपुर
Updated Fri, 23 Oct 2015 12:36 AM IST
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जिले में असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक, विजयदशमी
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का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया। परंपरागत तरीके से मनाए गए दशहरा पर्व पर
हिंदू, मुसलिम, सिख, इसाई के आपसी भाईचारा की मिसाल देखते ही बनी। सभी
जाति धर्म के लोगों ने एक दूसरे से गले मिलकर विजय दशमी की शुभकामनाएं दी।
उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह मेला लगा और रावण का पुतला दहन कर
भगवान राम की शोभायात्रा निकाली गईं।
जिलेभर में विजयदशमी पर्व की धूम रही। गांव-गांव में रावण का पुतले तैयार करके जलाए गए। कहीं पुआल के पुतले दहन हुए, तो कहीं आतिशबाजी के साथ रावण जलाए गए।
शहर के गंगानगर, तुराब्ली का पुरवा, शांतिनगर, जयरामनगर में रावण के पुतले दहन किए गए। इसके बाद एक दूसरे से गले मिलकर विजयदशमी पर्व की बधाई देने का सिलसिला शुरू हुआ।
सभी जाति धर्म के लोगों ने हिंदू भाइयों के घर जाकर विजय दशमी की शुभकामनाएं दीं। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में मेले के आयोजन हुए। नरैनी के प्राचीन मेले में रावण वध के बाद भव्य झांकियां निकाली गईं, जिन्हें देखने के लिए आसपास गांवों से बड़ी तादाद में दर्शक एकत्र हुए।
इसके बाद नौटंकी का मंचन किया गया। हुसैनगंज में शोभा यात्रा के साथ रावण वध का आयोजन किया गया। इसीी प्रकार असोथर में रावण वध के साथ शोभायात्रा निकाली गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी विजय दशमी पर्व पान खाने खिलाने का त्योहार माना जाता है। गुरुवार की शाम चार बजे से लोग एक दूसरे के घरों में जाकर पान खाने और खिलाने की परंपरा का निर्वहन करने में लगे रहे। पान खाने खिलाने के बाद एक दूसरे से गले मिलकर विजय दशमी पर्व की शुभकामनाएं दी गई। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा।
जिलेभर में विजयदशमी पर्व की धूम रही। गांव-गांव में रावण का पुतले तैयार करके जलाए गए। कहीं पुआल के पुतले दहन हुए, तो कहीं आतिशबाजी के साथ रावण जलाए गए।
शहर के गंगानगर, तुराब्ली का पुरवा, शांतिनगर, जयरामनगर में रावण के पुतले दहन किए गए। इसके बाद एक दूसरे से गले मिलकर विजयदशमी पर्व की बधाई देने का सिलसिला शुरू हुआ।
सभी जाति धर्म के लोगों ने हिंदू भाइयों के घर जाकर विजय दशमी की शुभकामनाएं दीं। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में मेले के आयोजन हुए। नरैनी के प्राचीन मेले में रावण वध के बाद भव्य झांकियां निकाली गईं, जिन्हें देखने के लिए आसपास गांवों से बड़ी तादाद में दर्शक एकत्र हुए।
इसके बाद नौटंकी का मंचन किया गया। हुसैनगंज में शोभा यात्रा के साथ रावण वध का आयोजन किया गया। इसीी प्रकार असोथर में रावण वध के साथ शोभायात्रा निकाली गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी विजय दशमी पर्व पान खाने खिलाने का त्योहार माना जाता है। गुरुवार की शाम चार बजे से लोग एक दूसरे के घरों में जाकर पान खाने और खिलाने की परंपरा का निर्वहन करने में लगे रहे। पान खाने खिलाने के बाद एक दूसरे से गले मिलकर विजय दशमी पर्व की शुभकामनाएं दी गई। यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा।