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लत तरीके से आवास पाने वालों से वसूली के आदेश
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फतेहपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना में लाभार्थियों के नाम से मिलते जुलते लोगों को आवास मिल जाने के मामले में सीडीओ ने रिकवरी के आदेश दिए हैं। घालमेल के इस प्रकरण को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। जांच कमेटी गठित करके मामले की जांच कराने के बाद यह आदेश हुआ है।
अमर उजाला ने अपने 14 जनवरी के अंक में प्रधानमंत्री आवास योजना में कर रहे खेल शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर के जरिए उजागर किया गया था कि असोथर विकास खंड के जिवकरा ग्राम पंचायत में सुमित्रा पत्नी रामखेलावन के नाम आया आवास सुमित्रा पत्नी मेवालाल को दिया गया। इसी क्रम में रतनतारा में राजकुमारी पत्नी धर्मराज के आवास को शारदा पत्नी धर्मराज को दे दिया गया। सितलू पुत्र सुखदेव के आवास को बदलू पुत्र सुखदेव को दे दिया गया। निशक्त पार्वती पत्नी प्रेमबाबू को प्रथम किस्त के रूप में महज चालीस हजार रुपये ही प्राप्त हुए। इसके बाद उन्हें एक भी पाई नहीं मिली। खबर छपने के अगले दिन ही सीडीओ ने इस मामले की जांच के लिए डीआरडीए के परियोजना निदेशक अशोक कुमार निगम और जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी रामसनेही को जिम्मेदारी दी। जांच के बाद अब इस मामले में बीडीओ असोथर ने गलत तरीके से आवास पाने वाले सुमित्रा, शारदा और बदलू से सरकारी धनराशि की वसूली के लिए आरसी जारी की है।
अधिकारियों को बचाने में लगा महकमा
इस पूरे मामले में कार्रवाई के नाम पर आरसी तो जारी कर दी गई है लेकिन अभी तक जिन लोगों ने सही लाभार्थियों के नाम से मिलते जुलते लोगों को आवास दे दिए, उन्हें लगातार बचाने की कोशिश हो रही है। प्रकरण को उजागर हुए लगभग एक महीने हो गया है और अभी तक इस खेल का मुख्य खिलाड़ी ही तय नहीं हो पाया है। किसी को भी आवास उपलब्ध कराने में ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और खंड विकास अधिकारी का मेल जरूरी होता है। हालांकि इस संबंध में सीडीओ चांदनी सिंह का कहना है कि अभी तक जांच रिपोर्ट उनके समक्ष नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित आरोपी के विरुद्ध भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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गलत तरीके से आवास पाने वालों से वसूली के आदेश
- बीडीओ असोथर ने वसूली के लिए जारी की आरसी
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अमर उजाला ने अपने 14 जनवरी के अंक में प्रधानमंत्री आवास योजना में कर रहे खेल शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर के जरिए उजागर किया गया था कि असोथर विकास खंड के जिवकरा ग्राम पंचायत में सुमित्रा पत्नी रामखेलावन के नाम आया आवास सुमित्रा पत्नी मेवालाल को दिया गया। इसी क्रम में रतनतारा में राजकुमारी पत्नी धर्मराज के आवास को शारदा पत्नी धर्मराज को दे दिया गया। सितलू पुत्र सुखदेव के आवास को बदलू पुत्र सुखदेव को दे दिया गया। निशक्त पार्वती पत्नी प्रेमबाबू को प्रथम किस्त के रूप में महज चालीस हजार रुपये ही प्राप्त हुए। इसके बाद उन्हें एक भी पाई नहीं मिली। खबर छपने के अगले दिन ही सीडीओ ने इस मामले की जांच के लिए डीआरडीए के परियोजना निदेशक अशोक कुमार निगम और जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी रामसनेही को जिम्मेदारी दी। जांच के बाद अब इस मामले में बीडीओ असोथर ने गलत तरीके से आवास पाने वाले सुमित्रा, शारदा और बदलू से सरकारी धनराशि की वसूली के लिए आरसी जारी की है।
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अधिकारियों को बचाने में लगा महकमा
इस पूरे मामले में कार्रवाई के नाम पर आरसी तो जारी कर दी गई है लेकिन अभी तक जिन लोगों ने सही लाभार्थियों के नाम से मिलते जुलते लोगों को आवास दे दिए, उन्हें लगातार बचाने की कोशिश हो रही है। प्रकरण को उजागर हुए लगभग एक महीने हो गया है और अभी तक इस खेल का मुख्य खिलाड़ी ही तय नहीं हो पाया है। किसी को भी आवास उपलब्ध कराने में ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और खंड विकास अधिकारी का मेल जरूरी होता है। हालांकि इस संबंध में सीडीओ चांदनी सिंह का कहना है कि अभी तक जांच रिपोर्ट उनके समक्ष नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित आरोपी के विरुद्ध भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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गलत तरीके से आवास पाने वालों से वसूली के आदेश
- बीडीओ असोथर ने वसूली के लिए जारी की आरसी
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