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छह माह से चल रहा था अतिक्रमण अभियान
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फतेहपुर। अतिक्रमण अभियान की शुरुआत जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने जून महीने में शहर क्षेत्र से शुरू कराया था। उन्होंने शहर के ड्रेनेज सिस्टम को सुव्यवस्थित कराने की मंशा जाहिर की थी। अभियान की शुरुआत शहर से होकर जिले की तीनों तहसीलों और तेरह ब्लाकों में पहुंच गया। अभियान के तहत बड़े पैमाने पर मंदिर, मस्जिद, मकान और दुकानें ढहाई जा चुकी हैं।
खास बात यह है कि शुरुआत में व्यापारियों ने ही जिलाधिकारी को सम्मानित कर अभियान की सराहना की थी। जन सहयोग देखकर अभियान को धीरे-धीरे गति दी गई। अभियान जब चौक बाजार पहुंचा तो वहां के व्यापारियों ने इसका विरोध कर दिया। प्रशासन ने यहां बारह मीटर के मानक पर अतिक्रमण गिराने का हुक्म दिया था। तकरीबन
एक माह तक व्यापारियों और प्रशासन के बीच बातचीत का सिलसिला चलता रहा। इस बीच चौक बाजार कई दिनों तक बंद रखा गया। आखिर में साढ़े सात मीटर चौड़ी सड़क और एक-एक मीटर की नाली मिलाकर साढ़े नौ मीटर मानक पर अतिक्रमण ढहाने पर व्यापारियों व प्रशासन में रजामंदी हुई थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि चौक में जब तक व्यापारी खुद से अपना अतिक्रमण नहीं हटा लेते हैं, तब तक वहां जेसीबी प्रवेश नहीं करेगी। चौक व्यापारियों का अभियान में असहयोग देखकर प्रशासन की ओर से शीघ्र ही अपना अतिक्रमण खुद ही तोड़ लेने का अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन इसका कोई असर होते नहीं दिख रहा था।
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छह माह से चल रहा था अभियान
बड़े पैमाने पर तोड़े जा चुके अतिक्रमण, हजारों बीघे सरकारी जमीन खाली कराई गई
अमर उजाला ब्यूरो
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खास बात यह है कि शुरुआत में व्यापारियों ने ही जिलाधिकारी को सम्मानित कर अभियान की सराहना की थी। जन सहयोग देखकर अभियान को धीरे-धीरे गति दी गई। अभियान जब चौक बाजार पहुंचा तो वहां के व्यापारियों ने इसका विरोध कर दिया। प्रशासन ने यहां बारह मीटर के मानक पर अतिक्रमण गिराने का हुक्म दिया था। तकरीबन
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एक माह तक व्यापारियों और प्रशासन के बीच बातचीत का सिलसिला चलता रहा। इस बीच चौक बाजार कई दिनों तक बंद रखा गया। आखिर में साढ़े सात मीटर चौड़ी सड़क और एक-एक मीटर की नाली मिलाकर साढ़े नौ मीटर मानक पर अतिक्रमण ढहाने पर व्यापारियों व प्रशासन में रजामंदी हुई थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि चौक में जब तक व्यापारी खुद से अपना अतिक्रमण नहीं हटा लेते हैं, तब तक वहां जेसीबी प्रवेश नहीं करेगी। चौक व्यापारियों का अभियान में असहयोग देखकर प्रशासन की ओर से शीघ्र ही अपना अतिक्रमण खुद ही तोड़ लेने का अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन इसका कोई असर होते नहीं दिख रहा था।
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छह माह से चल रहा था अभियान
बड़े पैमाने पर तोड़े जा चुके अतिक्रमण, हजारों बीघे सरकारी जमीन खाली कराई गई
अमर उजाला ब्यूरो