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Fatehpur News: कुमकुम के फूलों से तैयार होगी सौंदर्य प्रसाधन सामग्री
Sat, 28 Oct 2023 12:48 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
Updated Sat, 28 Oct 2023 12:48 AM IST
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खास खबर
फोटो-18-कुमकुम का पौधा दिखाते प्रगतिशील किसान अशोक तपस्वी। संवाद
फोटो-19-कुमकुम से तैयार कलर कपड़े, मेकअप सामग्री। संवाद
फोटो-20-कुमकुम का पका फल। संवाद
अब शहर में बनेगी रेडिएशन विहीन मेकअप सामग्री
-प्रगतिशील किसान ने तैयार की कुमकुम की बागवानी, अन्य किसानों को भी मिलेगा रोजगार
सुघर सिंह
फतेहपुर। शहर के तपस्वीनगर में कुमकुम की बागवानी तैयार हो रही है। भीनी सुगंध वाले कुमकुम से सिंदूर, फेस पाउडर, लिपिस्टिक के साथ कपड़े रंगे जा सकेंगे। प्रगतिशील किसान अशोक तपस्वी ने 12 साल के अथक प्रयास से कुमकुम के सात पेड़ तैयार किए हैं और अब 36 पेड़ों का बाग तैयार करने में जुटे हैं। इनमें भी इस बार फूल आ रहे हैं। अब कुमकुम की बागवानी से किसानों को रोजगार देने की योजना है।
पुणे के व्यवसाई अशोक तपस्वी का शहर सीमा के अंदर ही मंडी समिति के सामने फार्म हाउस है। इसी में कुमकुम की बागवानी तैयार हो रही है। किसान ने तैयार सात पेड़ों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए कपड़ा रंगा है और फेस पाउडर, लिपिस्टिक, सिंदूर तैयार किया है। कुमकुम के 10 फलों से चार मीटर काटन का कपड़ा रंगा है।
किसान का कहना है कि पेड़ के फलों के अंदर से निकलने वाले बीजों से रेडिएशन विहीन सिंदूर तैयार होता है। इससे बनी सभी सामाग्री रेडियेशन से पूरी तरह सुरक्षित है। हर साल फल जनवरी में पकना शुरू होता है। गर्मी के पहले फल पक कर फट जाते हैं। यह फल तोड़कर बीज पीसने से सुगंधित सिंदूर तैयार होता है।
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प्रगतिशील किसान ने बताया कि जल्द ही कुमकुम की नर्सरी में एक लाख पौधे तैयार किए जाएंगे। यह पौधे किसान अपने खेतों में रोपित करें। इससे पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही वह किसानों को प्रति पेड़ 500 रुपये सालाना भुगतान करेंगे और बदले में किसान के खेत में फल लाकर कुमकुम से विभिन्न उत्पाद तैयार करेंगे।
वर्तमान समय में उनकी बागवानी में पांच मजदूर नियमित काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह प्रयोगधर्मी हैं। वे पुणे से मध्य प्रदेश होकर लौट रहे थे। उन्हें मप्र के जंगल में कुमकुम का पेड़ दिखा। उसके बारे में जानकारी एकत्र की, फिर बीज लेकर कुमकुम की बागवानी से लेकर व्यवसाय से जोड़ने की कवायद की।
इनसेट
पान, बेल में फलने वाली घुइयां भी तैयार
फतेहपुर। प्रगतिशील किसान की बागवानी में अन्य कई तरह के प्रयोग कर नए पौधे तैयार हैं। इनमें पान के पौधे और पेड़ में फलने वाली घुइयां (अरुई) शामिल है। किसान अशोक तपस्वी ने बताया कि उनका प्रयास है कि गेहूं धान के बजाय किसान ऐसी फसलें तैयार करें, जिसकी बाजार में अच्छी कीमत मिले और उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत बन सके।
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फोटो-18-कुमकुम का पौधा दिखाते प्रगतिशील किसान अशोक तपस्वी। संवाद
फोटो-19-कुमकुम से तैयार कलर कपड़े, मेकअप सामग्री। संवाद
फोटो-20-कुमकुम का पका फल। संवाद
अब शहर में बनेगी रेडिएशन विहीन मेकअप सामग्री
-प्रगतिशील किसान ने तैयार की कुमकुम की बागवानी, अन्य किसानों को भी मिलेगा रोजगार
सुघर सिंह
फतेहपुर। शहर के तपस्वीनगर में कुमकुम की बागवानी तैयार हो रही है। भीनी सुगंध वाले कुमकुम से सिंदूर, फेस पाउडर, लिपिस्टिक के साथ कपड़े रंगे जा सकेंगे। प्रगतिशील किसान अशोक तपस्वी ने 12 साल के अथक प्रयास से कुमकुम के सात पेड़ तैयार किए हैं और अब 36 पेड़ों का बाग तैयार करने में जुटे हैं। इनमें भी इस बार फूल आ रहे हैं। अब कुमकुम की बागवानी से किसानों को रोजगार देने की योजना है।
पुणे के व्यवसाई अशोक तपस्वी का शहर सीमा के अंदर ही मंडी समिति के सामने फार्म हाउस है। इसी में कुमकुम की बागवानी तैयार हो रही है। किसान ने तैयार सात पेड़ों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए कपड़ा रंगा है और फेस पाउडर, लिपिस्टिक, सिंदूर तैयार किया है। कुमकुम के 10 फलों से चार मीटर काटन का कपड़ा रंगा है।
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किसान का कहना है कि पेड़ के फलों के अंदर से निकलने वाले बीजों से रेडिएशन विहीन सिंदूर तैयार होता है। इससे बनी सभी सामाग्री रेडियेशन से पूरी तरह सुरक्षित है। हर साल फल जनवरी में पकना शुरू होता है। गर्मी के पहले फल पक कर फट जाते हैं। यह फल तोड़कर बीज पीसने से सुगंधित सिंदूर तैयार होता है।
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प्रगतिशील किसान ने बताया कि जल्द ही कुमकुम की नर्सरी में एक लाख पौधे तैयार किए जाएंगे। यह पौधे किसान अपने खेतों में रोपित करें। इससे पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही वह किसानों को प्रति पेड़ 500 रुपये सालाना भुगतान करेंगे और बदले में किसान के खेत में फल लाकर कुमकुम से विभिन्न उत्पाद तैयार करेंगे।
वर्तमान समय में उनकी बागवानी में पांच मजदूर नियमित काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह प्रयोगधर्मी हैं। वे पुणे से मध्य प्रदेश होकर लौट रहे थे। उन्हें मप्र के जंगल में कुमकुम का पेड़ दिखा। उसके बारे में जानकारी एकत्र की, फिर बीज लेकर कुमकुम की बागवानी से लेकर व्यवसाय से जोड़ने की कवायद की।
इनसेट
पान, बेल में फलने वाली घुइयां भी तैयार
फतेहपुर। प्रगतिशील किसान की बागवानी में अन्य कई तरह के प्रयोग कर नए पौधे तैयार हैं। इनमें पान के पौधे और पेड़ में फलने वाली घुइयां (अरुई) शामिल है। किसान अशोक तपस्वी ने बताया कि उनका प्रयास है कि गेहूं धान के बजाय किसान ऐसी फसलें तैयार करें, जिसकी बाजार में अच्छी कीमत मिले और उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत बन सके।