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Fatehpur News: शहर के तालाबों का मिटा वजूद

Mon, 04 Mar 2024 12:47 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहपुर Updated Mon, 04 Mar 2024 12:47 AM IST
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City ponds disappear
फोटो-15-नाले में परिवर्तित हुआ खलीलनगर तालाब। संवाद
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नगर पालिका परिक्षेत्र में 84 तालाब थे, आज कई विलुप्त हो चुके
संवाद न्यूज एजेंसी
फतेहपुर। शहर में तालाबों पर सरेआम अतिक्रमण हो रहा है। आलम यह है कि एक समय पूरे शहर में जहां 84 से अधिक तालाब थे, आज कुछेक तालाब ही बचे हैं। शासन स्तर से सख्ती के बाद भी तालाब की जमीन पर लगातार कब्जे हो रहे हैं। कई स्थानों पर प्लाटिंग कर निर्माण भी शुरू है।
शहर में तालाबों का अस्तित्व मिटने की कगार पर पहुंच चुका है। संरक्षित करने के बजाय लोग तालाबों का अस्तित्व मिटा रहे हैं। नगर पालिका के विस्तार के समय 84 तालाब अधीन हुए थे। वर्तमान में गिने-चुने तालाब ही बचे हैं। तालाबों का अस्तित्व मिटने का नतीजा है कि 20 फीट गहराई वाला शहर का जलस्तर 50 फीट के नीचे खिसक चुका है।
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नगर पालिका का पहले विस्तार 1964 में हुआ था। उस दौरान 49 गांव निकाय में शामिल हुए थे। नगर पालिका के अभिलेखों में अभी 84 तालाब दर्ज हैं। वर्तमान में स्थिति एकदम भिन्न हो चुकी है। अधिकांश तालाब गुम हो चुके हैं। खलीलनगर का तालाब नाले में परिवर्तित हो चुका है। गंगानगर का तालाब मिट चुका है।
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शहर के ऐतिहासिक तालाबों में रामगंज पक्का तालाब मोहल्ले का पक्का तालाब, आबूनगर का रानी तालाब, नगर पालिका के पीछे विक्टोरिया तालाब का अस्तित्व खतरे में पहुंच चुका है। यह तालाब भी पाटे जा रहे हैं। देखरेख के अभाव में अब तालाबों की संख्या मौके पर आधी भी नहीं बची। नब्बे के दशक तक बहुतायत तालाब यथा स्थिति में रहे। तालाबों का अस्तित्व खत्म होने का दंश शहरवासियों को झेलना पड़ रहा है। एक तरफ जल स्तर नीचे चला गया है, जबकि दूसरी तरफ बारिश में जलभराव की समस्या पैदा होती है।

तालाबों का सर्वे करके महायोजना में करना है शामिल
तालाबों का जीआई सर्वे करके उन्हें महायोजना-2031 में शामिल करना है। कब्जा होने पर सख्त कार्रवाई का आदेश है। बता दें कि दिसंबर 2018 में तत्कालीन डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने तालाबों पर अतिक्रमण हटाने की कार्ययोजना तैयार की थी। उन्होंने 1964 के अभिलेखों का मुआयना शुरू कराया था। इसी दौरान उनका तबादला हो गया था।
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फोटो-16-एडवोकेट धीरेंद्र वीर
पटेलनगर निवासी एडवोकेट धीरेंद्र वीर का कहना है कि तालाब की जमीन पर अतिक्रमण हटाना सिर्फ कागजों में सिमटा है। सरेआम तालाबों परपक्के निर्माण हो रहे हैं। इसका खामियाजा बारिश में शहरवासियों को जलभराव से भुगतना पड़ रहा है।
फोटो-17-पीलूतले निवासी उमेश तिवारी का कहना है कि शहर के अधिकांश तालाब विलुप्त हो चुके हैं। बचे तालाब भी विलुप्त होने के कगार पर हैं। शहर की सैकड़ों बीघे तालाब की जमीन गायब हो चुकी है। यहां बड़े-बड़े भवन खड़े हो चुके हैं।

बयान:-
शहर में तालाबों की सही संख्या की जानकारी नहीं है। अगर तालाब थे, तो गायब कैसे हो गए, यह जांच का विषय है। तालाबों का अतिक्रमण हटाना अकेले नगर पालिका के बूते की बात नहीं। निकाय के 84 तालाबों की संख्या की जानकारी हुई है, तो अभिलेखों का निरीक्षण किया जाएगा। समीर कुमार कश्यप, ईओ नगर पालिका
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