फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Fatehpur News ›   Big evidence of mischief

बदइंतजामी का बड़ा सबूत बने रैन बसेरे

Sat, 06 Jan 2018 12:03 AM IST
fatehpur
fatehpur Updated Sat, 06 Jan 2018 12:03 AM IST
विज्ञापन
Big evidence of mischief
खाली पड़ा रेलवे स्टेशन का अस्थायी रैन बसेरा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

विज्ञापन

फतेहपुर। भले ही सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ रैन बसेरा की सेवाओं की टोह लेने को निकल रहे हैं। पर, यहां सुविधाओं का टोटा है। यहां बनाए गए दो अस्थाई रैन बसेरा के इंतजाम शुक्रवार को हाशिए पर नजर आए। तंबू और कनात से बने रैन बसेरा खुद ठंड से गीले हो रहे हैं।

यहां कड़ाके की ठंड से बचने को दिए गए उपाय नाकाफी हैं। शीतलहरी के झोंके यहां पहुंचने वाले जरूरतमंदों को और बेहाल कर रहे हैं।
करीब 29 लाख की आबादी के बीच जिला मुख्यालय में केवल दो अस्थायी रैन बसेरा खुले हैं

। रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन में बनाए गए रैन बसेरों में लोग रात गुजारने से कतराते हैं। वही रुक रहे हैं जिनके पास दूसरा कोई ठौर रहीं। आदर्श रेलवे स्टेशन से रोजाना हजारों लोग अप-डाउन करते हैं। शुक्रवार की सुबह सवा 11 बजे यहां बने रैन बसेरा में 10 गद्दे और 11 रजाई मिले।
विज्ञापन


रैन बसेरा की रखवाली करने वाले समीर ने बताया कि इतने ही बिस्तर की व्यवस्था है। रात में इतने ही लोग रुकने को आते हैं। ज्यादातर लोग कॉमन हॉल में जाकर सो जाते हैं। अगर इस रैन बसेरा की सुविधाओं और कॉमन हाल की तुलना करे तो कॉमन हाल ज्यादा मुफीद है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ज्वालागंज चौराहा स्थित रोडवेज बस स्टाप में दूसरे रैन बसेरा में साढ़े 11 बजे एक भी बिस्तर नहीं था। एक व्यक्ति एक किनारे खुद के एक  पतले कंबल में दुबका नजर आया। एक अन्य व्यक्ति पूछताछ केंद्र के पास ठंड से ठिठुरता मिला। पूछने पर खुद का नाम राजू बताते हुए कहा कि भीख मांगकर पेट पालता है। ठंड लगने से वह रैन बसेरा में रुकने गया था। वहां के हाल देखकर लौट रहा है।

इनसेट-
अस्पताल के रैन बसेरा में ताले
फतेहपुर। जिला अस्पताल के रैन बसेरा ताले के कैद से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। अक्सर यह ताले में जकड़े रहते हैं। नतीजा तीमारदार वार्ड और उसके इर्दगिर्द रात गुजारने को मजबूर हो रहे हैं। अस्पताल प्रशासन केवल यह कहकर खामोश हो जाता है कि जब कोई तीमारदार रुकने की बात करता है तो उसके लिए ताला खुलवाया जाता है। सीएमएस डॉ. रेखारानी का कहना है कि ज्यादातर तीमारदार अपने मरीज के पास ही रात में रुकना चाहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed