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Fatehpur News: आवास योजना की जांच में अपात्र मिला लाभार्थी, सचिव से जवाब-तलब
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चौडगरा। मलवां विकासखंड की कोरसम ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी के चयन पर सवाल खड़े हो गए हैं। आवास के लिए आवेदन करने वाली महिला को ग्राम पंचायत स्तर से पात्र घोषित किया गया लेकिन ब्लॉक स्तर की क्रॉस चेकिंग में उसे अपात्र कर दिया गया।
बाद में परियोजना निदेशक शेषमणि सिंह ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो लाभार्थी अपात्र मिली। मामले को गंभीरता से लेते हुए सचिव से जवाब-तलब किया गया है।
कोरसम गांव की ऊषा देवी ने आवास योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया था। ग्राम पंचायत सचिव की ओर से उन्हें पात्र कर दिया गया। इसके बाद ब्लॉक स्तर पर हुई क्रॉस चेकिंग में एक कर्मचारी ने उन्हें अपात्र कर दिया। आवास की जारी सूची में नाम नहीं आने पर ऊषा देवी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत की।
शिकायत की जानकारी मिलने पर परियोजना निदेशक शेषमणि सिंह ने बृहस्पतिवार को गांव पहुंचकर स्थलीय जांच की। जांच में संबंधित लाभार्थी आवास के लिए अपात्र पाई गईं। इसके बाद पात्रता प्रक्रिया और जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
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पीडी ने मामले में ग्राम पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है। सचिव को अब यह बताना होगा कि जब लाभार्थी पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करती थी तो उसे पात्र कैसे घोषित किया गया। वहीं लाभार्थी द्वारा मानवाधिकार आयोग में शिकायत किए जाने की भी चर्चा है। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
परियोजना निदेशक शेषमणि सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत पहुंचकर लाभार्थी के आवास की जांच की गई थी। जांच में लाभार्थी अपात्र पाया गया है। इस मामले में सचिव से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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बाद में परियोजना निदेशक शेषमणि सिंह ने मौके पर पहुंचकर जांच की तो लाभार्थी अपात्र मिली। मामले को गंभीरता से लेते हुए सचिव से जवाब-तलब किया गया है।
कोरसम गांव की ऊषा देवी ने आवास योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया था। ग्राम पंचायत सचिव की ओर से उन्हें पात्र कर दिया गया। इसके बाद ब्लॉक स्तर पर हुई क्रॉस चेकिंग में एक कर्मचारी ने उन्हें अपात्र कर दिया। आवास की जारी सूची में नाम नहीं आने पर ऊषा देवी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत की।
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शिकायत की जानकारी मिलने पर परियोजना निदेशक शेषमणि सिंह ने बृहस्पतिवार को गांव पहुंचकर स्थलीय जांच की। जांच में संबंधित लाभार्थी आवास के लिए अपात्र पाई गईं। इसके बाद पात्रता प्रक्रिया और जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
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पीडी ने मामले में ग्राम पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए स्पष्टीकरण तलब किया है। सचिव को अब यह बताना होगा कि जब लाभार्थी पात्रता की शर्तें पूरी नहीं करती थी तो उसे पात्र कैसे घोषित किया गया। वहीं लाभार्थी द्वारा मानवाधिकार आयोग में शिकायत किए जाने की भी चर्चा है। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
परियोजना निदेशक शेषमणि सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत पहुंचकर लाभार्थी के आवास की जांच की गई थी। जांच में लाभार्थी अपात्र पाया गया है। इस मामले में सचिव से स्पष्टीकरण मांगा गया है।