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ईश्वर को जानने के लिए पहले खुद को जानें- रामायणी
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बिंदकी। धर्म की हानि जब होती है और अधर्म और पाप बढ़ जाता है, तब भगवान धरती पर जन्म लेते हैं। यह बात रुचिका रामायणी ने खजुहा विकासखंड क्षेत्र के छीछा गांव स्थित श्री खंडेश्वर अखंड धाम में कही। यहां 11 दिवसीय श्री राम नाम महायज्ञ रासलीला व प्रवचन का कार्यक्रम हो रहा है।
रामायणी रुचिका ने सुनाया कि मनुष्य में धर्म और अधर्म दोनों प्रवृत्तियों का वास होता है। मनुष्य जब अधर्म के रास्ते पर चलता है तो उसका मन बार-बार नकारात्मक दिशा की ओर जाता है। परंतु मनुष्य इस पर ध्यान नहीं देता इतना ही नहीं हमारी चेतना जगत में बैठा ईश्वर हमें अधर्म करने से बार-बार रोकता है। उन्होंने कहा कि लोग ईश्वर को मानते तो हैं लेकिन जानते नहीं। ईश्वर को जानने के लिए पहले स्वयं को जानना होगा। आत्मा सब में होती है लेकिन जो महान आत्मा होती है वही परमात्मा होती है। आए लोगों ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर वरदान मांगा। वृंदावन से आए कलाकारों ने रासलीला का मंचन किया। देर शाम अंधेरा होते ही पूरा मंदिर परिसर बिजली की जगमग रोशनी से नहा गया। कार्यक्रम की व्यवस्था संभालने वालों में विनोद, प्रेम नारायण, श्यामू सिंह, राम बहादुर यादव, कामता दुबे, दहाड़ानंद, दुर्गा प्रसाद, गोरेलाल, अजीत सिंह आदि रहे।
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रामायणी रुचिका ने सुनाया कि मनुष्य में धर्म और अधर्म दोनों प्रवृत्तियों का वास होता है। मनुष्य जब अधर्म के रास्ते पर चलता है तो उसका मन बार-बार नकारात्मक दिशा की ओर जाता है। परंतु मनुष्य इस पर ध्यान नहीं देता इतना ही नहीं हमारी चेतना जगत में बैठा ईश्वर हमें अधर्म करने से बार-बार रोकता है। उन्होंने कहा कि लोग ईश्वर को मानते तो हैं लेकिन जानते नहीं। ईश्वर को जानने के लिए पहले स्वयं को जानना होगा। आत्मा सब में होती है लेकिन जो महान आत्मा होती है वही परमात्मा होती है। आए लोगों ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा कर वरदान मांगा। वृंदावन से आए कलाकारों ने रासलीला का मंचन किया। देर शाम अंधेरा होते ही पूरा मंदिर परिसर बिजली की जगमग रोशनी से नहा गया। कार्यक्रम की व्यवस्था संभालने वालों में विनोद, प्रेम नारायण, श्यामू सिंह, राम बहादुर यादव, कामता दुबे, दहाड़ानंद, दुर्गा प्रसाद, गोरेलाल, अजीत सिंह आदि रहे।
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