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अच्छी हुई दलहनी व तिलहनी फसलें, किसानों के चेहरे खिले
Updated Sun, 08 Apr 2018 11:40 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। इस बार चना और सरसों की खेती अच्छी होने से अन्नदाता गदगद हैं। फसल अच्छी तैयार होने से उम्मीद है कि बाजार में दाम भी अच्छे मिलेंगे। किसानों ने चना और सरसों की फसल कटवा ली है और अब खुले बाजार में व्यापारियों से संपर्क कर रहे हैं। सरकार की ओर से क्रय केंद्र खुलने की बात सुनकर अच्छा समर्थन मूल्य मिलने की आस है।
जनपद में दलहनी और तिलहनी फसलें यमुना पट्टी और गंगा बेल्ट में अधिक पैदा की जाती हैं। करीब एक लाख किसानों ने चना, सरसों की फसल तैयार की है। कृषि विभाग के मुताबिक 46140 हेक्टेयर में चना की खेती का लक्ष्य रहा। इसमें 15.83 क्विंटल प्रति हेक्टेयर चना पैदा होने की उम्मीद जताई गई। इसी प्रकार 17467 हेक्टेयर में सरसों की खेती का लक्ष्य रहा। इसमें 13.47 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार होने की उम्मीद रही।
खेतों में चना और सरसों की फसलों में कीड़े और रोग न लगने से उत्पादन अच्छा हुआ है। इसका लाभ किसानों को मिलेगा। असोथर क्षेत्र के मटिहा गांव के रहने वाले किसान राम बाबू तिवारी ने बताया कि पांच बीघे में 16 क्विंटल चना तैयार हुआ है। 35 सौ रुपये प्रति क्विंटल चना और 32 सौ रुपये प्रति क्विंटल सरसों का भाव बाजार में चल रहा है। मटिहा गांव के किसान आशुतोष ने बताया कि उन्होंने चना और सरसों की खेती की थी दोनों फसलें अच्छी तैयार हुई हैं।
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रोग से बचाव पर ही फसलें होती अच्छी
जिला कृषि अधिकारी बबलू कुमार ने बताया कि दलहनी और तिलहनी की फसलें किसानों की अच्छी रही हैं। समय-समय पर किसानों को गोष्ठी के माध्यम से जागरूक करने का लाभ मिला है। किसानों को फसलों में लगने वाले रोग और उनसे बचाव की भी जानकारी दी जाती है। गेहूं, धान व गन्ना की तरह इनके भी क्रय केंद्र खुलने की बात सुनी है। आदेश आते ही उस पर क्रियान्वयन कराया जाएगा। नेफेड व एफसीआई संस्था को यह जिम्मा देने की बात आ रही है।
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फतेहपुर। इस बार चना और सरसों की खेती अच्छी होने से अन्नदाता गदगद हैं। फसल अच्छी तैयार होने से उम्मीद है कि बाजार में दाम भी अच्छे मिलेंगे। किसानों ने चना और सरसों की फसल कटवा ली है और अब खुले बाजार में व्यापारियों से संपर्क कर रहे हैं। सरकार की ओर से क्रय केंद्र खुलने की बात सुनकर अच्छा समर्थन मूल्य मिलने की आस है।
जनपद में दलहनी और तिलहनी फसलें यमुना पट्टी और गंगा बेल्ट में अधिक पैदा की जाती हैं। करीब एक लाख किसानों ने चना, सरसों की फसल तैयार की है। कृषि विभाग के मुताबिक 46140 हेक्टेयर में चना की खेती का लक्ष्य रहा। इसमें 15.83 क्विंटल प्रति हेक्टेयर चना पैदा होने की उम्मीद जताई गई। इसी प्रकार 17467 हेक्टेयर में सरसों की खेती का लक्ष्य रहा। इसमें 13.47 क्विंटल प्रति हेक्टेयर पैदावार होने की उम्मीद रही।
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खेतों में चना और सरसों की फसलों में कीड़े और रोग न लगने से उत्पादन अच्छा हुआ है। इसका लाभ किसानों को मिलेगा। असोथर क्षेत्र के मटिहा गांव के रहने वाले किसान राम बाबू तिवारी ने बताया कि पांच बीघे में 16 क्विंटल चना तैयार हुआ है। 35 सौ रुपये प्रति क्विंटल चना और 32 सौ रुपये प्रति क्विंटल सरसों का भाव बाजार में चल रहा है। मटिहा गांव के किसान आशुतोष ने बताया कि उन्होंने चना और सरसों की खेती की थी दोनों फसलें अच्छी तैयार हुई हैं।
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रोग से बचाव पर ही फसलें होती अच्छी
जिला कृषि अधिकारी बबलू कुमार ने बताया कि दलहनी और तिलहनी की फसलें किसानों की अच्छी रही हैं। समय-समय पर किसानों को गोष्ठी के माध्यम से जागरूक करने का लाभ मिला है। किसानों को फसलों में लगने वाले रोग और उनसे बचाव की भी जानकारी दी जाती है। गेहूं, धान व गन्ना की तरह इनके भी क्रय केंद्र खुलने की बात सुनी है। आदेश आते ही उस पर क्रियान्वयन कराया जाएगा। नेफेड व एफसीआई संस्था को यह जिम्मा देने की बात आ रही है।