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1.42 लाख बच्चों को लगेंगे दिमागी बुखार के टीके
Updated Wed, 21 Feb 2018 11:24 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहपुर। जापानी इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) से बच्चों को बचाने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। पिछले वर्ष गोरखपुर मेडिकल कालेज में हुई घटना के बाद स्वास्थ्य महकमा ने रणनीति बनाई है। इस बार एक से 14 वर्ष तक के एक लाख 42 हजार बच्चों को टीके लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। एक अप्रैल से टीकाकरण का अभियान चलाया जाएगा।
जापानी इंसेफेलाइटिस एक प्रकार का दिमागी बुखार है जो वायरल संक्रमण के कारण होता है। यह वायरस मच्छर या सुअर से फैलते हैं। ज्यादा गंदगी वाली जगह पर भी यह वायरस पनपता है। एक बार शरीर के संपर्क में आने पर यह सीधा दिमाग में चला जाता है।
सीएमओ डा. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि शासन से रिपोर्ट आई है। एक अप्रैल से 15 अप्रैल तक अभियान चलेगा। इसके लिए माइक्रोप्लान तैयार कर चिकित्सा प्रभारियों के साथ बैठक की जाएगी।
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जापानी इन्सेफेलाइटिस के लक्षण
बुखार, सिरदर्द, गर्दन में जकड़न, कमजोरी और उल्टी होना इस बुखार के शुरुआती लक्षण हैं। समय के साथ सिरदर्द में बढ़ोतरी होने लगती है और हमेशा सुस्ती छाई रहती है। भूख कम लगना, तेज बुखार, अतिसंवेदनशील होना। कुछ समय के बाद भ्रम का शिकार होना फिर पागलपन के दौरे आना, लकवा मारना और स्थिति कोमा तक पहुंच सकती है। बहुत छोटे बच्चों में ज्यादा देर तक रोना, भूख की कमी, बुखार और उल्टी होना जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।
क्या होता है इसका असर
जापानी बुखार से पीड़ित होने के बाद बच्चे की सोचने समझने और सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। यह वायरस छुआछूत से नहीं फैलता है। यह अधिकतर एक से 14 साल की उम्र के बच्चों या 65 वर्ष से ऊपर के लोगों को चपेट में लेता है। अगस्त, सितंबर और अक्तूबर माह में यह ज्यादा फैलता है।
बचाव के उपाय
समय से टीकाकरण कराएं, साफ-सफाई से रहें, गंदे पानी के संपर्क में आने से बचना होगा। मच्छरों से बचाव के लिए घरों के आसपास पानी न जमा होने दें। बारिश के मौसम में बच्चों को बेहतर खानपान दें।
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फतेहपुर। जापानी इंसेफेलाइटिस (दिमागी बुखार) से बच्चों को बचाने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। पिछले वर्ष गोरखपुर मेडिकल कालेज में हुई घटना के बाद स्वास्थ्य महकमा ने रणनीति बनाई है। इस बार एक से 14 वर्ष तक के एक लाख 42 हजार बच्चों को टीके लगाए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। एक अप्रैल से टीकाकरण का अभियान चलाया जाएगा।
जापानी इंसेफेलाइटिस एक प्रकार का दिमागी बुखार है जो वायरल संक्रमण के कारण होता है। यह वायरस मच्छर या सुअर से फैलते हैं। ज्यादा गंदगी वाली जगह पर भी यह वायरस पनपता है। एक बार शरीर के संपर्क में आने पर यह सीधा दिमाग में चला जाता है।
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सीएमओ डा. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि शासन से रिपोर्ट आई है। एक अप्रैल से 15 अप्रैल तक अभियान चलेगा। इसके लिए माइक्रोप्लान तैयार कर चिकित्सा प्रभारियों के साथ बैठक की जाएगी।
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जापानी इन्सेफेलाइटिस के लक्षण
बुखार, सिरदर्द, गर्दन में जकड़न, कमजोरी और उल्टी होना इस बुखार के शुरुआती लक्षण हैं। समय के साथ सिरदर्द में बढ़ोतरी होने लगती है और हमेशा सुस्ती छाई रहती है। भूख कम लगना, तेज बुखार, अतिसंवेदनशील होना। कुछ समय के बाद भ्रम का शिकार होना फिर पागलपन के दौरे आना, लकवा मारना और स्थिति कोमा तक पहुंच सकती है। बहुत छोटे बच्चों में ज्यादा देर तक रोना, भूख की कमी, बुखार और उल्टी होना जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।
क्या होता है इसका असर
जापानी बुखार से पीड़ित होने के बाद बच्चे की सोचने समझने और सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। यह वायरस छुआछूत से नहीं फैलता है। यह अधिकतर एक से 14 साल की उम्र के बच्चों या 65 वर्ष से ऊपर के लोगों को चपेट में लेता है। अगस्त, सितंबर और अक्तूबर माह में यह ज्यादा फैलता है।
बचाव के उपाय
समय से टीकाकरण कराएं, साफ-सफाई से रहें, गंदे पानी के संपर्क में आने से बचना होगा। मच्छरों से बचाव के लिए घरों के आसपास पानी न जमा होने दें। बारिश के मौसम में बच्चों को बेहतर खानपान दें।