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Fatehpur News: विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे 12 सीएचसी
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फतेहपुर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावों के बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। जिले की सभी 12 सीएचसी में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं हैं।
प्रसव के दौरान जटिलता सामने आने पर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ता है। आपात स्थिति में रेफर और इलाज में लगने वाला समय जच्चा-बच्चा के लिए परेशानी बढ़ा सकता है।
बिंदकी सीएचसी में तैनात महिला चिकित्सक डॉ. शिवानी वाजपेयी के इस्तीफे के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दिया है। उनके जाने के बाद जिले की किसी भी सीएचसी में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ नहीं बचा है।
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धाता, गाजीपुर, हुसैनगंज, सराय खालिस, बिंदकी, जहानाबाद, हसवा, अमौली, हरदौं, खखरेहू और हथगाम समेत 12 सीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है।
जटिलता बढ़ने पर रेफर करना बन रहा विकल्प
सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से हाई रिस्क गर्भावस्था और प्रसव के दौरान आने वाली जटिलताओं का इलाज चुनौती बन जाता है। अत्यधिक रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप और भ्रूण की गलत स्थिति जैसी परिस्थितियों में विशेषज्ञ उपचार की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे मामलों में मरीज को जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। एंबुलेंस मिलने और दूसरे केंद्र तक पहुंचने में लगने वाला समय भी आपात स्थिति में महत्वपूर्ण होता है।
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए यह परेशानी अधिक गंभीर है, क्योंकि अधिकांश सीएचसी दूरदराज के इलाकों में स्थित हैं। अचानक मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों को भी व्यवस्था करनी पड़ती है।
मेडिकल कॉलेज पर बढ़ रहा मरीजों का दबाव
सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने का असर जिला मुख्यालय की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं को उच्च चिकित्सा केंद्रों पर भेजे जाने से मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर मरीजों का दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है।
विशेषज्ञों के अभाव में सामान्य प्रसव और जटिल मामलों के बीच उचित चिकित्सकीय प्रबंधन भी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए सीएचसी स्तर पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों की तैनाती जरूरी मानी जा रही है।
जिले की सीएचसी में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। चिकित्सकों की उपलब्धता होने पर सीएचसी में विशेषज्ञ सेवाएं शुरू कराई जाएंगी, जिससे गर्भवती महिलाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार मिल सकेगा।- डॉ. यूबी सिंह, सीएमओ।
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प्रसव के दौरान जटिलता सामने आने पर मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ता है। आपात स्थिति में रेफर और इलाज में लगने वाला समय जच्चा-बच्चा के लिए परेशानी बढ़ा सकता है।
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बिंदकी सीएचसी में तैनात महिला चिकित्सक डॉ. शिवानी वाजपेयी के इस्तीफे के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दिया है। उनके जाने के बाद जिले की किसी भी सीएचसी में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ नहीं बचा है।
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धाता, गाजीपुर, हुसैनगंज, सराय खालिस, बिंदकी, जहानाबाद, हसवा, अमौली, हरदौं, खखरेहू और हथगाम समेत 12 सीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है।
जटिलता बढ़ने पर रेफर करना बन रहा विकल्प
सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से हाई रिस्क गर्भावस्था और प्रसव के दौरान आने वाली जटिलताओं का इलाज चुनौती बन जाता है। अत्यधिक रक्तस्राव, उच्च रक्तचाप और भ्रूण की गलत स्थिति जैसी परिस्थितियों में विशेषज्ञ उपचार की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे मामलों में मरीज को जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज रेफर किया जाता है। एंबुलेंस मिलने और दूसरे केंद्र तक पहुंचने में लगने वाला समय भी आपात स्थिति में महत्वपूर्ण होता है।
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के लिए यह परेशानी अधिक गंभीर है, क्योंकि अधिकांश सीएचसी दूरदराज के इलाकों में स्थित हैं। अचानक मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों को भी व्यवस्था करनी पड़ती है।
मेडिकल कॉलेज पर बढ़ रहा मरीजों का दबाव
सीएचसी में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने का असर जिला मुख्यालय की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं को उच्च चिकित्सा केंद्रों पर भेजे जाने से मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर मरीजों का दबाव बढ़ रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को स्थानीय स्तर पर अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है।
विशेषज्ञों के अभाव में सामान्य प्रसव और जटिल मामलों के बीच उचित चिकित्सकीय प्रबंधन भी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए सीएचसी स्तर पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों की तैनाती जरूरी मानी जा रही है।
जिले की सीएचसी में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों की कमी को लेकर उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। चिकित्सकों की उपलब्धता होने पर सीएचसी में विशेषज्ञ सेवाएं शुरू कराई जाएंगी, जिससे गर्भवती महिलाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार मिल सकेगा।- डॉ. यूबी सिंह, सीएमओ।