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मठाधीशों को होने लगा दुआ सलाम
ब्यूरो/अमर उजाला,फर्रुखाबाद
Updated Sat, 16 Jan 2016 11:53 PM IST
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फर्रुखाबाद। सपा सरकार ने छात्र संघ चुनाव कराने का एलान किया है। इससे छात्र नेताओं में खुशी है। मठाधीशों को भी दिन बहुरने के आसार हैं। शहर के बद्री विशाल कालेज में शनिवार को अवकाश के बाद भी कई छात्र नेता पहुंचे।
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इसके साथ ही बैठक मेें छात्र नेताआें की जुबां पर चुनाव की चर्चा रही। इन्हाेंने मठाधीशों से दुआ सलाम शुरू कर दी है। शहर का बद्री विशाल डिग्री कालेज में अध्यक्ष का चुनाव प्रतिष्ठापूर्ण होता है। इसमें सियासत का सीधा दखल रहता है। जनप्रतिनिधि भी दिलचस्पी रखते हैं। यहां 2008 के बाद से छात्र संघ का चुनाव नहीं हुआ। सरकार के एलान से यहां माहौल में तब्दीली आने लगी है।
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खून से रंगती रही सियासत
कानपुर विश्वविद्यालय में नंबर दो की जगह रखने वाले बद्री विशाल डिग्री कालेज में छात्रसंघ चुनाव के दौरान खूनी हिंसा आम रही है। 25 अक्तूबर 1979 को छात्रों के मान-सम्मान की लड़ाई में पुलिस की गोली का शिकार हुए बद्री विशाल डिग्री कालेज के छात्र अनिल दीक्षित और शिव कुमार चतुर्वेदी की मौत हो गई थी। इन दोनों छात्रों की याद में हर साल 25 अक्तूबर को त्रिपोलिया चौक पर शहीद दिवस मनाया जाता है। वहीं, महाविद्यालय के अंदर ही वर्ष 2000 में छात्र अखंड प्रताप सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह सब छात्रसंघ चुनाव को लेकर ही हुआ था। चुनाव पर रोक हटवाने के लिए छात्रों ने कई चरणों में आंदोलन किए थे। सरकार बदलने के बाद छात्रसंघ चुनाव को बहाली तो मिली लेकिन कालेज प्रशासन की उदासीनता के चलते महाविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए।
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वर्ष 2007 में बद्री विशाल महाविद्यालय में छात्र संघ अध्यक्ष रहे एके राठौर का कहना है कि छात्र संघ चुनाव लिंग दोह कमेटी की सिफारिशों के अनुसार होने चाहिए। छात्र संघ राजनीति की नर्सरी है। प्रशासन कोर्ट की आड़ में चुनाव कराने से मुकर रहा है।
वर्ष 2004 में बद्री विशाल महाविद्यालय से छात्रसंघ अध्यक्ष रहे दिनेश यादव चुन्ने कहते हैं कि छात्रसंघ का गठन होने से कालेज प्रशासन अपनी मनमानी नहीं कर पाता है। निधियों का पैसा कालेज प्रशासन डकार जाता है। चुनाव होने से छात्रों की समस्याओं का निराकरण आसानी से हो जाता है।
वर्ष 2005 में बद्री विशाल महाविद्यालय से छात्रसंघ अध्यक्ष रहे राजीव चतुर्वेदी कहते हैं कि छात्र हित के लिए चुनाव जरूरी हैं। कालेज स्तर पर हुआ चुनाव राजनीति में जाने का प्लेटफार्म होता है। राजीव बसपा में जिला उपाध्यक्ष के अलावा लोकसभा प्रभारी का दायित्व भी संभाल चुके हैं।
वर्ष 1997 में छात्रसंघ अध्यक्ष रहे शैलेंद्र सिंह राठौर कहते हैं कि छात्र हितों को देखते हुए चुनाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे कालेज का माहौल खराब हो जाता है। छात्र पढ़ाई-लिखाई छोड़कर सारा ध्यान नेतागीरी में लगा देते हैं। कालेजों में छात्रसंघ चुनाव की जगह छात्र संसद का गठन होना चाहिए। शैलेंद्र भाजपा की मेनबॉडी के जिला उपाध्यक्ष रहे हैं।
वर्ष 1996 में बद्री विशाल डिग्री कालेज से छात्रसंघ अध्यक्ष रहे राजेश पाठक नगर विधायक विजय सिंह के प्रतिनिधि हैं और जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी लड़ा था। उनका कहना है कि छात्र राजनीति बंद होने से देश को अच्छे नेताओं की कमी से जूझना होगा। कहा कि छात्र राजनीति में गिरावट आई है। कालेज प्रशासन छात्रसंघ चुनाव कराने के पक्ष में नहीं रहते हैं।
वर्ष 2006 में बद्री विशाल डिग्री कालेज से छात्रसंघ अध्यक्ष रहे सुनील राठौर ने कहा कि छात्र हितों के लिए छात्र संघ चुनाव अति आवश्यक हैं। प्रत्याशी छात्र संघ चुनाव के लिए आवाज उठाएं तो वह किसी भी स्तर के आंदोलन के लिए तैयार हैं। सुनील राठौर ने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा था। यह सपा छात्र सभा में दो बार अध्यक्ष रह चुके हैं।
वर्ष 1987 में बद्री विशाल डिग्री कालेज से छात्रसंघ अध्यक्ष रहे बसपा नेता शरद श्रीवास्तव का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव छात्रों का मौलिक अधिकार हैं। प्रशासन चुनाव न कराकर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। उनके चुनाव से सात साल पहले तक चुनाव नहीं हुए थे। इसके लिए उन्होंने आंदोलन किया। शरद श्रीवास्तव छात्र राजनीति के बाद युवा जनता दल में प्रदेश अध्यक्ष तथा बसपा में कई पदों पर रह चुके हैं।