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Farrukhabad News: घरों में भरा पानी, छतों पर डेरा
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अमृतपुर। गंगा के जलस्तर में बुधवार को पांच सेंटीमीटर की कमी आई। वहीं रामगंगा का जलस्तर खतरे के निशान 137.10 मीटर से 10 सेंटीमीटर दूर रह गया है। कई गांव में नाव न होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घरों में बाढ़ का पानी भरा है। लोग छतों पर डेरा जमाए हैं पर शरणालयों में नहीं जा रहे हैं। नरौरा बांध से गंगा में 1,11,969 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा में बाढ़ का पानी खेतों में भर जाने से फसल खराब होने लगी है।
उत्तराखंड में भारी बारिश होने से नरौरा बांध से गंगा में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। तहसील क्षेत्र के 60 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। गांव अंबरपुर, बरुआ में प्रशासन द्वारा नाव न भेजी जाने से ग्रामीणों को आने जाने में दिक्कत हो रही है। उदयपुर, आशा की मड़ैया, तीसराम की मड़ैया, मंझा, करनपुर घाट, माखन नगला, कालिका नगला, मिघन नगला, कुड़री सारंगपुर आदि गांव के लोगों के लिए नाव ही सहारा है। घरों में पानी भरा होने से ग्रामीण छत या ऊंचे स्थान पर खुले आसमान में रहने को मजबूर हैं।
एक माह से अधिक समय से पानी गांव में भरा होने से ग्रामीण परेशानी उठा रहे हैं। दिनेश कुमार, जयचंद्र, अशोक, सुनील, तुलाराम, मंजेश, राजीव आदि ग्रामीणों का कहना है कि अब गंगा मईया शांत हो जाएं। परेशानी उठाने की हिम्मत नहीं रही।
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रामगंगा का जलस्तर 136.95 मीटर से बढ़कर 137.00 मीटर पर पहुंच गया है। खो हरेली रामनगर बैराज से 11595 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा में बाढ़ आने से खेतों में खड़ी तिल, बाजरा, धान, उड़द, मूंग की फसल खराब होने लगी है। गंगा का जलस्तर 137.15 मीटर से पांच सेंटीमीटर घटकर खतरे के निशान 137.10 मीटर पर पहुंच गया है।
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बाढ़ प्रभावित गांवों में नहीं पहुंच रही स्वास्थ्य टीम
अमृतपुर। गंगा और रामगंगा में आई बाढ़ से तहसील क्षेत्र के 60 से अधिक गांव प्रभावित हैं। पानी जमा होने से बीमारियां फैलने लगी हैं। कनकापुर, बदनपुर, तीसाराम की मड़ैया, ऊगरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, सुंदरपुर कछुआ गाढ़ा, भुड़रा, सैदापुर, जसूपुर गढि़या, नगला दुर्गु समेत कई गांवों में ग्रामीण सर्दी-जुकाम और बुखार से पीड़ित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावित गांवों में नहीं पहुंच रही है। उन्हें झोलाछाप से इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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उत्तराखंड में भारी बारिश होने से नरौरा बांध से गंगा में लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। तहसील क्षेत्र के 60 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। गांव अंबरपुर, बरुआ में प्रशासन द्वारा नाव न भेजी जाने से ग्रामीणों को आने जाने में दिक्कत हो रही है। उदयपुर, आशा की मड़ैया, तीसराम की मड़ैया, मंझा, करनपुर घाट, माखन नगला, कालिका नगला, मिघन नगला, कुड़री सारंगपुर आदि गांव के लोगों के लिए नाव ही सहारा है। घरों में पानी भरा होने से ग्रामीण छत या ऊंचे स्थान पर खुले आसमान में रहने को मजबूर हैं।
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एक माह से अधिक समय से पानी गांव में भरा होने से ग्रामीण परेशानी उठा रहे हैं। दिनेश कुमार, जयचंद्र, अशोक, सुनील, तुलाराम, मंजेश, राजीव आदि ग्रामीणों का कहना है कि अब गंगा मईया शांत हो जाएं। परेशानी उठाने की हिम्मत नहीं रही।
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रामगंगा का जलस्तर 136.95 मीटर से बढ़कर 137.00 मीटर पर पहुंच गया है। खो हरेली रामनगर बैराज से 11595 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। रामगंगा में बाढ़ आने से खेतों में खड़ी तिल, बाजरा, धान, उड़द, मूंग की फसल खराब होने लगी है। गंगा का जलस्तर 137.15 मीटर से पांच सेंटीमीटर घटकर खतरे के निशान 137.10 मीटर पर पहुंच गया है।
बाढ़ प्रभावित गांवों में नहीं पहुंच रही स्वास्थ्य टीम
अमृतपुर। गंगा और रामगंगा में आई बाढ़ से तहसील क्षेत्र के 60 से अधिक गांव प्रभावित हैं। पानी जमा होने से बीमारियां फैलने लगी हैं। कनकापुर, बदनपुर, तीसाराम की मड़ैया, ऊगरपुर, हरसिंहपुर कायस्थ, सुंदरपुर कछुआ गाढ़ा, भुड़रा, सैदापुर, जसूपुर गढि़या, नगला दुर्गु समेत कई गांवों में ग्रामीण सर्दी-जुकाम और बुखार से पीड़ित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रभावित गांवों में नहीं पहुंच रही है। उन्हें झोलाछाप से इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है।