{"_id":"62c3273f87bedd7ebc4dd655","slug":"panchavati-started-with-dry-2-97-lakh-in-one-year-farrukhabad-news-knp7058470109","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक वर्ष में सूखी 2.97 लाख से लगी पंचवटी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक वर्ष में सूखी 2.97 लाख से लगी पंचवटी
विज्ञापन
बलीपट्टी रानीगांव में पंचवटी उजड़ने के बाद खाली पड़ा मैदान। संवाद
- फोटो : FARRUKHABAD
अमृतपुर। राजेपुर ब्लाक परिसर के पीछे पिछले वर्ष मनरेगा से 2.97 लाख रुपये की लागत से विकसित की गई पंचवटी सूख गई है। प्रधान और अधिकारियों की अनदेखी के चलते पंचवटी उजाड़ नजर आ रही है। यही हाल क्षेत्र के गांवों में किए गए पौधरोपण का भी है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार हर साल पौधरोपण पर करोड़ों रुपये खर्च करती है। देख-रेख न होने से पौधे सूख जाते हैं। अधिकारियों के सामने प्रधान और सचिव फोटो खिंचवाने के साथ पौधे तैैयार करने की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं। इसके बाद पौधों की सेवा करना तो दूर उनकी ओर देखना भी मुनासिब नहीं समझते। राजेपुर ब्लाक के पीछे विद्युत उपकेंद्र के पास चार जुलाई 2021 को मनरेगा के तहत 2.97 लाख रुपये की लागत से पंचवटी के साथ अन्य पौधे लगाए गए थे।
जिले की नोडल अधिकारी माध्यमिक शिक्षा परिषद सचिव आराधना शुक्ला ने भी पंचवटी के पौधे लगाए थे। देखरेख की जिम्मेदारी सचिव और प्रधान को दी गई थी। अनदेखी के चलते पंचवटी के साथ अन्य पौधे भी सूख गए हैं। अशोक के कुछ पौधे ही बचे हैं। वह झाड़ियों से ढके हैं।
विज्ञापन
इसी तरह जुलाई 2019 में ग्राम पंचायत बलीपट्टी रानी गांव में भी ग्राम विकास के प्रमुख सचिव, नोडल अधिकारी व जिलाधिकारी मोनिका रानी ने अशोक, पीपल, बरगद, बेल, आंवला के पौधे लगाए गए थे। गंगा सोता नाला के किनारे कटान रोकने के लिए बांस के पौधे भी लगाए गए थे। देख-रेख न होने से पंचवटी उजड़ गई। अब वह जगह खाली पड़ी हुई है।
विकास खंड राजेपुर की 81 ग्राम पंचायतों में मंगलवार को दो लाख 17 हजार पौधा लगाने का लक्ष्य है। डीएफओ पीके उपाध्याय ने बताया है कि गौंटिया नर्सरी से करीब डेढ़ लाख पौधे दिए जा चुके हैं।
विज्ञापन
पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार हर साल पौधरोपण पर करोड़ों रुपये खर्च करती है। देख-रेख न होने से पौधे सूख जाते हैं। अधिकारियों के सामने प्रधान और सचिव फोटो खिंचवाने के साथ पौधे तैैयार करने की पूरी जिम्मेदारी लेते हैं। इसके बाद पौधों की सेवा करना तो दूर उनकी ओर देखना भी मुनासिब नहीं समझते। राजेपुर ब्लाक के पीछे विद्युत उपकेंद्र के पास चार जुलाई 2021 को मनरेगा के तहत 2.97 लाख रुपये की लागत से पंचवटी के साथ अन्य पौधे लगाए गए थे।
विज्ञापन
जिले की नोडल अधिकारी माध्यमिक शिक्षा परिषद सचिव आराधना शुक्ला ने भी पंचवटी के पौधे लगाए थे। देखरेख की जिम्मेदारी सचिव और प्रधान को दी गई थी। अनदेखी के चलते पंचवटी के साथ अन्य पौधे भी सूख गए हैं। अशोक के कुछ पौधे ही बचे हैं। वह झाड़ियों से ढके हैं।
विज्ञापन
इसी तरह जुलाई 2019 में ग्राम पंचायत बलीपट्टी रानी गांव में भी ग्राम विकास के प्रमुख सचिव, नोडल अधिकारी व जिलाधिकारी मोनिका रानी ने अशोक, पीपल, बरगद, बेल, आंवला के पौधे लगाए गए थे। गंगा सोता नाला के किनारे कटान रोकने के लिए बांस के पौधे भी लगाए गए थे। देख-रेख न होने से पंचवटी उजड़ गई। अब वह जगह खाली पड़ी हुई है।
विकास खंड राजेपुर की 81 ग्राम पंचायतों में मंगलवार को दो लाख 17 हजार पौधा लगाने का लक्ष्य है। डीएफओ पीके उपाध्याय ने बताया है कि गौंटिया नर्सरी से करीब डेढ़ लाख पौधे दिए जा चुके हैं।