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एक-एक रोटी पाने को तरस रहे बाढ़ पीड़ित बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो/फर्रुखाबाद
Updated Thu, 25 Aug 2016 11:02 PM IST
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कटान करतीं नदी।
- फोटो : अमर उजाला
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एक ओर जहां जन्माष्टमी पर घरों में बढ़िया-बढ़िया पकवान बनाए गए हैं। वहीं बाढ़ पीड़ित इलाकों में एक-एक रोटी पर कई बच्चे एक साथ टूटने को मजबूर हैं।
ब्लाक राजेपुर के गांव मंझा की मढ़ैया और शमसाबाद क्षेत्र के गांव साधौ सराय में चारों ओर बाढ़ का पानी भरा है। गांव के संपर्क मार्ग कट गए हैं। गांव आने-जाने के लिए बाढ़ पीड़ितों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। इन बाढ़ पीड़ितों को जिला प्रशासन की ओर से राहत के नाम पर कुछ भी नहीं मिला है। बाढ़ पीड़ितों के लिए जन्माष्टमी का त्योहार भी कोई मायने नहीं रख रहा है।
गुरुवार को गांव साधौ सराय में बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे सुनील कुमार के यहां जैसे ही थाली में भोजन आया तो चारपाई पर बैठे उनके नन्हे-मुन्ने बच्चे एक-एक रोटी को पाने के लिए टूट पड़े। सभी बच्चों ने एक ही थाली में खाना शुरू कर दिया। अन्य ग्रामीणों का कहना है जिस दिन बच्चों को भरपेट खाना मिल जायेगा, वहीं दिन त्यौहार मान लेंगे। भूखे पेट बच्चों को सोता देखने की बेबसी जीते जी मार रही है।
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उन्होंने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर भड़ास निकालते हुए कहा कि कहीं से भी मदद के नाम पर कुछ भी नहीं मिला है।
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ब्लाक राजेपुर के गांव मंझा की मढ़ैया और शमसाबाद क्षेत्र के गांव साधौ सराय में चारों ओर बाढ़ का पानी भरा है। गांव के संपर्क मार्ग कट गए हैं। गांव आने-जाने के लिए बाढ़ पीड़ितों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। इन बाढ़ पीड़ितों को जिला प्रशासन की ओर से राहत के नाम पर कुछ भी नहीं मिला है। बाढ़ पीड़ितों के लिए जन्माष्टमी का त्योहार भी कोई मायने नहीं रख रहा है।
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गुरुवार को गांव साधौ सराय में बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहे सुनील कुमार के यहां जैसे ही थाली में भोजन आया तो चारपाई पर बैठे उनके नन्हे-मुन्ने बच्चे एक-एक रोटी को पाने के लिए टूट पड़े। सभी बच्चों ने एक ही थाली में खाना शुरू कर दिया। अन्य ग्रामीणों का कहना है जिस दिन बच्चों को भरपेट खाना मिल जायेगा, वहीं दिन त्यौहार मान लेंगे। भूखे पेट बच्चों को सोता देखने की बेबसी जीते जी मार रही है।
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उन्होंने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर भड़ास निकालते हुए कहा कि कहीं से भी मदद के नाम पर कुछ भी नहीं मिला है।