फर्रुखाबाद। गैंगस्टर एक्ट के एक पुराने मामले में विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश अंकित कुमार मित्तल ने आरोपी लालू उर्फ अभिषेक कटियार की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने माना कि आरोपी पूर्व में मिली जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर चुका है। उसके दोबारा भागने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
कोतवाली फर्रुखाबाद में वर्ष 2016 में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में आरोपी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से वर्ष 2016 में जमानत मिली थी। इसके बाद विचारण के दौरान वह कई बार न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। वर्ष 2018 में उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ, जिसे बाद में निरस्त कराया गया। नवंबर 2025 से फिर लगातार गैर-जमानती वारंट जारी रहने के बावजूद वह अदालत में हाजिर नहीं हुआ। अंततः उसने 25 जून को आत्मसमर्पण किया। जमानत प्रार्थना पत्र में आरोपी ने दादी की गंभीर बीमारी और उनकी देखभाल के कारण न्यायालय में उपस्थित न हो पाने की दलील दी। साथ ही दादी की मृत्यु का भी हवाला दिया, लेकिन अदालत ने कहा कि इन दावों के समर्थन में कोई चिकित्सीय अथवा मृत्यु संबंधी अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए। पुलिस की आख्या में भी आरोपी के दिल्ली में रहकर काम करने का उल्लेख किया गया था। विशेष लोक अभियोजक ने आरोपी के भागने और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग न करने का तर्क रखते हुए जमानत का विरोध किया।