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Farrukhabad News: आलू की मंदी में फंसा केसीसी का ऋण
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फर्रुखाबाद। आलू की मंदी से किसान जहां बर्बाद हो गए, वहीं इसका बड़ा असर बैंकों पर भी पड़ा है। केसीसी धारक 1,06,137 किसानों पर 1733.04 करोड़ ऋण बकाया है। 30641 किसान तो 367.02 करोड़ रुपये कर्ज लेकर बैंक को मूलधन तो दूर की बात ब्याज तक नहीं लौटा सके। इससे उनका केसीसी खाता एनपीए हो गया। ऋण वापस न मिलने से बैंक कर्मी भी परेशान हैं।
जनपद के किसान प्रमुख रूप से आलू की खेती करते हैं। पिछले दो साल से मंदी की मार झेल रहे किसानों ने केसीसी पर ऋण लेकर फसल में लागत लगाई। करीब 43 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल हुई। इस वर्ष शुरुआत से ही भाव अच्छा न मिलने पर किसानों ने शीतगृहों में आलू का भंडारण किया। जनपद में 121 शीतगृह हैं। इनमें 1071964.63 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता है। इसके सापेक्ष 972812.08 मीट्रिक टन आलू भंडारित किया गया।
अब तक आलू का भाव न बढ़ने से शीतगृहों से मात्र 29 प्रतिशत ही निकासी हो सकी। इससे शीतगृहों में अभी 690696.58 मीट्रिक टन आलू भंडारित है। शीतगृह से आलू निकालने पर भंडारण, परिवहन भाड़ा व अन्य खर्च निकालकर कुछ बचता दिखाई नहीं दे रहा है। अच्छे भाव में आलू की बिक्री न होने से किसान की जेब खाली है। इससे वह केसीसी का ऋण भी अदा नहीं कर पा रहे हैं।
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उधर, वसूली का लक्ष्य पूरा करने के लिए बैंक अधिकारी व कर्मचारी भी परेशान हैं। जिले में करीब 2.50 लाख किसान हैं। इनमें एक लाख छह हजार 137 किसानों के केसीसी बने हैं। इन किसानों ने विभिन्न बैंकों से क्रेडिट कार्ड पर ऋण लिया। आलू की मंदी से किसानों ने ऋण अदा नहीं किया। इससे बैंक का किसानों पर 1733.04 करोड़ रुपये ऋण बकाया है।
किसानों ने बयां किया दर्द
फोटो-21 प्रदीप सिंह।
मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव करथिया निवासी प्रदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने बैंक से केसीसी पर ऋण लिया था। आलू सस्ता होने से भी बिक्री नहीं की। इससे केसीसी का ऋण भी जमा नहीं कर पा रहे हैं।
फोटो-22 जगपाल सिंह।
गांव नहरैया निवासी जगपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने केसीसी पर ऋण लेकर आलू की बोआई की थी। मंदी के चलते आलू अभी बेच नहीं पाया, इससे बैंक का ऋण भी जमा नहीं कर सके। आलू का भाव अच्छा मिल गया तो ऋण भी अदा हो जाएगा। अन्यथा अगली फसल में ही ऋण जमा हो सकेगा।
एक वर्ष के अंदर ऋण अदा करने पर तीन प्रतिशत का लाभ
आलू सस्ता होने से किसान केसीसी का ऋण अदा नहीं कर पा रहे हैं। इससे वसूली के लिए बैंक कर्मी भी परेशान हैं। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में बैंक कर्मी ऋण जमा करने का दबाव नहीं बना रहे। केसीसी का ऋण एक वर्ष के अंदर अदा करने पर किसानों को ब्याज पर तीन प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिलता है। इससे ऋण पर किसान को मात्र चार प्रतिशत ही ब्याज देना पड़ता है। समय से ऋण जमा न करने पर यह ब्याज सात प्रतिशत हो जाता है। समझदार किसान निर्धारित समय सीमा में ऋण अदा करने के दो दिन बाद ही फिर ऋण लेकर लाभ उठा रहे हैं।-सुमित अग्निहोत्री, लीड बैंक मैनेजर
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जनपद के किसान प्रमुख रूप से आलू की खेती करते हैं। पिछले दो साल से मंदी की मार झेल रहे किसानों ने केसीसी पर ऋण लेकर फसल में लागत लगाई। करीब 43 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल हुई। इस वर्ष शुरुआत से ही भाव अच्छा न मिलने पर किसानों ने शीतगृहों में आलू का भंडारण किया। जनपद में 121 शीतगृह हैं। इनमें 1071964.63 मीट्रिक टन भंडारण क्षमता है। इसके सापेक्ष 972812.08 मीट्रिक टन आलू भंडारित किया गया।
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अब तक आलू का भाव न बढ़ने से शीतगृहों से मात्र 29 प्रतिशत ही निकासी हो सकी। इससे शीतगृहों में अभी 690696.58 मीट्रिक टन आलू भंडारित है। शीतगृह से आलू निकालने पर भंडारण, परिवहन भाड़ा व अन्य खर्च निकालकर कुछ बचता दिखाई नहीं दे रहा है। अच्छे भाव में आलू की बिक्री न होने से किसान की जेब खाली है। इससे वह केसीसी का ऋण भी अदा नहीं कर पा रहे हैं।
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उधर, वसूली का लक्ष्य पूरा करने के लिए बैंक अधिकारी व कर्मचारी भी परेशान हैं। जिले में करीब 2.50 लाख किसान हैं। इनमें एक लाख छह हजार 137 किसानों के केसीसी बने हैं। इन किसानों ने विभिन्न बैंकों से क्रेडिट कार्ड पर ऋण लिया। आलू की मंदी से किसानों ने ऋण अदा नहीं किया। इससे बैंक का किसानों पर 1733.04 करोड़ रुपये ऋण बकाया है।
किसानों ने बयां किया दर्द
फोटो-21 प्रदीप सिंह।
मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांव करथिया निवासी प्रदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने बैंक से केसीसी पर ऋण लिया था। आलू सस्ता होने से भी बिक्री नहीं की। इससे केसीसी का ऋण भी जमा नहीं कर पा रहे हैं।
फोटो-22 जगपाल सिंह।
गांव नहरैया निवासी जगपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने केसीसी पर ऋण लेकर आलू की बोआई की थी। मंदी के चलते आलू अभी बेच नहीं पाया, इससे बैंक का ऋण भी जमा नहीं कर सके। आलू का भाव अच्छा मिल गया तो ऋण भी अदा हो जाएगा। अन्यथा अगली फसल में ही ऋण जमा हो सकेगा।
एक वर्ष के अंदर ऋण अदा करने पर तीन प्रतिशत का लाभ
आलू सस्ता होने से किसान केसीसी का ऋण अदा नहीं कर पा रहे हैं। इससे वसूली के लिए बैंक कर्मी भी परेशान हैं। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में बैंक कर्मी ऋण जमा करने का दबाव नहीं बना रहे। केसीसी का ऋण एक वर्ष के अंदर अदा करने पर किसानों को ब्याज पर तीन प्रतिशत सब्सिडी का लाभ मिलता है। इससे ऋण पर किसान को मात्र चार प्रतिशत ही ब्याज देना पड़ता है। समय से ऋण जमा न करने पर यह ब्याज सात प्रतिशत हो जाता है। समझदार किसान निर्धारित समय सीमा में ऋण अदा करने के दो दिन बाद ही फिर ऋण लेकर लाभ उठा रहे हैं।-सुमित अग्निहोत्री, लीड बैंक मैनेजर