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फसल बचाने के लिए खेतों में गुजर रही रात
Mon, 07 Jan 2019 10:51 PM IST
मनोज कुमार
farrukhabad
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Published by: मनोज कुमार
Updated Mon, 07 Jan 2019 10:51 PM IST
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Farmer
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अन्ना मवेशी फसल बरबाद कर रहे हैं। इससे परेशान अन्नदाता अपनी फसलें बचाने को कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे जागकर रात गुजारने को मजबूर हैं। एक रात भी चूूके तो सुबह उम्मीदों पर पानी फिरा मिलता है।
शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में इन दिनों तो मानों अन्ना गोवंश की बाढ़ सी आ गई है। झुंड में निकलने वाले मवेशी पलक झपकते ही फसलें चट कर जाते हैं। इससे परेशान किसान अपनी फसलों के आसपास मेड़ पर तार की बाड़ लगा रहे हैं, लेकिन वह भी बेअसर साबित होने लगी है। अन्ना मवेशी तार कूदकर खेतों में घुुस जाते हैं। इससे किसान कड़ाके की ठंड में शाम होते ही लाठी लेकर फसलें बचाने को खेतों में निकल जाते। ठंड व बर्फीली हवाओं में अन्नदाता जागकर खेतों में रात बिताने को मजबूर हैं।
क्षेत्र के गांव करनपुर दत्त, अमृतपुर, कुम्हरौर, अमैयापुर, चपरा, कुबेरपुर, विरसिंहपुर, वीरपुर, भाऊपुर चौरासी, राजेपुर, उजरामऊ, सलेमपुर आदि दर्जनों गांवों के किसान अन्ना मवेशियों से परेशान हैं।
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अन्नदाताओं ने बयां किया दर्द
करनपुर दत्त निवासी वीरभान सिंह का कहना है कि वह गेहूं की फसल रात जागकर बचा रहे हैं। कड़ाके की ठंड में फूस जलाकर आग का सहारा लेते हैं। महोलिया के धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि मौका पाते ही अन्ना मवेशी गेहूं, चना, मसूर की फसल चट कर जाते हैं। नगला हूसा निवासी रामनरेश मिश्रा, प्रभाकर त्रिवेदी, जितेंद्र सिंह, रामकुमार सिंह आदि किसानों ने भी कुछ इसी तरह दर्द बयां किया।
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शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में इन दिनों तो मानों अन्ना गोवंश की बाढ़ सी आ गई है। झुंड में निकलने वाले मवेशी पलक झपकते ही फसलें चट कर जाते हैं। इससे परेशान किसान अपनी फसलों के आसपास मेड़ पर तार की बाड़ लगा रहे हैं, लेकिन वह भी बेअसर साबित होने लगी है। अन्ना मवेशी तार कूदकर खेतों में घुुस जाते हैं। इससे किसान कड़ाके की ठंड में शाम होते ही लाठी लेकर फसलें बचाने को खेतों में निकल जाते। ठंड व बर्फीली हवाओं में अन्नदाता जागकर खेतों में रात बिताने को मजबूर हैं।
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क्षेत्र के गांव करनपुर दत्त, अमृतपुर, कुम्हरौर, अमैयापुर, चपरा, कुबेरपुर, विरसिंहपुर, वीरपुर, भाऊपुर चौरासी, राजेपुर, उजरामऊ, सलेमपुर आदि दर्जनों गांवों के किसान अन्ना मवेशियों से परेशान हैं।
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अन्नदाताओं ने बयां किया दर्द
करनपुर दत्त निवासी वीरभान सिंह का कहना है कि वह गेहूं की फसल रात जागकर बचा रहे हैं। कड़ाके की ठंड में फूस जलाकर आग का सहारा लेते हैं। महोलिया के धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि मौका पाते ही अन्ना मवेशी गेहूं, चना, मसूर की फसल चट कर जाते हैं। नगला हूसा निवासी रामनरेश मिश्रा, प्रभाकर त्रिवेदी, जितेंद्र सिंह, रामकुमार सिंह आदि किसानों ने भी कुछ इसी तरह दर्द बयां किया।