फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Farrukhabad News ›   Nagas are the enemy of the British Saints

ब्रिटिश शासकों के दुश्मन रहे नागा संन्यासी

Mon, 26 Jan 2015 12:06 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद Updated Mon, 26 Jan 2015 12:06 AM IST
विज्ञापन
Nagas are the enemy of the British Saints
नागा संन्यासी परतंत्र भारत के ब्रिटिश शासकाें से आज भी दुश्मनी निभा रहे
विज्ञापन
हैं। नागा परंपरा के मंदिराें में ब्रिटिश शासकाें के चित्र वाले सिक्के फर्श में चिनवाए गए हैं। ऐसा इनके अपमान के लिए किया गया है। नागा अखाड़े आजादी के दौरान क्रांतिकारियाें की गतिविधियों के केंद्र भी रहे हैं।

नागा परंपरा के पीलीभीत के गौरीशंकर मंदिर व गोला गोकर्णनाथ मंदिर में परतंत्र देश के ब्रिटिश हुक्मरानाें के सिक्के फर्श में चिनवाए गए थेे। इनके अलावा भी प्राचीन मंदिरों में ब्रिटिश हुक्मरानाें के चित्र वाले सिक्के फर्श में लगवाए गए हैं।  पंचदशनाम जूना अखाड़े के महंत योगेश्वरानंद गिरी का कहना है कि ब्रिटिश हुकूमत ने धर्म को भी नुकसान पहुंचाया। यहां के लोगाें पर

जुल्म किए गए। महिलाआें और बच्चाें का कत्ल हुआ। खेत खलिहानाें और बस्तियाें को आग के हवाले किया गया। नागा संन्यासी आज भी इनसे दुश्मनी निभा रहे हैं। इनके चित्राें के ऊपर से गुजरकर अपमान किया जाता है।
ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ 1762 में पहला विद्रोह संन्यासियाें ने किया था।

ब्रिटिश इतिहासकार थॉमस लॉ ने भी इसका जिक्र किया है। 1770 में बंगाल में अकाल के बाद संन्यासियाें ने ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ आंदोलन तेज कर दिया था। इन्हाेंने ब्रिटिश फै क्ट्रियाें, कार्यालयाें पर हमले किए। अंग्रेज कंपनियों ने इन्हें पकड़ने के लिए सेनाएं भेजीं लेकिन यह पकड़ में नहीं आए। सन् 1873 में अंग्रेज हुक्मरानाें के माथे पर तिलक न लगाने के बयान से भी संन्यासी भड़के थे।

कारतूसाें पर मांस की खबरें फैलाईं
महंत योगेश्वरानंद का कहना है कि 1857 की क्रांति में नागा संन्यासियाें ने कारतूसाें में गाय और सुअर की चर्बी लगी होने की खबराें को देश के हर हिस्से में पहुंचाया। इनके अनुयायी जगह-जगह थे। इससे इनका नेटवर्क पूरे देश में था। अनुयायियाें ने इनकी बात को माना भी। इससे भारतीयाें ने अंग्रेजाें की ओर से लड़ने से मना कर  दिया था।

दान से क्रांतिकारियाें की मदद
सत्यगिरी  का कहना है कि नागा संन्यासियाें ने दान के पैसाें से क्रांतिकारियाें की मदद की। इससे आजादी की लड़ाई के लिए हथियार खरीदे गए। नागाआें क ो अस्त्र शस्त्र रखने से मनाही नहीं थी। इनके जत्थों ने कई बार अंग्रेजाें पर हमले कर इनके छक्के छुड़ाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed