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आधुनिक उपकरणों को तरस रहा विजन सेंटर
ब्यूरो, अमर उजाला फर्रुखाबाद
Updated Wed, 15 Apr 2015 11:23 PM IST
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कायमगंज सीएचसी के विजन सेंटर (नेत्र परीक्षण केंद्र) में मरीजों की संख्या
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बढ़ रही है। आईओएल सेंटर होने के कारण यहां कंप्यूटराइज्ड ऑटो रेफ्टोमीटर
की जरूरत है। इसकी मांग कई बार भेजी जा चुकी है। सर्दी के मौसम में
मोतियाबिंद के 50 से अधिक आपरेशन सीएचसी में होने के कारण यहां नेत्र सर्जन
की जरूरत है।
सीएचसी के विजन सेंटर (नेत्र परीक्षण केंद्र) में केरोमीटर, स्लिट लैंप, एस्केन और आपरेटिंग माइक्रोस्कोप है। यह आंखों की जांच और चश्मों का परीक्षण किया जा रहा है। इसके लिए तरीका पुराना ही इस्तेमाल हो रहा है। यहां रोज 70 से 80 आंख के मरीज आते हैं। इन्हें सीएचसी की ओर से दवाओं के अलावा प्रेस बायोपिक चश्मे उपलब्ध कराए जाते हैं। केंद्र में बिजली नहीं है। नेत्र जांच के लिए ओपीडी के समय बिजली न होने से दिक्कतें होती हैं।
नेत्र परीक्षण अधिकारी आरके चतुर्वेदी ने बताया कि केंद्र पर एक सोलर लाइट लगवा दी जाए तो बिजली समस्या का समाधान हो सकता है। ऑटो रेफ्टोमीटर की कई बार मांग शासन को भेजी जा चुकी है। सर्दी के मौसम में मोतिया बिंद के प्रतिमाह 50 से अधिक आपरेशन कराए जाते हैं। इसके लिए नेत्र सर्जन को मुख्यालय से बुलाया जाता है। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुविधा के लिए नई तकनीक के उपकरणों का होना जरूरी है। यह उपकरण उपलब्ध करा दिए जाएं तो मरीजों को निजी चिकित्सालयों में जाने से रोका भी जा सकता है।
सीएचसी के विजन सेंटर (नेत्र परीक्षण केंद्र) में केरोमीटर, स्लिट लैंप, एस्केन और आपरेटिंग माइक्रोस्कोप है। यह आंखों की जांच और चश्मों का परीक्षण किया जा रहा है। इसके लिए तरीका पुराना ही इस्तेमाल हो रहा है। यहां रोज 70 से 80 आंख के मरीज आते हैं। इन्हें सीएचसी की ओर से दवाओं के अलावा प्रेस बायोपिक चश्मे उपलब्ध कराए जाते हैं। केंद्र में बिजली नहीं है। नेत्र जांच के लिए ओपीडी के समय बिजली न होने से दिक्कतें होती हैं।
नेत्र परीक्षण अधिकारी आरके चतुर्वेदी ने बताया कि केंद्र पर एक सोलर लाइट लगवा दी जाए तो बिजली समस्या का समाधान हो सकता है। ऑटो रेफ्टोमीटर की कई बार मांग शासन को भेजी जा चुकी है। सर्दी के मौसम में मोतिया बिंद के प्रतिमाह 50 से अधिक आपरेशन कराए जाते हैं। इसके लिए नेत्र सर्जन को मुख्यालय से बुलाया जाता है। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुविधा के लिए नई तकनीक के उपकरणों का होना जरूरी है। यह उपकरण उपलब्ध करा दिए जाएं तो मरीजों को निजी चिकित्सालयों में जाने से रोका भी जा सकता है।