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रोडवेज स्टाफ को मास्क व सैनिटाइजर न मिलने पर हंगामा
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फर्रुखाबाद। कोरोना वायरस की रोकथाम को चल रहे लॉकडाउन में मजदूर फंसे हुए हैं। इससे दो दिन में फर्रुखाबाद डिपो की 43 बसें भेजकर सवारियां लायी गईं। बस में 56 सवारियों की सीटों की जगह 100-100 से अधिक सवारियां आईं। हालात यह हैं कि सोशल डिस्टेंसिंग (निर्धारित दूरी) पूरी तरह धड़ाम होने के साथ चालक-परिचालकों को मास्क व सैनिटाइजर भी नहीं दिए गए। सवारियां लेकर लौटीं बसों की भी सैनिटाइजिंग नहीं कराई गई। इसे लेकर रविवार को फतेहगढ़ स्थित रोडवेज वर्कशाप पर कर्मचारियों ने हंगामा कर दिया। कर्मचारी नेता के कहने पर एआरएम ने हड़काकर भगा दिया। जिलाधिकारी से शिकायत पर अधिकारी हरकत में आए।
फतेहगढ़ स्थित रोडवेज वर्कशाप में सुबह करीब 11 बजे बिना मास्क लगाए चालक व परिचालक घूम रहे थे। उनसे मास्क मिलने की जानकारी की तो सभी एक साथ आ गए। चालक श्रवण, अखिलेश, आदेश गंगवार, रजनेश सिंह, नरेंद्र सिंह, विमल दीक्षित, बृजेश सिंह यादव, मदन सिंह, मिस्त्री राजेंद्र आदि एक स्वर में बोले कि न मास्क दिया गया और न ही सैनिटाइजर। वर्कशाप आने के बाद भी हाथ धुलने को साबुन नहीं है। इसी बीच समय व्यवस्थापक योगेंद्र सक्सेना ने कहा कि करीब 100-125 मास्क बांटे जा चुके हैं। इतना सुनते ही कर्मचारियों ने कहा कि आखिर किसको और कब। इसको लेकर दोनों में नोकझोंक के बीच हंगामे की स्थिति बन गई। कर्मचारियों ने बताया कि कोरोना वायरस से बचने की उन लोगों को कोई व्यवस्था मुहैया नहीं कराई गई। दिल्ली से लौटने के बाद बसों की सैनिटाइजिंग तो दूर, न झाड़ू लगी और न ही धुलाई हुई। धुलाई केंद्र भी काफी दिनों से ठप पड़ा है। इससे उन लोगों को कोरोना वायरस का खौफ सता रहा है। कार्यशाला अध्यक्ष पंकज वर्मा ने करीब दो दर्जन कर्मचारियों के साथ जाकर एआरएम को जानकारी दी तो उन्होंने भी उल्टा हड़का दिया। इस पर कंट्रोल रूम फोन कर जिलाधिकारी व सिटी मजिस्ट्रेट से शिकायत की गई। इसी के बाद अधिकारी हरकत में आए। दोपहर बाद ब्लीचिंग पाउडर घोलकर बोतलों में भरवाया गया। उसी से बसों की सैनिटाइजिंग शुरू हो गई।
एआरएम अंकुर विकास ने बताया कि बसों की सैनिटाइजिंग शुरू करा दी गई है। मास्क सभी को एक बार दिए जा चुके हैं, जो चार घंटे के लिए ही उपयोगी हो सके। मास्क व सैनिटाइजर बाजार में नहीं मिल पा रहे। बसों की सफाई कराई जा रही है।
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फतेहगढ़ स्थित रोडवेज वर्कशाप में सुबह करीब 11 बजे बिना मास्क लगाए चालक व परिचालक घूम रहे थे। उनसे मास्क मिलने की जानकारी की तो सभी एक साथ आ गए। चालक श्रवण, अखिलेश, आदेश गंगवार, रजनेश सिंह, नरेंद्र सिंह, विमल दीक्षित, बृजेश सिंह यादव, मदन सिंह, मिस्त्री राजेंद्र आदि एक स्वर में बोले कि न मास्क दिया गया और न ही सैनिटाइजर। वर्कशाप आने के बाद भी हाथ धुलने को साबुन नहीं है। इसी बीच समय व्यवस्थापक योगेंद्र सक्सेना ने कहा कि करीब 100-125 मास्क बांटे जा चुके हैं। इतना सुनते ही कर्मचारियों ने कहा कि आखिर किसको और कब। इसको लेकर दोनों में नोकझोंक के बीच हंगामे की स्थिति बन गई। कर्मचारियों ने बताया कि कोरोना वायरस से बचने की उन लोगों को कोई व्यवस्था मुहैया नहीं कराई गई। दिल्ली से लौटने के बाद बसों की सैनिटाइजिंग तो दूर, न झाड़ू लगी और न ही धुलाई हुई। धुलाई केंद्र भी काफी दिनों से ठप पड़ा है। इससे उन लोगों को कोरोना वायरस का खौफ सता रहा है। कार्यशाला अध्यक्ष पंकज वर्मा ने करीब दो दर्जन कर्मचारियों के साथ जाकर एआरएम को जानकारी दी तो उन्होंने भी उल्टा हड़का दिया। इस पर कंट्रोल रूम फोन कर जिलाधिकारी व सिटी मजिस्ट्रेट से शिकायत की गई। इसी के बाद अधिकारी हरकत में आए। दोपहर बाद ब्लीचिंग पाउडर घोलकर बोतलों में भरवाया गया। उसी से बसों की सैनिटाइजिंग शुरू हो गई।
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एआरएम अंकुर विकास ने बताया कि बसों की सैनिटाइजिंग शुरू करा दी गई है। मास्क सभी को एक बार दिए जा चुके हैं, जो चार घंटे के लिए ही उपयोगी हो सके। मास्क व सैनिटाइजर बाजार में नहीं मिल पा रहे। बसों की सफाई कराई जा रही है।
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